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वाराणसी में एटीएस ने बरामद किए आठ लाख के नकली नोट, एक गिरफ्तार
Tue, 01 Jan 2019 10:36 AM IST
shashikant misra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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Published by: shashikant misra
Updated Tue, 01 Jan 2019 10:36 AM IST
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बरामद नकली नोट
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश एटीएस की वाराणसी इकाई को बड़ी सफलता मिली है। इकाई ने आठ लाख रुपये के जाली नोट के साथ एक अपराधी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के बाद एटीएस ने अपराधी को शिवपुर थाने को सुपुर्द कर दिया।
वाराणसी के शिवपुर थाना अंतर्गत गिलट बाजार से सोमवार की रात एटीएस की वाराणसी इकाई ने बिहार के पूर्वी चंपारण के नोनिया निवासी नवीन कुमार को आठ लाख के दो हजार के 400 जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया।
एटीएस की वाराणसी इकाई के निरीक्षक शैलेंद्र त्रिपाठी को सूचना मिली थी कि बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के मालदा होते हुए जाली नोटों की खेप वाराणसी से पुणे जाने वाली है। इस सूचना को सर्विलांस और मुखबिरों के सहारे विकसित कर एटीएस इंस्पेक्टर ने अपनी टीम के साथ गिलट बाजार में घेरेबंदी की।
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मुखबिर की मदद से नवीन को चिन्हित कर हिरासत में लिया गया और तलाशी के दौरान जाली नोट बरामद कर उससे पूछताछ शुरू की गई। पूछताछ में पता लगा कि वो ट्रेन से आया। लखनऊ रवाना होने से पहले अपने एक करीबी से मिलने के लिए गिलट बाजार गया और लखनऊ की बस पर बैठने के लिए खड़ा था। इसी बीच उसे एटीएस की टीम ने गिरफ्तार कर लिया।
एटीएस की वाराणसी इकाई के अनुसार जाली नोट बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के मालदा लाकर आरोपी महाराष्ट्र के पुणे ले जाकर बेंचता। नवीन गिलट बाजार में किससे मिलने आया था और उसके संपर्क में अन्य कौन लोग हैं, इस संबंध में पूछताछ जारी है।
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वाराणसी के शिवपुर थाना अंतर्गत गिलट बाजार से सोमवार की रात एटीएस की वाराणसी इकाई ने बिहार के पूर्वी चंपारण के नोनिया निवासी नवीन कुमार को आठ लाख के दो हजार के 400 जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया।
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एटीएस की वाराणसी इकाई के निरीक्षक शैलेंद्र त्रिपाठी को सूचना मिली थी कि बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के मालदा होते हुए जाली नोटों की खेप वाराणसी से पुणे जाने वाली है। इस सूचना को सर्विलांस और मुखबिरों के सहारे विकसित कर एटीएस इंस्पेक्टर ने अपनी टीम के साथ गिलट बाजार में घेरेबंदी की।
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मुखबिर की मदद से नवीन को चिन्हित कर हिरासत में लिया गया और तलाशी के दौरान जाली नोट बरामद कर उससे पूछताछ शुरू की गई। पूछताछ में पता लगा कि वो ट्रेन से आया। लखनऊ रवाना होने से पहले अपने एक करीबी से मिलने के लिए गिलट बाजार गया और लखनऊ की बस पर बैठने के लिए खड़ा था। इसी बीच उसे एटीएस की टीम ने गिरफ्तार कर लिया।
एटीएस की वाराणसी इकाई के अनुसार जाली नोट बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के मालदा लाकर आरोपी महाराष्ट्र के पुणे ले जाकर बेंचता। नवीन गिलट बाजार में किससे मिलने आया था और उसके संपर्क में अन्य कौन लोग हैं, इस संबंध में पूछताछ जारी है।
एटीएस ने चार महीने में 12.90 लाख के जाली नोट बरामद किए
गिरफ्तार आरोपी
- फोटो : amar ujala
एटीएस की वाराणसी इकाई ने अक्तूबर में जिले सहित चंदौली, मऊ और आजमगढ़ से जाली नोटों के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तब से अब तक एटीएस 12 लाख 90 हजार के जाली नोट बरामद कर चुकी है। एटीएस के निरीक्षक शैलेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि गिरफ्त में आया नवीन पूर्व में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के गिरोह से ही जुड़ा हुआ है।
गिरोह की जड़ें बिहार और पश्चिम बंगाल तक में हैं। नवीन गिलट बाजार में किससे मिलने आया था और उसके संपर्क में अन्य कौन लोग हैं, इस संबंध में उससे मिली जानकारियों के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी। यह गिरोह चीन निर्मित प्रिंटर के सहारे स्टाम्प पेपर की मदद से जाली नोट बनाने में भी एक्सपर्ट है।
पहाड़ी, जंगली क्षेत्रों के साथ ही जनपद मुख्यालयों से दूरदराज के गांवों में जाली नोट आसानी से चल जाते हैं। जाली नोटों के धंधे से जुड़े स्लीपिंग मॉड्यूल्स को चिह्नित करना आसान नहीं है, क्योंकि इनका मुख्य पेशा कुछ और होता है। मुख्य पेशे की आड़ में ये जाली नोटों को लाने, बेचने और खपाने का काम करते हैं।
एटीएस की वाराणसी इकाई के अनुसार बांग्लादेश से संचालित जाली नोटों का यह धंधा पूर्वांचल, मध्य प्रदेश के बघेलखंड और बुंदेलखंड के साथ महाराष्ट्र के पुणे समेत कई इलाकों तक फैला है। यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह है, जिसके सदस्य पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश से लेकर दक्षिण एशिया के कई देशों में हैं। गिरोह के सदस्य व्हाट्स ऐप कॉल और विशिष्ट कोडयुक्त ई-मेल के सहारे आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
गिरोह की जड़ें बिहार और पश्चिम बंगाल तक में हैं। नवीन गिलट बाजार में किससे मिलने आया था और उसके संपर्क में अन्य कौन लोग हैं, इस संबंध में उससे मिली जानकारियों के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी। यह गिरोह चीन निर्मित प्रिंटर के सहारे स्टाम्प पेपर की मदद से जाली नोट बनाने में भी एक्सपर्ट है।
पहाड़ी, जंगली क्षेत्रों के साथ ही जनपद मुख्यालयों से दूरदराज के गांवों में जाली नोट आसानी से चल जाते हैं। जाली नोटों के धंधे से जुड़े स्लीपिंग मॉड्यूल्स को चिह्नित करना आसान नहीं है, क्योंकि इनका मुख्य पेशा कुछ और होता है। मुख्य पेशे की आड़ में ये जाली नोटों को लाने, बेचने और खपाने का काम करते हैं।
एटीएस की वाराणसी इकाई के अनुसार बांग्लादेश से संचालित जाली नोटों का यह धंधा पूर्वांचल, मध्य प्रदेश के बघेलखंड और बुंदेलखंड के साथ महाराष्ट्र के पुणे समेत कई इलाकों तक फैला है। यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह है, जिसके सदस्य पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश से लेकर दक्षिण एशिया के कई देशों में हैं। गिरोह के सदस्य व्हाट्स ऐप कॉल और विशिष्ट कोडयुक्त ई-मेल के सहारे आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।