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बनारस बार लड़ेगा जमीन की ‘जंग’

Tue, 27 Sep 2016 01:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 27 Sep 2016 01:44 AM IST
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चंद रुपये सालाना किराया देकर नजूल की जमीन पर पट्टा अवधि समाप्त होने के बावजूद स्थापित बनारस क्लब का मामला तूल पकड़ गया है। पूर्व मंत्री और एमएलसी शतरुद्र प्रकाश द्वारा कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव से की गई शिकायत के बाद इस मामले में अधिवक्ता भी गंभीर हो गए हैं। बनारस बार एसोसिएशन ने साफ कह दिया कि कचहरी से सटी हुई सरकारी जमीन का अवैध तरीके से उपयोग एक क्लब और इससे जुड़े गिनती के लोग ही न करें। उक्त जमीन को कब्जा मुक्त कराकर वहां पर कचहरी परिसर का विस्तार किया जाए। ऐसा होने पर हजारों अधिवक्ताओं व वादकारियों और न्यायिक अधिकारियों को सुकून मिलेगा। इस बीच आवंटित जमीन के मामले की जांच प्रमुख सचिव राजस्व से कराने के मंत्री के आदेश के बाद राजस्व विभाग और बनारस क्लब में हड़कंप मच गया है।
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 बनारस बार एसोसिएशन के महामंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि जिस सरकारी जमीन पर बनारस क्लब स्थापित है। उस पर कचहरी परिसर विस्तार के संबंध में हम शतरुद्र प्रकाश की मांग का समर्थन करते हैं। इस बारे में ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित समाचार के आधार पर सोमवार को अधिवक्ता बटुक मौर्या ने एसोसिएशन के सामने प्रस्ताव पेश किया है। प्रस्ताव पर मंगलवार को चर्चा कर कमिश्नर और डीएम से मुलाकात की जाएगी। मांग करेंगे कि नजूल की बेशकीमती जमीन जिसकी पट्टा अवधि खत्म हो जाने के डेढ़ साल बाद भी बनारस क्लब स्थापित है, उसे हटाया जाए। मांग पर विचार नहीं हुआ तो बुधवार से बनारस क्लब के गेट के सामने क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी यदि कचहरी परिसर विस्तार की बात नहीं बनी तो उच्च न्यायालय की शरण ली जाएगी। राय ने कहा कि अधिवक्ताओं और वादकारियों की बढ़ रही संख्या की तुलना में कचहरी परिसर बहुत छोटा व संकरा है। क्लब को पूर्व में आवंटित की गई सरकारी जमीन अगर कचहरी परिसर विस्तार के लिए मिल जाएगी तो अधिवक्ताओं और वादकारियों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान, बंदियों के लिए लॉकअप और न्यायिक कार्यों व अधिकारियों के लिए जरूरी कक्षों का निर्माण कराया जा सकेगा। पार्किंग के लिए भी पर्याप्त जगह मिल जाएगी तो कचहरी के सामने दिन भर जाम नहीं लगेगा। इसके साथ ही आतंकवादी हमले का दंश झेल चुकी कचहरी की सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने में भी पुलिस को सहूलियत मिलेगी।
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रसूखदार लोगों के बनारस क्लब पर नगर निगम का गृह कर की मद में साढ़े पंद्रह लाख रुपये से अधिक का बकाया है। अगर इतना रुपया आम आदमी का बकाया होता तो नगर निगम प्रशासन अब तक उसकी कुर्की करा चुका होता। मगर, बनारस क्लब के संबंध में लाखों रुपये की बकाया वसूली के लिए नगर निगम ने नोटिस जारी की और भूल गया। नगर निगम के कर विभाग के अनुसार वर्ष 2014-15, 2015-16 और 2016-17 का साढ़े पंद्रह लाख से ज्यादा गृह कर क्लब द्वारा जमा नहीं किया गया है। इस संबंध में नगर निगम से नोटिस जारी होने के बावजूद क्लब की ओर से भुगतान के संबंध में गंभीरता नहीं दिखाई गई। अधिकारियों का कहना है कि बनारस क्लब हमारे टॉप बकाएदारों में से एक है। बकाया भुगतान के लिए क्लब को नोटिस जारी की गई है। जल्द ही एक रिमाइंडर भेजा जाएगा। भुगतान नहीं किया गया तो विधिक प्रक्रिया का अनुपालन कर वसूली की जाएगी।
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