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पुरातत्वविद-इतिहासकार परखेंगे मंदिरों की प्राचीनता
Updated Fri, 30 Nov 2018 02:19 AM IST
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वाराणसी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में मिल रहे मंदिरों की प्राचीनता की जांच कराई जाएगी। मंदिर प्रशासन ने इसके लिए पुरातत्व विभाग को पत्र लिखकर यह कार्य करने के लिए कहा है। पुरातत्व विभाग ध्वस्तीकरण कार्य के बाद मंदिरों का अध्ययन करेगा।
विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर में खरीदे जा रहे भवनों के बीच अति प्राचीन मंदिर मिल रहे हैं। इस 25 हजार वर्ग मीटर में चिह्नित 43 मंदिरों के बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि ये मंदिर 16वीं से 18वीं सदी के हो सकते हैं। इन मंदिरों की नक्काशी और वास्तुकला विश्वनाथ मंदिर जैसी ही है। मंदिरों में नीचे की ओर जहां रथ बने हुए हैं वहीं सभी खंभों के ऊपर कीचक बने हैं। इन्हें परमार कालीन मंदिर भी कहा जा सकता है। मंदिरों की प्राचीनता का पता लगने के बाद कॉरिडोर निर्माण के समय इनका जीर्णोद्धार कराकर मंदिरों के बाहर शिलापट्ट पर इतिहास लिखा जाएगा।
केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधिकारी नीरज सिन्हा ने बताया कि इसके लिए तीन सदस्यीय टीम काम कर रही है लेकिन ध्वस्तीकरण के दौरान जांच-परख करने में परेशानी आ रही है। वही मंदिर प्रशासन के एसडीएम विनोद सिंह ने बताया कि कॉरिडोर में मंदिरों के अलावा कई सारे प्राचीन धरोहरें मिल रही हैं। इन्हें इन्हीं धरोहरों को खासतौर पर बनाए जाने वाले संग्रहालय में रखा जाएगा।
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विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर में खरीदे जा रहे भवनों के बीच अति प्राचीन मंदिर मिल रहे हैं। इस 25 हजार वर्ग मीटर में चिह्नित 43 मंदिरों के बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि ये मंदिर 16वीं से 18वीं सदी के हो सकते हैं। इन मंदिरों की नक्काशी और वास्तुकला विश्वनाथ मंदिर जैसी ही है। मंदिरों में नीचे की ओर जहां रथ बने हुए हैं वहीं सभी खंभों के ऊपर कीचक बने हैं। इन्हें परमार कालीन मंदिर भी कहा जा सकता है। मंदिरों की प्राचीनता का पता लगने के बाद कॉरिडोर निर्माण के समय इनका जीर्णोद्धार कराकर मंदिरों के बाहर शिलापट्ट पर इतिहास लिखा जाएगा।
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केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधिकारी नीरज सिन्हा ने बताया कि इसके लिए तीन सदस्यीय टीम काम कर रही है लेकिन ध्वस्तीकरण के दौरान जांच-परख करने में परेशानी आ रही है। वही मंदिर प्रशासन के एसडीएम विनोद सिंह ने बताया कि कॉरिडोर में मंदिरों के अलावा कई सारे प्राचीन धरोहरें मिल रही हैं। इन्हें इन्हीं धरोहरों को खासतौर पर बनाए जाने वाले संग्रहालय में रखा जाएगा।
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