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नटवर नागर नंदा जनम लियो गोविंदा
Updated Tue, 15 Aug 2017 02:23 AM IST
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वाराणसी। विश्वनाथ मंदिर परिसर स्थित सत्य नारायण मंदिर में भादों कृष्ण पक्ष की अंधियारी रात में खीरे में कृष्णावतार हुआ तो बधाई गूंज उठी। कृष्ण जन्मोत्सव की रंग-बिरंगे सुगंधित फूलों, अशोक, कामिनी की पत्तियों से मनोरम झांकी सजाई गई। अर्चक रामरुचि तिवारी ने रात 12 बजे महाआरती के सात भगवान का अवतार कराया।
जन्म के बाद भगवान को स्नान कराकर नूतन वस्त्र धारण कराए गए। भक्तों को प्रसाद में फल, भोग में अर्पित मिठाई, हलुआ वितरित किया गया। जन्मोत्सव के बाद बाबा का पट बंद हुआ। अन्नपूर्णा मंदिर परिसर को फूल मालाओं,अशोक की पत्तियों से सजाया गया था। खास तौर पर कृष्ण भगवान को सुगंधित फूलों और पत्तियों से चुन-चुन कर बनाए गए झूले पर झुलाया गया। रात 12 बजे भगवान के जन्म तक पूरे परिसर में कान्हा के भजन गूंजते रहे । नटवर नागर का पंचामृत स्नान कराकर शृंगार किया गया। जन्म के बाद महंत रामेश्वर पुरी ने पूजन किया। महंत ने कहा कि जिस तरह से कंस समेत अन्य राक्षसों के अत्याचार से मुक्ति दिलाकर भगवान श्रीकृष्ण ने जगत को खुशी प्रदान की थी उसी प्रकार इस दौर में सत्कर्मों से समाज में शांति और उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया जाना चाहिए। प्रसाद रूप में उप महंत शंकर पुरी ने बच्चों को खिलौना वितरित किया। जीव नंदन झा, विकास, बाबा जी समेत तमाम लोग उपस्थित थे। अक्षयवट हनुमान मंदिर परिसर में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की झांकी सजाई गई। मंदिर को रंग-बिरंगे गुब्बारों और अशोक, कामिनी की पत्तियों से भव्य सजाया गया था। तिरंगे के रंग के गुब्बारे आकर्षण का केंद्र बने थे। महंत नील कुमार मिश्रा ने महाआरती की। जन्मोत्सव के समय भए प्रकट कृपाला दीनदयाला... के स्वर गूंजते रहे। गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो... हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की ... के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा।
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जन्म के बाद भगवान को स्नान कराकर नूतन वस्त्र धारण कराए गए। भक्तों को प्रसाद में फल, भोग में अर्पित मिठाई, हलुआ वितरित किया गया। जन्मोत्सव के बाद बाबा का पट बंद हुआ। अन्नपूर्णा मंदिर परिसर को फूल मालाओं,अशोक की पत्तियों से सजाया गया था। खास तौर पर कृष्ण भगवान को सुगंधित फूलों और पत्तियों से चुन-चुन कर बनाए गए झूले पर झुलाया गया। रात 12 बजे भगवान के जन्म तक पूरे परिसर में कान्हा के भजन गूंजते रहे । नटवर नागर का पंचामृत स्नान कराकर शृंगार किया गया। जन्म के बाद महंत रामेश्वर पुरी ने पूजन किया। महंत ने कहा कि जिस तरह से कंस समेत अन्य राक्षसों के अत्याचार से मुक्ति दिलाकर भगवान श्रीकृष्ण ने जगत को खुशी प्रदान की थी उसी प्रकार इस दौर में सत्कर्मों से समाज में शांति और उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया जाना चाहिए। प्रसाद रूप में उप महंत शंकर पुरी ने बच्चों को खिलौना वितरित किया। जीव नंदन झा, विकास, बाबा जी समेत तमाम लोग उपस्थित थे। अक्षयवट हनुमान मंदिर परिसर में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की झांकी सजाई गई। मंदिर को रंग-बिरंगे गुब्बारों और अशोक, कामिनी की पत्तियों से भव्य सजाया गया था। तिरंगे के रंग के गुब्बारे आकर्षण का केंद्र बने थे। महंत नील कुमार मिश्रा ने महाआरती की। जन्मोत्सव के समय भए प्रकट कृपाला दीनदयाला... के स्वर गूंजते रहे। गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो... हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की ... के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा।
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