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बास्केटबाल ने बरखा को काशी से पहुंचाया अमेरिका
Updated Tue, 20 Mar 2018 02:28 AM IST
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वाराणसी। काशी से अमेरिका की बास्केटबाल यात्रा बरखा के लिए बेहद यादगार रही है। आठ सालों का खेल का सफल चुनौतियों से भरा रहा। बरखा आज बास्केटबाल का प्रशिक्षण और अपनी पढ़ाई अमेरिका में कर रही है। बेहद मध्यम परिवार से संबंध रखने वाली बरखा ने बास्केटबाल में मेहनत के दम पर यह मुकाम पाया है।
शिवपुर के सरसौली गांव के सोनकर परिवार में जन्मी बरखा को बचपन से ही खेल का ऐसा जुनून सवार हुआ कि आठ साल की उम्र में ही उसने बास्केटबाल की दुनिया में कदम रख दिया। लड़कों जैसी कदकाठी वाली बरखा का आज अमेरिका भी मुरीद है। बरखा की प्रतिभा को देखते हुए अमेरिका ने उसे गोद ले लिया है। बरखा के पिता भोलानाथ सोनकर अपने घर में ही स्कूटर मिस्त्री का काम कर परिवार चलाते हैं।
बरखा ने पहला मैच सुधाकर बालिका इंटर कालेज में खेला और जीत हासिल की। बरखा के कौशल को देखते हुए राजेश सिंह दोहरी ने उसकी मुलाकात बास्केटबाल के कोच हरजिंदर सिंह से कराई। उनकी देखरेख में बरखा ने पहला पुरस्कार सहारनपुर में जीता। इसके बाद इस खिलाड़ी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। भोपाल, दिल्ली, लुधियाना एवं जयपुर में आयोजित प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्ष 2010 में दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबाल खिलाडि़यों के लिए चयन शिविर का आयोजन हुआ। इसमें यूपी से बरखा का चयन हुआ। उसका उम्दा प्रदर्शन देख यूएसए के खेल प्रशिक्षकों की पहल पर अमेरिका ने उसे गोद ले लिया। अंडर-18 में जूनियर इंडियन टीम का प्रतिनिधित्व भी किया। बरखा ने बताया कि वह सिंह सिस्टर्स की दिव्या सिंह को अपना रोल मॉडल मानती है। जो भी हूं उसमें मां-पिता का योगदान बताती है। बरखा मौजूदा समय अमेरिका में आईएमजी एकेडमी में स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं।
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शिवपुर के सरसौली गांव के सोनकर परिवार में जन्मी बरखा को बचपन से ही खेल का ऐसा जुनून सवार हुआ कि आठ साल की उम्र में ही उसने बास्केटबाल की दुनिया में कदम रख दिया। लड़कों जैसी कदकाठी वाली बरखा का आज अमेरिका भी मुरीद है। बरखा की प्रतिभा को देखते हुए अमेरिका ने उसे गोद ले लिया है। बरखा के पिता भोलानाथ सोनकर अपने घर में ही स्कूटर मिस्त्री का काम कर परिवार चलाते हैं।
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बरखा ने पहला मैच सुधाकर बालिका इंटर कालेज में खेला और जीत हासिल की। बरखा के कौशल को देखते हुए राजेश सिंह दोहरी ने उसकी मुलाकात बास्केटबाल के कोच हरजिंदर सिंह से कराई। उनकी देखरेख में बरखा ने पहला पुरस्कार सहारनपुर में जीता। इसके बाद इस खिलाड़ी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। भोपाल, दिल्ली, लुधियाना एवं जयपुर में आयोजित प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्ष 2010 में दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबाल खिलाडि़यों के लिए चयन शिविर का आयोजन हुआ। इसमें यूपी से बरखा का चयन हुआ। उसका उम्दा प्रदर्शन देख यूएसए के खेल प्रशिक्षकों की पहल पर अमेरिका ने उसे गोद ले लिया। अंडर-18 में जूनियर इंडियन टीम का प्रतिनिधित्व भी किया। बरखा ने बताया कि वह सिंह सिस्टर्स की दिव्या सिंह को अपना रोल मॉडल मानती है। जो भी हूं उसमें मां-पिता का योगदान बताती है। बरखा मौजूदा समय अमेरिका में आईएमजी एकेडमी में स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं।
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