फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   कचहरी स्थानांतरण का विरोध, अधिवक्ता लामबंद

कचहरी स्थानांतरण का विरोध, अधिवक्ता लामबंद

Thu, 21 Sep 2017 02:07 AM IST
Updated Thu, 21 Sep 2017 02:07 AM IST
विज्ञापन
कचहरी स्थानांतरण का विरोध, अधिवक्ता लामबंद
वाराणसी। जनपद न्यायालय का नया कोर्ट परिसर पिंडरा के बरजी गांव में स्थानांतरित करने की कवायद के विरोध में अधिवक्ता लामबंद हो गए हैं। अधिवक्ताओं ने इस कवायद पर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को अधिवक्ता इसी मुद्दे पर न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर डीएम पोर्टिको में प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन के बाद बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। बैठक में राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी और विधायक रवींद्र जायसवाल को अधिवक्ता होने के नाते बुलाया गया है।
विज्ञापन

बुधवार को सेंट्रल बार सभागार में रंजन मिश्र, मंगलेश दुबे समेत अन्य अधिवक्ताओं के प्रस्ताव पर हुई बैठक में बार कौंसिल और सेंट्रल व बनारस बार को दरकिनार कर जनपद अदालत मुख्यालय से दूर ले जाने के निर्णय की सर्वसम्मति से निंदा की गई। अध्यक्षता कर रहे सेंट्रल बार अध्यक्ष अशोक सिंह प्रिंस ने कहा कि यह बनारस के 250 वर्ष के इतिहास को समाप्त करने का काम किया जा रहा है।
विज्ञापन

बैठक में पारित प्रस्ताव को स्थानीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ को भेजकर आग्रह किया जाएगा कि किसी भी हालत में अदालत परिसर को पिंडरा में न स्थानांतरित किया जाए। यदि ऐसा हुआ तो अधिवक्ता बेमियादी आंदोलन करने को बाध्य होंगे। अधिवक्ताओं का कहना था कि अदालत परिसर को स्थानांतरित करने का निर्णय गुपचुप तरीके से क्यों लिया गया। इस बारे में सेंट्रल और बनारस बार एसोसिएशन से विचार कर ही निर्णय लिया जाना चाहिए था।
विज्ञापन
विज्ञापन

बैठक में बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुमार पांडेय, महामंत्री आनंद मिश्र, एहतेशाम आब्दी, अशोक राय, बटुकनाथ मौर्य, अमरनाथ शर्मा, घनश्याम मिश्र, मुरलीधर सिंह, दुर्गा प्रसाद, धीरेंद्र नाथ शर्मा, ऋतु श्रीवास्तव, घनश्याम सिंह, श्रीनिवास मिश्र, सत्य नरायन द्विवेदी, अशोक उपाध्याय, अरुण दुबे, राजेश गुप्त, रामकृष्ण पांडेय, बृजेश मिश्र समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।

-----
विस्तार के कई विकल्प बताए, कहा-विचार तो किया जाए
वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद राय, अखिलेश सुशांत मिश्रा, संतोष उपाध्याय, पंकज सिंह, संदीप मिश्रा सहित अन्य अधिवक्ताओं का कहना था कि कचहरी परिसर से सटी हुई सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बनारस क्लब काबिज है। आखिरकार प्रदेश सरकार को इस सरकारी जमीन पर कचहरी परिसर के विस्तार में क्या दिक्कत आ रही है। किसी को मुआवजा भी नहीं देना होगा और सरकार की जमीन सरकारी काम के उपयोग में आएगी। यह भी बताया कि अगर जगह की इतनी समस्या है तो बनारस क्लब की जमीन, डीएम और कमिश्नर आवास, वन विभाग की जमीन सरकार अधिग्रहीत कर कोर्ट परिसर का विस्तार कर सकती है। अधिवक्ताओं ने कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से क्लब स्थापित कर शहर के चंद रसूखदार मौज-मस्ती करते हैं, यह तो सरकार को सही प्रतीत होता है। दूसरी ओर कचहरी के लिए जिला मुख्यालय से कई किलोमीटर दूर जमीन जानबूझकर खोजी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed