{"_id":"5a172d7a4f1c1b4c528b53f6","slug":"81511468410-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपा सरकार में बंटी धनराशि का डाटा ले गई कैग टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सपा सरकार में बंटी धनराशि का डाटा ले गई कैग टीम
Updated Fri, 24 Nov 2017 01:58 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। सपा सरकार के पांच सालों में अनुसूचित जाति और जनजाति को बांटी गई छात्रवृत्ति का ब्योरा कैग टीम ले गई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी आरके यादव के अनुसार पूरा डाटा कैग टीम को उपलब्ध कराया गया है। अभी कैग टीम और शासन से इस संबंध में कोई रिपोर्ट या दिशा निर्देश नहीं आया है। कोई धनराशि विभाग के पास नहीं आती है। शिक्षण संस्थाएं जिन छात्रों की संस्तुति करते हैं। उसकी जानकारी शासन को भेजी जाती है। शासन स्तर से ही धनराशि छात्रों के बैंक खातों में भेजी गई है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने यूपी में अखिलेश सरकार के कार्यकाल में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति में बांटी गई 12 हजार करोड़ रुपये धनराशि की जांच की। इसमें कैग को करोड़ों रुपये का घपला मिला है। अभी कैग ने ब्योरा नहीं दिया है। वर्ष 2012-13 से 2016-17 तक अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को दी गई छात्रवृत्ति के जांच के आदेश केंद्र सरकार ने दिए थे। कैग टीम ने प्रदेश के 10 जिलों लखनऊ, रायबरेली, मेरठ, आगरा, सहारनपुर, अलीगढ़, वाराणसी, बिजनौर, इलाहाबाद, मथुरा में गहन जांच की। सूत्रों के अनुसार शिक्षण संस्थाओं ने फर्जी छात्र दिखाकर उनके खातों में रकम ट्रांसफर करवाई। कई छात्रों के नाम एक से अधिक शिक्षण संस्थाओं में मिले। कुछ शिक्षण संस्थाओं ने रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं कराए।
विज्ञापन
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने यूपी में अखिलेश सरकार के कार्यकाल में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति में बांटी गई 12 हजार करोड़ रुपये धनराशि की जांच की। इसमें कैग को करोड़ों रुपये का घपला मिला है। अभी कैग ने ब्योरा नहीं दिया है। वर्ष 2012-13 से 2016-17 तक अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को दी गई छात्रवृत्ति के जांच के आदेश केंद्र सरकार ने दिए थे। कैग टीम ने प्रदेश के 10 जिलों लखनऊ, रायबरेली, मेरठ, आगरा, सहारनपुर, अलीगढ़, वाराणसी, बिजनौर, इलाहाबाद, मथुरा में गहन जांच की। सूत्रों के अनुसार शिक्षण संस्थाओं ने फर्जी छात्र दिखाकर उनके खातों में रकम ट्रांसफर करवाई। कई छात्रों के नाम एक से अधिक शिक्षण संस्थाओं में मिले। कुछ शिक्षण संस्थाओं ने रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं कराए।
विज्ञापन