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असि-वरुणा से हटेगा अतिक्रमण, जुर्माना भी लगेगा
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वाराणसी। असि और वरुणा नदी से अतिक्रमण हटाने के आदेश कई बार दिए जा चुके हैं, लेकिन अनुपालन नहीं हो पा रहा है। रविवार को यहां हालात जानने पहुंचे एनजीटी पूर्वी यूपी के चेयरमैन जस्टिस डीपी सिंह ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। नगर निगम, सिंचाई विभाग, जल निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ पहुंचे जस्टिस सिंह ने अतिक्रमण तत्काल हटवाने के निर्देश दिए। चेतावनी दी कि ऐसा न करने वालों से जुर्माना वसूला जाएगा।
इसके बाद सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि पिछले दिनों भी असि, वरुणा पर हुए अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन स्थिति सुधरी नहीं है। इसीलिए रविवार को कंदवा स्थित असि नदी के उद्गम स्थल और चितईपुर में हुए अतिक्रमण को देखने पहुंचे। उन्होंने बताया कि असि नदी जहां से शुरू होती है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि पहले यहां बहुत बड़ी झील रही होगी। यहां लोग अतिक्रमण करते गए और अब चारों तरफ मकान बन गए हैं। जगह-जगह कूड़ा गिराया गया है। यहां सीवर लाइन का काम तो ठीक चल रहा है, लेकिन अतिक्रमण हटाया जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि वन विभाग से इसके चाराें तरफ पौधरोपण भी कराया जाएगा। अधिकारियों ने चुनाव तक का समय मांगा है, संभावना है कि जुलाई-अगस्त तक काम पूरा हो जाएगा।
चार सदस्यीय कमेटी देगी प्रोजेक्ट रिपोर्ट
जस्टिस डीपी सिंह ने बताया कि वरुणा और असि नदी पर अतिक्रमण के मामले में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इसमें सिंचाई विभाग, जल निगम, राजस्व विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शामिल हैं। कमेटी को कंदवा से असि तक सर्वे कर प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर देने को कहा गया है। रिपोर्ट को सरकार के माध्यम से एनजीटी को भेजा जाएगा। असि को मूल स्वरूप में लाना है और इस दिशा में काम शुरू हो गया है।
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पुराना पुल के पास भी नहीं हटा मलबा
जस्टिस डीपी सिंह ने कहा कि पुराना पुल के पास काफी समय से पड़ा मलबा हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन उसे अब तक नहीं हटाया गया है। यहां गंदगी का अंबार है। बरसात से पहले हर हाल में इसे हटाए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। चेतावनी दी कि यदि यहां पड़ा मलबा नहीं हटा तो जुर्माना लगाया जाएगा।
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इसके बाद सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि पिछले दिनों भी असि, वरुणा पर हुए अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन स्थिति सुधरी नहीं है। इसीलिए रविवार को कंदवा स्थित असि नदी के उद्गम स्थल और चितईपुर में हुए अतिक्रमण को देखने पहुंचे। उन्होंने बताया कि असि नदी जहां से शुरू होती है, उसे देखकर ऐसा लगता है कि पहले यहां बहुत बड़ी झील रही होगी। यहां लोग अतिक्रमण करते गए और अब चारों तरफ मकान बन गए हैं। जगह-जगह कूड़ा गिराया गया है। यहां सीवर लाइन का काम तो ठीक चल रहा है, लेकिन अतिक्रमण हटाया जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि वन विभाग से इसके चाराें तरफ पौधरोपण भी कराया जाएगा। अधिकारियों ने चुनाव तक का समय मांगा है, संभावना है कि जुलाई-अगस्त तक काम पूरा हो जाएगा।
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चार सदस्यीय कमेटी देगी प्रोजेक्ट रिपोर्ट
जस्टिस डीपी सिंह ने बताया कि वरुणा और असि नदी पर अतिक्रमण के मामले में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इसमें सिंचाई विभाग, जल निगम, राजस्व विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शामिल हैं। कमेटी को कंदवा से असि तक सर्वे कर प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर देने को कहा गया है। रिपोर्ट को सरकार के माध्यम से एनजीटी को भेजा जाएगा। असि को मूल स्वरूप में लाना है और इस दिशा में काम शुरू हो गया है।
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पुराना पुल के पास भी नहीं हटा मलबा
जस्टिस डीपी सिंह ने कहा कि पुराना पुल के पास काफी समय से पड़ा मलबा हटाने के लिए कहा गया था, लेकिन उसे अब तक नहीं हटाया गया है। यहां गंदगी का अंबार है। बरसात से पहले हर हाल में इसे हटाए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। चेतावनी दी कि यदि यहां पड़ा मलबा नहीं हटा तो जुर्माना लगाया जाएगा।