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काहे रोकत डगरिया सांवरिया रे...
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वाराणसी। नटराज संगीत एकेडमी की ओर से सनबीम स्कूल लहरतारा में आयोजित तीन दिवसीय कथक कार्यशाला का समापन रविवार को मोहक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। स्वर, लय और ताल के साथ कथक की खूबसूरत प्रस्तुतियों ने हर किसी को मुग्ध कर दिया। कथक महोत्सव की ये शाम शिष्यों के लिए और भी खास हो गई, क्योंकि उन्हें अपने गुरु जी का जन्मदिन मनाने का मौका भी मिला। अपनी प्रस्तुतियों के जरिये उन्होंने महाराज पंडित बिरजू महाराज को भावांजलि अर्पित की।
महोत्सव की शुरुआत कला साधकों ने शिव स्तुति से की। इसके बाद उर्वशी श्रीवास्तव ने पारंपरिक कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। बोल थे- काहे रोकत डगरिया सांवरिया रे, लुक छिप देखत बृज के लोकवा, लाज लगत मोहे का करूं दइया...। एकेडमी की ही नृत्यांगनाओं ने अपने गुरु जी की सरगम पर पिरोया नृत्य प्रस्तुत किया। बोल थे- रूबई है तेरी महफिल में...। इसी क्रम में गांधर्व महाविद्यालय की छात्राएं व सुश्री लता बाकलकर की शिष्याएं अपर्णा माने और श्वेता पौडवाल ने शिव वंदना तीन ताल में प्रस्तुत की। फिर बाजी बाजी बाजी बनी श्याम की मुरलिया... ठुमरी पेश की। तोड़ी और तिहाई के साथ तत्कार से उन्होंने समापन किया। जर्मनी की दुर्गा आर्या ने अंतिम प्रस्तुति दी।
इससे पहले माल्यार्पण व पुष्पांजलि कर पंडित बिरजू महाराज जी का जन्मदिन मनाया गया। इस अवसर वक्ताओं ने कहा कि नृत्य में आस्था व ध्यान छिपा है। नि:स्वार्थ हाथ का उठना और शून्य को सजाना नृत्य है। नर्तक पेंटिंग बनाते हैं, कैनवास पर नहीं शून्य में। इस अवसर उनकी शिष्या विदुषी शाश्वती सेन भी मौजूद रहीं। स्वागत एकेडमी की निर्देशक संगीता सिन्हा ने किया। सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष दीपक मधोक, निदेशक भारती मधोक और मानद निदेशक हर्ष मधोक भी मौजूद रहे। संचालन प्रतिमा सिन्हा व धन्यवाद ज्ञापन उप निदेशक अमृता बर्मन ने किया।
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महोत्सव की शुरुआत कला साधकों ने शिव स्तुति से की। इसके बाद उर्वशी श्रीवास्तव ने पारंपरिक कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। बोल थे- काहे रोकत डगरिया सांवरिया रे, लुक छिप देखत बृज के लोकवा, लाज लगत मोहे का करूं दइया...। एकेडमी की ही नृत्यांगनाओं ने अपने गुरु जी की सरगम पर पिरोया नृत्य प्रस्तुत किया। बोल थे- रूबई है तेरी महफिल में...। इसी क्रम में गांधर्व महाविद्यालय की छात्राएं व सुश्री लता बाकलकर की शिष्याएं अपर्णा माने और श्वेता पौडवाल ने शिव वंदना तीन ताल में प्रस्तुत की। फिर बाजी बाजी बाजी बनी श्याम की मुरलिया... ठुमरी पेश की। तोड़ी और तिहाई के साथ तत्कार से उन्होंने समापन किया। जर्मनी की दुर्गा आर्या ने अंतिम प्रस्तुति दी।
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इससे पहले माल्यार्पण व पुष्पांजलि कर पंडित बिरजू महाराज जी का जन्मदिन मनाया गया। इस अवसर वक्ताओं ने कहा कि नृत्य में आस्था व ध्यान छिपा है। नि:स्वार्थ हाथ का उठना और शून्य को सजाना नृत्य है। नर्तक पेंटिंग बनाते हैं, कैनवास पर नहीं शून्य में। इस अवसर उनकी शिष्या विदुषी शाश्वती सेन भी मौजूद रहीं। स्वागत एकेडमी की निर्देशक संगीता सिन्हा ने किया। सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष दीपक मधोक, निदेशक भारती मधोक और मानद निदेशक हर्ष मधोक भी मौजूद रहे। संचालन प्रतिमा सिन्हा व धन्यवाद ज्ञापन उप निदेशक अमृता बर्मन ने किया।
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