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कुछ लोग जल्दी शोहरत पाने के लिए संगीत में फूहड़ता परोस रहेः अनूप जलोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,चंदौली
Updated Wed, 21 Mar 2018 12:37 AM IST
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चंदौली में सितारा देवी संगीत समारोह में शिरकत करने आए हैं भजन सम्राट
- फोटो : अमर उजाला
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भजन सम्राट अनूप जलोटा ने मंगलवार को कहा कि कोई संगीत खराब नहीं होता। प्रस्तुति का समय खराब होता है। अच्छा संगीत हमेशा लोगों के जेहन में बसा रहता है। गीत ऐसा होना जिसे परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर सुन सके।
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन, मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो... जैसे गीत वर्षों बाद भी लोग एक साथ बैठकर सुनते हैं। अनूप जलोटा चंदौली के धानापुर में आयोजित सितारा देवी संगीत समारोह में शिरकत करने से पहले नगर के एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि आज क्लासिकल गायक नहीं आ रहे हैं। क्लासिकल और भजन की मांग बराबर बनी हुई है। हां कुछ लोग जल्दी शोहरत पाने के लिए फूहड़ता परोस रहे हैं लेकिन इसकी उम्र अधिक नहीं होती। लेकिन, ऐसा नहीं होना चाहिए। संगीत एक साधना है।
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उन्होंने कलाकारों को ऐसे गीतों से बचने की सलाह दी। पूर्वांचल पर चर्चा करते हुए कहा कि वाराणसी देश की सांस्कृतिक राजधानी है। यहां आते ही कलाकारों की याद आती है। आज भी वाराणसी में रविशंकर, बिस्मिल्लाह खां, गिरिजा देवी, मियाद अली की याद ताजा हो जाती है।
भजन सम्राट ने कहा कि कि संगीत कोई खराब नहीं होता है, लोक संगीत तो मिट्टी से रचा बसा है लेकिन आज लोग संगीत को व्यापार के नजरिये से देख रहे हैं। इससे संगीत में गिरावट आई है। उन्होंने धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों के बारे में कहा कि श्रीराम या फिर मस्जिद के नाम पर जो लोग वोट मांगे, उसका बहिष्कार कर देना चाहिए।
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ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन, मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो... जैसे गीत वर्षों बाद भी लोग एक साथ बैठकर सुनते हैं। अनूप जलोटा चंदौली के धानापुर में आयोजित सितारा देवी संगीत समारोह में शिरकत करने से पहले नगर के एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि आज क्लासिकल गायक नहीं आ रहे हैं। क्लासिकल और भजन की मांग बराबर बनी हुई है। हां कुछ लोग जल्दी शोहरत पाने के लिए फूहड़ता परोस रहे हैं लेकिन इसकी उम्र अधिक नहीं होती। लेकिन, ऐसा नहीं होना चाहिए। संगीत एक साधना है।
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उन्होंने कलाकारों को ऐसे गीतों से बचने की सलाह दी। पूर्वांचल पर चर्चा करते हुए कहा कि वाराणसी देश की सांस्कृतिक राजधानी है। यहां आते ही कलाकारों की याद आती है। आज भी वाराणसी में रविशंकर, बिस्मिल्लाह खां, गिरिजा देवी, मियाद अली की याद ताजा हो जाती है।
भजन सम्राट ने कहा कि कि संगीत कोई खराब नहीं होता है, लोक संगीत तो मिट्टी से रचा बसा है लेकिन आज लोग संगीत को व्यापार के नजरिये से देख रहे हैं। इससे संगीत में गिरावट आई है। उन्होंने धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों के बारे में कहा कि श्रीराम या फिर मस्जिद के नाम पर जो लोग वोट मांगे, उसका बहिष्कार कर देना चाहिए।