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Ahoi Ashtami 2022: सप्तऋषि मंडल के तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलेंगी माताएं, क्या है मान्यता और व्रत की विधि ?
Sat, 15 Oct 2022 11:56 AM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Sat, 15 Oct 2022 11:56 AM IST
सार
Ahoi Ashtami puja vidhi:17 अक्तूबर को माताएं संतान की दीर्घायु और कल्याण के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी। कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई व्रत आता है। करवाचौथ के तीन दिन बाद पड़ने वाले व्रत में भगवान शंकर और माता पार्वती की विधिविधान से पूजा की जाती है। जानिए क्या पूजा विधि..
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अहोई अष्टमी
- फोटो : self
विस्तार
संतान की दीर्घायु और कल्याण के लिए माताएं 17 अक्तूबर को अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी। दिन भर भूखी प्यासी रहने के बाद सप्तऋषि मंडल के तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलेंगी। बच्चों की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य की कामना से माताएं व्रत रखेंगी। इसके अलावा निसंतान माताएं भी इस व्रत को रखती हैं। व्रत की तैयारी शुरू हो चुकी है।
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सुंदरपुर निवासी मोना मेहरोत्रा बताती हैं कि माताएं ऊषाकाल से लेकर गोधूलि बेला तक उपवास करती हैं। फिर रात को आकाश में सप्तऋषि मंडल के तारों को देखने के बाद व्रत तोड़ती हैं।
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कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई व्रत आता है। करवाचौथ के तीन दिन बाद पड़ने वाले व्रत में भगवान शंकर और माता पार्वती की विधिविधान से पूजा की जाती है।
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क्या है व्रत की विधि ?
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि पहले दीवार या कागज पर गेरु से अहोई माता का चित्र बनाकर या बाजार से खरीदे चित्र के सामने जल से भरा एक कलश रखें। रोली-चावल से माता की पूजा करें। फिर भोग लगाएं। कलश पर स्वास्तिक बनाने के बाद अनाज के सात दाने लें, इसके बाद अहोई माता की कथा सुनें।