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भारत समेत छह देश मिलकर करेंगे खेती
Updated Thu, 02 Nov 2017 01:58 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को समापन हुआ। इस दौरान भारत सहित अन्य देशों में चावल, सब्जी, फल सहित अन्य खाद्य पदार्थों के उत्पादन पर चर्चा की गई। समारोह में मौजूद दक्षिणी एशियाई देशों के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. यूएस सिंह ने बताया कि हाल ही में कंबोडिया में हुई बैठक में भारत समेत छह देशों के बीच खाद्य पदार्थों के उत्पादन सहित अन्य मामलों पर सहमति बनी है। इससे किसी भी देश में विकसित प्रजाति पर दूसरे देश में खेती की जा सकती है।
संस्थान के सभागार में आयोजित समापन समारोह में इसकी घोषणा की। डॉॅ. सिंह ने बताया कि बैठक में प्रमुख सचिव कृषि सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बताया कि इस सहमति के बाद खाद्य उत्पादन को नया आयाम मिलेगा। इसमें भारत के साथ ही श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल, कंबोडिया शामिल हैं। इन देशों में प्रजनक बीज का सुगमतापूर्वक उत्पादन किया जा सकता है, इसकी प्रमाणिकता की आवश्यकता नहीं होगी। इससे किसानों को लाभ होगा। राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक डॉ.एएन सिंह ने कहा कि बीज प्रतिस्थापन दर को 80 प्रतिशत तक पहुंचाने की जरूरत है। कृषि विज्ञान संस्थान निदेशक प्रो. ए वैशंपायन ने खेती के व्यवसायिकरण के लिए सरकारी योजनाओं की चर्चा की। चार दिन तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल कंबोडियन प्रशिक्षुओं ने भी अपने विचार रखा। प्रशिक्षण समन्वयक प्रो.पीके सिंह ने कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के टीसी ढौड़ियाल ने किया।
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संस्थान के सभागार में आयोजित समापन समारोह में इसकी घोषणा की। डॉॅ. सिंह ने बताया कि बैठक में प्रमुख सचिव कृषि सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बताया कि इस सहमति के बाद खाद्य उत्पादन को नया आयाम मिलेगा। इसमें भारत के साथ ही श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल, कंबोडिया शामिल हैं। इन देशों में प्रजनक बीज का सुगमतापूर्वक उत्पादन किया जा सकता है, इसकी प्रमाणिकता की आवश्यकता नहीं होगी। इससे किसानों को लाभ होगा। राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक डॉ.एएन सिंह ने कहा कि बीज प्रतिस्थापन दर को 80 प्रतिशत तक पहुंचाने की जरूरत है। कृषि विज्ञान संस्थान निदेशक प्रो. ए वैशंपायन ने खेती के व्यवसायिकरण के लिए सरकारी योजनाओं की चर्चा की। चार दिन तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल कंबोडियन प्रशिक्षुओं ने भी अपने विचार रखा। प्रशिक्षण समन्वयक प्रो.पीके सिंह ने कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के टीसी ढौड़ियाल ने किया।
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