{"_id":"5af8a7d54f1c1bd8408b52c4","slug":"171526245333-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतिबंधित क्षेत्रों में धड़ल्ले से अवैध निर्माण 0","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रतिबंधित क्षेत्रों में धड़ल्ले से अवैध निर्माण 0
Updated Mon, 14 May 2018 02:32 AM IST
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वाराणसी। जिम्मेदारों की आंखों के सामने शहर में अवैध निर्माणों का जाल बिछने और बुनियादी सुविधाओं के साथ पर्यावरण ध्वस्त होने के बाद अब सारनाथ भी इसी राह पर है। अपनी ऐतिहासिकता और प्राचीनता के लिए पूरी दुनिया में ख्यात तथागत की यह उपदेश स्थली अवैध निर्माणों से घिरती जा रही है। पुरातात्विक स्थलों के आसपास के प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी धड़ल्ले से अवैध निर्माण कराए जा रहे हैं और उच्चाधिकारी बेखबर बने बैठे हैं। सब कुछ आंखों के सामने होने के बावजूद उन्हें हालात पता ही नहीं। जबकि, वीडीए, एएसआई और नगर निगम के मुलाजिमों की मिलीभगत से ही यह सारा खेल चल रहा है। नियम-प्रावधानों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इससे न सिर्फ पुरातात्विक स्थलों का वजूद खतरे में है बल्कि यहां की हरियाली पर भी ग्रहण लग रहा है।
धार्मिक-आध्यात्मिक स्थल होने के साथ ही पर्यटन के लिए दुनिया भर में ख्यात सारनाथ में रोजाना बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैलानी और बौद्ध अनुयायी पहुंचते हैं। नगर निगम सीमा का यह इकलौता क्षेत्र है, जहां पर्यावरण और हरियाली अब भी बेहतर है। लेकिन, अवैध निर्माणकर्ताओं और सरकारी अफसरों-मुलाजिमों के गठजोड़ की नजर यहां भी गड़ गई है। पुरातात्विक स्थलों के समीप के सौ मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में भी धड़ल्ले से अवैध निर्माण कराए जा रहे हैं। पिछले छह महीनों के अंदर 20 से अधिक छोटे-बड़े निर्माण प्रतिबंधित क्षेत्र में हुए हैं और इनमें कुछ नए वाणिज्यिक भवन भी शामिल हैं। मौजूदा समय भी कई अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है लेकिन आपत्ति जताने या रोकने वाला कोई नहीं। अवैध निर्माणों को जल्द हटाया नहीं गया तो सारनाथ के वजूद को संरक्षित रख पाना मुश्किल हो जाएगा।
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धार्मिक-आध्यात्मिक स्थल होने के साथ ही पर्यटन के लिए दुनिया भर में ख्यात सारनाथ में रोजाना बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैलानी और बौद्ध अनुयायी पहुंचते हैं। नगर निगम सीमा का यह इकलौता क्षेत्र है, जहां पर्यावरण और हरियाली अब भी बेहतर है। लेकिन, अवैध निर्माणकर्ताओं और सरकारी अफसरों-मुलाजिमों के गठजोड़ की नजर यहां भी गड़ गई है। पुरातात्विक स्थलों के समीप के सौ मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में भी धड़ल्ले से अवैध निर्माण कराए जा रहे हैं। पिछले छह महीनों के अंदर 20 से अधिक छोटे-बड़े निर्माण प्रतिबंधित क्षेत्र में हुए हैं और इनमें कुछ नए वाणिज्यिक भवन भी शामिल हैं। मौजूदा समय भी कई अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है लेकिन आपत्ति जताने या रोकने वाला कोई नहीं। अवैध निर्माणों को जल्द हटाया नहीं गया तो सारनाथ के वजूद को संरक्षित रख पाना मुश्किल हो जाएगा।
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