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कॉरिडोर योजना में अधिकारी कर रहे हैं मनमानी0
Updated Sun, 20 May 2018 02:08 AM IST
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वाराणसी। काशी के संत समाज ने श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर योजना के तहत चल रहे विकास कार्यों में अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाए। संत समाज का कहना था कि विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के विस्तारीकरण के नाम पर न्यास परिषद के अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। आम जनता के साथ उनका रवैया ठीक नहीं है। मकानों की रजिस्ट्री के लिए मंदिर परिक्षेत्र में दलालों को भी लगा दिया गया है। वह मकानों की रजिस्ट्री कराने के लिए स्थानीय लोगों को धमकाने का भी प्रयास कर रहे हैं। संत समाज की बातों को सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जनता के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
शनिवार की शाम को सर्किट हाउस में संत समाज के साथ मुख्यमंत्री की लंबी बातचीत हुई। संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने सीएम के साथ हुई बातचीत के दौरान कहा कि काशी धार्मिक नगरी और इसका विकास पर्यटन नगरी के रूप में नहीं होना चाहिए। प्रो. मिश्र ने कहा कि काशी को तीर्थ के स्वरूप में ही रहने दिया जाए तो बेहतर होगा। यह गलियों का शहर है और यही इसकी विशेषता भी है। इसको ध्यान में रखते हुए विकास होगा तो किसी को भी आपत्ति नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि मंदिर और विग्रह किसी भी कीमत पर नहीं तोड़े जाएंगे और पुराने भवन, मंदिर और विग्रह मूल स्वरूप में रहेंगे। पातालपुरी मठ के महंत बालकदास ने कहा कि विकास के नाम पर मूर्तियों के साथ छेड़छाड़ हुई। मठ और मंदिर टूट रहे हैं जो संत समाज के लिए ठीक नहीं है। इस पर सीएम ने कहा कि मूर्तियों से छेड़छाड़ हुई है तो उन्हें शास्त्रोक्त विधि से पुन: स्थापित किया जाएगा और उसके लिए नियम बनाया जाएगा कि आगे इसकी पुनरावृत्ति ना हो। इस दौरान अगर किसी की दुकान या किसी का मकान टूटता है तो उसे दुकान व मकान भी दिए जाएंगे। वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा ने सीएम से काशी की धरोहरों को संरक्षित करने की बात कही। कहा कि प्राचीनता के हिसाब से संरक्षण होना चाहिए। इस दौरान काशी के संत समाज के विभिन्न मठ मंदिरों के संत-महंत लोग मौजूद रहे। गंगा महासभा के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने गंगा में गिरने वाले सीवेज को तत्काल रोकने की बात कही। इसके अलावा बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र को धर्म व शास्त्रोक्त विधि से विकसित करने की बात कही। सतुआ बाबा आश्रम के महामंडलेश्वर संतोष दास ने कहा कि मंदिरों के विकास के लिए मुख्यमंत्री पूरी तरह से प्रयास कर रहे हैं। उनकी मंशा पर किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
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शनिवार की शाम को सर्किट हाउस में संत समाज के साथ मुख्यमंत्री की लंबी बातचीत हुई। संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने सीएम के साथ हुई बातचीत के दौरान कहा कि काशी धार्मिक नगरी और इसका विकास पर्यटन नगरी के रूप में नहीं होना चाहिए। प्रो. मिश्र ने कहा कि काशी को तीर्थ के स्वरूप में ही रहने दिया जाए तो बेहतर होगा। यह गलियों का शहर है और यही इसकी विशेषता भी है। इसको ध्यान में रखते हुए विकास होगा तो किसी को भी आपत्ति नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि मंदिर और विग्रह किसी भी कीमत पर नहीं तोड़े जाएंगे और पुराने भवन, मंदिर और विग्रह मूल स्वरूप में रहेंगे। पातालपुरी मठ के महंत बालकदास ने कहा कि विकास के नाम पर मूर्तियों के साथ छेड़छाड़ हुई। मठ और मंदिर टूट रहे हैं जो संत समाज के लिए ठीक नहीं है। इस पर सीएम ने कहा कि मूर्तियों से छेड़छाड़ हुई है तो उन्हें शास्त्रोक्त विधि से पुन: स्थापित किया जाएगा और उसके लिए नियम बनाया जाएगा कि आगे इसकी पुनरावृत्ति ना हो। इस दौरान अगर किसी की दुकान या किसी का मकान टूटता है तो उसे दुकान व मकान भी दिए जाएंगे। वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा ने सीएम से काशी की धरोहरों को संरक्षित करने की बात कही। कहा कि प्राचीनता के हिसाब से संरक्षण होना चाहिए। इस दौरान काशी के संत समाज के विभिन्न मठ मंदिरों के संत-महंत लोग मौजूद रहे। गंगा महासभा के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने गंगा में गिरने वाले सीवेज को तत्काल रोकने की बात कही। इसके अलावा बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र को धर्म व शास्त्रोक्त विधि से विकसित करने की बात कही। सतुआ बाबा आश्रम के महामंडलेश्वर संतोष दास ने कहा कि मंदिरों के विकास के लिए मुख्यमंत्री पूरी तरह से प्रयास कर रहे हैं। उनकी मंशा पर किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
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