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रक्तस्राव रोकने की नई विधि पर मंत्रणा
Updated Mon, 18 Dec 2017 02:41 AM IST
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वाराणसी। प्रसव के बाद रक्तस्राव रोकने में बाकरी बलुन, एंटीशॉक गारमेंट उपयोगी साबित हो रहा है। इसके प्रयोग से न केवल रक्तस्राव रोकने में सुविधा होगी बल्कि मातृत्व मृत्यु दर कम करने में भी मदद मिलेगी। रविवार को आईएमए में आयोजित कार्यशाला में स्त्री रोग विशेषज्ञों ने रक्तस्राव रोकने की नई विधि पर मंत्रणा की। साथ ही, बेहतर इलाज के जरिए मातृत्व मृत्यु दर कम से कम करने का संकल्प लिया।
आईएमए बनारस शाखा और वाराणसी ओब्स एंड गायनोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में मुंबई से आई जीवदया फाउंडेशन की सलाहकार डॉ. समीता भारद्वाज ने रक्तस्राव की नई विधि की जानकारी दी। उन्होंने आडियो-वीडियो के माध्यम से चिकित्सकों को इसके बारे में बताया। बताया कि बाकरी बलून का प्रयोग तो केवल एक बार ही हो सकेगा जबकि एंटीशॉक गारमेंट का प्रयोग एक से अधिक महिलाओं के लिए भी किया जा सकेगा। आईएमए सचिव डॉ. मनीषा सिंह ने बताया कि विश्व में मातृ मृत्यु दर के मामले में भारत 53वें स्थान पर है, यहां हर एक लाख महिलाओं में 170 गर्भवती महिलाओं की मौत हो जाती है जबकि अमेरिका में 21, ब्रिटेन 12, न्यूजीलैंड 15, स्विटजरलैंड में यह आंकड़ा आठ का है। इसके अलावा भारत में हर घंटे पांच महिलाओं की मौत विभिन्न बीमारियों से होती है, जिसमें रक्तस्राव प्रमुख वजह है। महिला चिकित्सकों ने नई विधि के बारे में सवाल भी पूछे, जिसका जवाब डॉ. समीता ने दिया। कार्यशाला में प्रो. अनुराधा खन्ना, डा.लवीना चौबे, डॉ. अर्चना शाह, डॉ.कुसुम चंद्रा, डॉ. अंजनी रानी सहित अन्य चिकित्सक शामिल थीं।
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आईएमए बनारस शाखा और वाराणसी ओब्स एंड गायनोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में मुंबई से आई जीवदया फाउंडेशन की सलाहकार डॉ. समीता भारद्वाज ने रक्तस्राव की नई विधि की जानकारी दी। उन्होंने आडियो-वीडियो के माध्यम से चिकित्सकों को इसके बारे में बताया। बताया कि बाकरी बलून का प्रयोग तो केवल एक बार ही हो सकेगा जबकि एंटीशॉक गारमेंट का प्रयोग एक से अधिक महिलाओं के लिए भी किया जा सकेगा। आईएमए सचिव डॉ. मनीषा सिंह ने बताया कि विश्व में मातृ मृत्यु दर के मामले में भारत 53वें स्थान पर है, यहां हर एक लाख महिलाओं में 170 गर्भवती महिलाओं की मौत हो जाती है जबकि अमेरिका में 21, ब्रिटेन 12, न्यूजीलैंड 15, स्विटजरलैंड में यह आंकड़ा आठ का है। इसके अलावा भारत में हर घंटे पांच महिलाओं की मौत विभिन्न बीमारियों से होती है, जिसमें रक्तस्राव प्रमुख वजह है। महिला चिकित्सकों ने नई विधि के बारे में सवाल भी पूछे, जिसका जवाब डॉ. समीता ने दिया। कार्यशाला में प्रो. अनुराधा खन्ना, डा.लवीना चौबे, डॉ. अर्चना शाह, डॉ.कुसुम चंद्रा, डॉ. अंजनी रानी सहित अन्य चिकित्सक शामिल थीं।
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