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अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर पर नदी विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 06 Jun 2017 06:04 PM IST
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वरुणा कॉरिडोर
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पूर्ववर्ती सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल वरुणा कॉरिडोर की योजना-रचना पर नदी विशेषज्ञ सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी योजना के लिए नदी का प्राकृत स्वरूप कैसे बदला जा सकता है।
योजना जब नदी के उद्धार के लिए बनी तो नदी संरक्षण के कार्यों के बजाए उसकी आड़ में नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ खिलवाड़ किन परिस्थितियों में किया गया। इस योजना के लिए क्या नदी के पारिस्थितिकी के जानकारों की राय ली गई। इसे सार्वजनिक किया जाए कि कॉरिडोर की योजना किस अध्ययन के आधार पर बनाई गई?
वरुणा कॉरिडोर योजना शुरू होने से पहले जब डूब क्षेत्र का सर्वे और सीमांकन कराया जा रहा था तब नदी विशेषज्ञों ने सलाह दी थी कि रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के नाम पर नदी के प्राकृत स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
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बाद में कॉरिडोर की शुरुआत होने पर चिंताएं जाहिर करने पर कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के विशेषज्ञों और प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने भी दावा किया था कि नदी संरक्षण के लिए आधुनिकतम और प्रामाणिक तकनीक इस्तेमाल में लाई जा रही है।
219.13 करोड़ की योजना में अब तक 53 प्रतिशत काम हो चुकी है पर ऐसा कुछ नहीं दिख रहा, जिससे लगे कि वरुणा की चिंता की गई है। नदी विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक कारगर तब होती, जब नदी के मूल प्रवाह के दायरे को छोड़कर दोनों किनारों पर निर्धारित डूब क्षेत्र को खाली कराकर उसे विकसित कराया जाता लेकिन यहां डूब क्षेत्र के बजाए नदी की नेचुरल फ्लो एरिया में ही तटबंध बना दिए गए।
पक्के घाट और रेलिंग का काम शुरू कराकर वरुणा नदी के स्वरूप को नहर में तब्दील कर दिया गया। अब उनका कहना है कि यदि डूब क्षेत्र को खाली कराकर नदी के मूल प्रवाह को उसकी प्राकृतिक स्थिति में नहीं लाया गया तो आने वाले वर्षों में कभी न कभी इसका गंभीर खामियाजा शहर को भुगतना पड़ सकता है।
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योजना जब नदी के उद्धार के लिए बनी तो नदी संरक्षण के कार्यों के बजाए उसकी आड़ में नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ खिलवाड़ किन परिस्थितियों में किया गया। इस योजना के लिए क्या नदी के पारिस्थितिकी के जानकारों की राय ली गई। इसे सार्वजनिक किया जाए कि कॉरिडोर की योजना किस अध्ययन के आधार पर बनाई गई?
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वरुणा कॉरिडोर योजना शुरू होने से पहले जब डूब क्षेत्र का सर्वे और सीमांकन कराया जा रहा था तब नदी विशेषज्ञों ने सलाह दी थी कि रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के नाम पर नदी के प्राकृत स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
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बाद में कॉरिडोर की शुरुआत होने पर चिंताएं जाहिर करने पर कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के विशेषज्ञों और प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने भी दावा किया था कि नदी संरक्षण के लिए आधुनिकतम और प्रामाणिक तकनीक इस्तेमाल में लाई जा रही है।
219.13 करोड़ की योजना में अब तक 53 प्रतिशत काम हो चुकी है पर ऐसा कुछ नहीं दिख रहा, जिससे लगे कि वरुणा की चिंता की गई है। नदी विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक कारगर तब होती, जब नदी के मूल प्रवाह के दायरे को छोड़कर दोनों किनारों पर निर्धारित डूब क्षेत्र को खाली कराकर उसे विकसित कराया जाता लेकिन यहां डूब क्षेत्र के बजाए नदी की नेचुरल फ्लो एरिया में ही तटबंध बना दिए गए।
पक्के घाट और रेलिंग का काम शुरू कराकर वरुणा नदी के स्वरूप को नहर में तब्दील कर दिया गया। अब उनका कहना है कि यदि डूब क्षेत्र को खाली कराकर नदी के मूल प्रवाह को उसकी प्राकृतिक स्थिति में नहीं लाया गया तो आने वाले वर्षों में कभी न कभी इसका गंभीर खामियाजा शहर को भुगतना पड़ सकता है।