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बेनियाबाग कब्रिस्तान हत्याकांड: पिता-पुत्र समेत तीन को फांसी और महिला को उम्रकैद, पीटकर हुई थी 4 की हत्या

Fri, 14 Oct 2022 07:12 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Fri, 14 Oct 2022 07:12 PM IST
सार

वाराणसी के बेनियाबाग स्थित कब्रिस्तान में 10 साल पहले हुई चार लोगों की हत्या के मामले में अदालत ने दोषी पाए गए चार अभियुक्तों को सजा सुनाई। 

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Beniyabagh graveyard massacre Three sentenced to death one woman to life imprisonment
शकीला, अरशद, रमजान और अमजद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में 10 साल पहले हुए बेनियाबाग कब्रिस्तान हत्याकांड मामले में शुक्रवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने पिता-पुत्र समेत तीन दोषियों को फांसी और एक को उम्रकैद की सजा सुनाई। चारों पर 75-75 हजार का अर्थदंड लगाया। इन अभियुक्तों को बीते एक अक्तूबर को सत्र अदालत ने दोषी करार दिया था। वर्ष 2012 में बेनिया स्थित कब्रिस्तान विवाद में चार युवकों की लाठी से पीटकर हत्या कर दी गई थी।

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डीजीसी आलोक चंद्र शुक्ला व वादी के अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह चुन्नू बाबू के मुताबिक सरायगोवर्धन, चेतगंज निवासी सईद उर्फ काजू ने 16 जून 2012 को चौक थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि सुबह साढ़े आठ बजे वादी, उसके दो भाई मो. शफीक उर्फ राजू और मो. शकील उर्फ जाऊ, भतीजे चांद रहीमी व शालू के साथ बाबा रहीम शाह की मजार से निकल घर लौट रहा था।
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बीच बचाव करने पहुंचे लोगों पर भी हमला
उसी दौरान अमजद, इकबाल राइन, अरशद, रमजान व अमजद की पत्नी शकीला व उसकी बेटी शबनम आदि ने कब्रिस्तान के समीप घेर लिया और बांस के डंडे से वार किया। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं। शोर गुल सुनकर मजार की साफ-सफाई करने वाले कामिल और भतीजा बीच बचाव करने पहुंचे तो हमलावरों ने उन्हें भी घेर लिया और बेरहमी से मार पीटा।

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पिटाई से मौके पर ही वादी के भाई शफीक उर्फ राजू व कामिल भाई की मौत हो गई और अन्य घायलों को वादी व मोहल्ले के लोग अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां एक और भाई शकील उर्फ जाऊ की मौत हो गई। घटना में गंभीर रूप से घायल भतीजे चांद रहीमी की कुछ दिनों बाद उपचार के दौरान अस्पताल में मौत हो गई थी।

सत्र न्यायाधीश डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने मृत्युदंड का फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियुक्त अमजद, रमजान और अरशद के गले में फांसी का फंदा डालकर उन्हें तब तक लटकाया जाएगा, जब तक उनकी मृत्यु हो न जाए। कोर्ट ने अमजद की पत्नी शकीला को उम्रकैद और 75 हजार का जुर्माना लगाया।

इसके पहले अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के इस तर्क से सहमत है कि अमजद, रमजान, अरशद ने चार व्यक्तियों की हत्या की और हत्या का अपराध अत्यधिक क्रूरता व बर्बरतापूर्वक किया गया। अभियुक्त शकीला को महिला होने व अपराध में उसकी मुख्य भूमिका न होने के कारण उसे आजीवन कारावास व जुर्माने से दंडित किया गया।

सिर की हड्डी हुई चूर, आंखें कूंची गईं

Beniyabagh graveyard massacre Three sentenced to death one woman to life imprisonment
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

सजा बिंदु पर अभियोजन की तरफ से तर्क दिया गया कि चारों अभियुक्तों ने बांस व बांस के डंडों से निर्दयतापूर्वक वार कर चार व्यक्तियों की हत्या की और एक व्यक्ति को गंभीर चोटें पहुंचाई। हमले में मो. सफीक के सिर की चारों हड्डियां और जबड़े की हड्डी टूट गई और दाहिनी आंख को कूंच दिया गया था। मृतक कामिल के सिर की हड्डी टूट गई, मृतक जाऊ के जबड़े की हड्डी और मस्तक फट गया। मृतक चांद की नाक व जबड़े की हड्डी टूट गई थी। तर्क में कहा कि यह प्रकरण विरल से विरलतम की श्रेणी में आता है।

आजादी के बाद यह पहला मामला

डीजीसी आलोक चंद्र शुक्ल व वादी के अधिवक्ता अनिल सिंह चुन्नु बाबू के मुताबिक आजादी के बाद यह पहला मामला है, जिसमें चार व्यक्तियों के क्रूर हत्या के मामले तीन दोषियों को एक साथ मृत्युदंड दिया गया है। दोषमुक्त हुए इकबाल राईन के खिलाफ उच्च न्यायालय में आपराधिक अपील की जाएगी।

तीन चश्मदीद समेत 13 गवाहों ने फंदे तक पहुंचाया
चेतगंज सराय गोवर्धन निवासी अरशद, अमजद, रमजान और शकीला को सजा दिलाने में दो घायल, तीन चश्मदीद साक्षी समेत 13 गवाहों का बयान महत्वपूर्ण बना। सभी अभियुक्तों पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माने की आधी धनराशि पीड़ित परिवार को बतौर क्षतिपूर्ति का भी आदेश कोर्ट ने दिया है।

सजा सुनने के बाद हुए बदहवाश

मृत्युदंड की सजा पाने वालों में चौक थाना अंतर्गत नरकट का तकिया निवासी अमजद व रमजान सगे भाई हैं। जबकि अमजद का पुत्र अरशद है। सजा पर फैसला आते ही सभी बदहवाश हो गए। शकीला जहां खामोश हो गई तो वहीं अजमद ऊपर की तरफ देखते हुए कुछ देर बाद नीचे एक तरफ सिर पर दोनों हाथ धर बैठ गया। विवाद का मूल जड़ एक मकान रहा, जिसे अमजद का भाई इकबाल राइन खरीदना चाहता था, जिसका मृतक परिवार विरोध करता था।

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