Sawan: बंगाल के बावरी समाज से ओडिशा के मछुआरों तक ने किया बाबा का जलाभिषेक, गोदौलिया से धाम तक 8 घंटे चले पैदल
Varanasi News: श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में 18 घंटे में सावन के पहले सोमवार पर करीब 6 लाख भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया। ओडिशा के मछुआरों और दलोई जनजाति से लेकर बंगाल के बावरी समाज सहित कई समुदायों के लोग बाबा के धाम में पहुंचे।
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सावन के पहले सोमवार को कावंड़ियों, काशीवासियों, पूर्वांचलियों की भावनाएं विश्वनाथ के उद्घोष के रूप में छलकीं। ओडिशा के मछुआरों और दलोई जनजाति से लेकर बंगाल के बावरी समाज सहित कई समुदायों के लोग बाबा के दर्शन के लिए कतारों में गोदौलिया से धाम तक आठ से 10 घंटे तक पदयात्रा करते दिखे।
ओडिशा से आईं महिलाएं स्नान के बाद सिर पर दो-दो ताम्र कलश में गंगाजल लेकर दो किलोमीटर तक पैदल चलीं। कतार में होने के बावजूद जल भरा कलश छलका तक नहीं। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में 18 घंटे में करीब 6 लाख भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया।
भोर में बारिश के बीच प्रशासन की पुष्पवर्षा से कावंड़ियों और आम भक्तों की सुगंधित आगवानी हुई, तो वहीं रात में शयन आरती के बाद सजे बाबा विश्वनाथ के जटाधारी शंकर स्वरूप की मनमोहक झलक मिली।
ज्योतिर्लिंग और चल प्रतिमा का शृंगार और शयन आरती में काशीवासी युवा भक्तों के गले की शिव निनाद ने बाहर से आए भक्तों की भी ऊर्जा बढ़ा दी। मंडलायुक्त एस राजलिंगम और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, सीईओ विश्वभूषण और एसडीए शंभू शरण ने सोमवार को सुबह पांच बजे से पहले ही भक्तों पर पुष्प वर्षा की। इसके बाद हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ 4-5 घंटे से लाइनों में लगे भक्त मंदिर में प्रवेश कर गए।
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काशी द्वार 4बी से एक घंटा, गौदोलिया से चार से सात घंटे, चौक से तीन से चार घंटे और गंगा द्वार से दो से तीन घंटे में दर्शन मिला। सोमवार को आधी रात दर्शन के लिए कतारबद्ध होने के बावजूद भी दिन में भक्तों को उत्साह कम नहीं हुआ। बाढ़ न होने के चलते गंगा द्वार से भी भक्त दर्शन करते रहे। वहीं, गोदौलिया पर पिछले साल की तरह से चौक की ओर जाने वाले आम लोगों को नहीं रोका गया।
कुल व ईष्ट देवता भगवान भोले शंकर हैं। तांबे के कलश से महिलाएं बाबा को गंगा जल चढ़ा कर अभिषेक करती हैं। हमारे क्षेत्र में काशी का विशेष महत्व है। दर्शन पूजन के बाद घर लौटेंगे। हम लोग हर साल बाबा को जल चढ़ाने आते हैं। -वापी, ओडिशा