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यज्ञ विध्वंस करने वाली ताड़का राक्षसी का वध

Fri, 08 Sep 2017 02:04 AM IST
Updated Fri, 08 Sep 2017 02:04 AM IST
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यज्ञ विध्वंस करने वाली ताड़का राक्षसी का वध
रामनगर । ताड़का वध की लीला गुरुवार को तहजीब की मिसाल बनी।सीवान के पास मैदान में ताड़का वध की लीला देखने के लिए बड़ी तादाद में मुसलिम परिवारों की बुर्कानशीन महिलाओं के अलावा बच्चे पहुंचे। साधनारत साधु-संतों के यज्ञ की रक्षा के लिए महर्षि विश्वामित्र के साथ वन गए राम-लक्ष्मण ने राक्षसी ताड़का का वध कर दिया। भगवान श्रीराम के एक ही बाण से वह परलोक सिधार गई। राक्षसों के आतंक से मुक्ति मिलने के बाद खोह-कंदराओं में यज्ञ -हवन कर रहे ऋषि-मुनियों में हर्षध्वनि गूंजने लगी । भगवान राम के जयकारों से लीलास्थल गुंजायमान हो गया।
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महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या पहुंचने के साथ लीला शुरूआत हुई। विश्वामित्र ने यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को अपने साथ वन ले जाने का आग्रह राजा दशरथ से किया। महाराज दशरथ चौथे पन में मिले पुत्रों को महर्षि के साथ जाने देने के लिए तैयार नहीं थे। काफी मान- मनौव्वल के बाद पुत्रों को आशीर्वाद दे कर उन्होंने विदा किया। महर्षि के साथ जब दोनों भाई जंगल में जा रहे थे ,तभी ताड़का राक्षसी यज्ञ विध्वंस करती नजर आई। महर्षि ने उसके बारे में भगवान को बताया। सुकुमार बालकों को देख क्रोधित ताड़का उन पर झपट पड़ी । भगवान श्रीराम ने एक बाण से ही उसका वध कर दिया । शास्त्री चिकित्सालय के पीछे वाजिदपुर में यह लीला देखने के लिए बड़ी तादाद में लोग पहुंचे थे। हाथी पर सवार होकर काशिराज डॉ. अनंतनारायण ने लीला देखी। संध्या के बाद लीला पीएसी कालोनी के पीछे लीला शुरू हुई। मंचन के दृश्य में किसी के आने की खबर सुन कर मारीच अपनी सेना लेकर दौड़ता है। भगवान राम बिना फल के बाण से उसे समुद्र पार फेंक देते हैं। फिर उन्होंने सुबाहु का वध किया। उधर, सीता स्वयंवर का समाचार पा कर महर्षि विश्वामित्र श्रीराम से कहते हैं कि महाराज विदेह ने धनुषयज्ञ का आयोजन किया है ।धनुषयज्ञ की बात सुनकर श्रीराम प्रसन्न होते हैं।आगे चलने पर एक आश्रम दिखाई पड़ता है । राम पूछते हैं यह आश्रम किसका है, और यह शिला राह में कैसे पड़ी है। तब महर्षि ने बताया कि गौतम मुनि ने कभी अपनी पत्नी अहिल्या को श्राप दिया था और वह पत्थर बन गई थी। भगवान राम के चरण स्पर्श से ही पत्थर से नारी बन गई।
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