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कोनिया इलाके में गंगा से कटान शुरू, किसान चिंतित
Updated Fri, 03 Aug 2018 12:52 AM IST
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सीतामढ़ी। गंगा के बढ़ते जल स्तर ने कोनिया के किसानों की बर्बादी शुरू कर दी है। तीन ओर गंगा से घिरे कोनिया क्षेत्र के छेछुआ और भुर्रा गांवों में गंगा की तेज धाराओं से किसानों की कृषि योग्य उपजाऊ जमीन कटान की भेंट चढ़नी शुरू हो गई है। दो दिनों में करीब आधा बिस्वा जमीन गंगा की धाराओं में बह गई। बृहस्पतिवार को नाराज किसानों ने गंगा कटान से निपटने के लिए प्रशासनिक इंतजाम के लिए प्रदर्शन किया।
पिछले 11 दिनों से हो रही बारिश और हरियाणा से छोड़े गए पानी के चलते गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार शाम से जलस्तर करीब 73 मीटर पर स्थिर है, लेकिन गंगा की कुपित धाराओं ने उपजाऊ जमीन को रेतना शुरू कर दिया है। कोनिया में गत पांच दशक से शुरू हुई गंगा कटान वर्तमान में एक विभीषिका का रूप ले चुकी है। बारिश में गंगा में उफान आते ही छेछुआ और भुर्रा गांवों में किसानों की उपजाऊ जमीन गंगा में समाने लगती है। जिस भूमि पर कभी फसलें और पेड़ पौधे लहराते थे, अब वहां गंगा का जलप्रवाह हो रहा है। छेछुआ के किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से दोनों गांवों के किसानों की सैकड़ों बीघे उपजाऊ भूमि गंगा की धाराओं में विलीन हो चुकी है। दोनों गांवों के किसान बर्बाद होते जा रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से किसानों की बर्बादी रोकने के लिए आज तक कोई कारगल पहल तक नहीं की गई। किसान दशरथ सिंह, जगदीश सिंह, विष्णु कुमार, भूपेंद्र सिंह, बलराम सिंह, राहुल सिंह, रतन सिंह, नवनीत सिंह, कृष्ण कुमार, सचिन सिंह, संदीप यादव, बुद्धू विश्वकर्मा आदि किसानो ने प्रदर्शन करते हुए शासन प्रशासन से कटान रोकने की मांग की।
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पिछले 11 दिनों से हो रही बारिश और हरियाणा से छोड़े गए पानी के चलते गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार शाम से जलस्तर करीब 73 मीटर पर स्थिर है, लेकिन गंगा की कुपित धाराओं ने उपजाऊ जमीन को रेतना शुरू कर दिया है। कोनिया में गत पांच दशक से शुरू हुई गंगा कटान वर्तमान में एक विभीषिका का रूप ले चुकी है। बारिश में गंगा में उफान आते ही छेछुआ और भुर्रा गांवों में किसानों की उपजाऊ जमीन गंगा में समाने लगती है। जिस भूमि पर कभी फसलें और पेड़ पौधे लहराते थे, अब वहां गंगा का जलप्रवाह हो रहा है। छेछुआ के किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से दोनों गांवों के किसानों की सैकड़ों बीघे उपजाऊ भूमि गंगा की धाराओं में विलीन हो चुकी है। दोनों गांवों के किसान बर्बाद होते जा रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से किसानों की बर्बादी रोकने के लिए आज तक कोई कारगल पहल तक नहीं की गई। किसान दशरथ सिंह, जगदीश सिंह, विष्णु कुमार, भूपेंद्र सिंह, बलराम सिंह, राहुल सिंह, रतन सिंह, नवनीत सिंह, कृष्ण कुमार, सचिन सिंह, संदीप यादव, बुद्धू विश्वकर्मा आदि किसानो ने प्रदर्शन करते हुए शासन प्रशासन से कटान रोकने की मांग की।
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