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पंचवची में लक्ष्मण ने काटी सूर्पणखा की नाक
Updated Thu, 21 Sep 2017 02:07 AM IST
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रामनगर। विश्वविख्यात राम लीला में सूर्पणखा के नाक-कान कटने की लीला देखने के लिए बुधवार की रात भीड़ उमड़ पड़ी। पंचवटी में मेला लग गया। पंचवटी में सूर्पणखा के पहुंचने के साथ शुरू हुई लीला खर-दूषण की सेना से राम-लक्ष्मण के युद्ध तक लीला प्रेमियों के लिए रोमांचक बनी रही।
लीला मंचन के दृश्य में रावण की बहन सूर्पणखा पंचवटी पहुंचती है। राजकुमारों को देख कहती है कि- इस जग में तुम्हारे जैसा न कोई पुरूष है और न ही मेरे समान कोई नारी। योग्य पुरुष न मिलने से अब तक कुंववारी रह गई थी। तुमको देखा तो अब व्याह रचाने की इच्छा जग गई है। इतना कहते हुए वह लक्ष्मण के पास पहुंचती है। दुश्मन की बहन समझ वह श्रीराम की ओर देखते हैं। सूर्पणखा का रंग रूप देख सीता भी डर जाती हैं। श्रीराम लक्ष्मण को इशारा करते हैं और लक्ष्मण उसके नाक कान काट देते हैं। यह सब प्रसंग पंचवटी - लंका व आसपास के क्षेत्रों में मंचित किया गया। सूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध, श्री जानकी हरण, रावण- गिद्धराज युद्ध की लीला देखने के लिए भीड़ लग गई थी। काशिराज अनंत नारायण सिंह बग्घी से लीला स्थल पहुंचे। वहां हाथी पर सवार होकर उन्होंने लीला देखी। इस दौरान लीला स्थल लीला प्रेमियों से खचाखच भरा हुआ था ।
उधर नाक कटने के बाद सूर्पणखा अपने भाई खर-दूषण के पास पहुंचती है। रो -रो कर आपबीती सुनाती है। खर-दूषण आक्रोशित हो कर बदले की भावना से अस्त्र-शस्त्र से लैस होकर युद्ध के लिए चल देते हैं ।
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युद्ध में राम सेना समेत खर-दूषण का वध कर देते हैं। सूर्पणखा खरदूषण के मारे जाने के बाद लंका जा कर रावण को भड़काती है। रावण सूर्पणखा को समझाकर महल में चला जाता है। अपने मामा मारीच से कहता है कि छल कपट से मृग का रूप धारण कर सीता को चुरा लाओ। मारीच सोने के मृग का रूप धरकर पंचवटी पहुंचता है। सीता उसे देख मुग्ध हो जाती हैं। श्रीराम पीछा करते करते उसे वाण मारते हैं। मारीच हाय लक्ष्मण... हाय लक्ष्मण कहकर चिल्लाता है। प्राण छोड़ते समय मारीच श्रीराम का स्मरण करता है। उधर, पंचवटी में सूना पा कर साधु वेश में रावण सीता का हरण कर ले जाता है। रास्ते में गिद्धराज जटायु सीता की करुण पुकार सुनकर रावण से युद्ध करते हैं।
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लीला मंचन के दृश्य में रावण की बहन सूर्पणखा पंचवटी पहुंचती है। राजकुमारों को देख कहती है कि- इस जग में तुम्हारे जैसा न कोई पुरूष है और न ही मेरे समान कोई नारी। योग्य पुरुष न मिलने से अब तक कुंववारी रह गई थी। तुमको देखा तो अब व्याह रचाने की इच्छा जग गई है। इतना कहते हुए वह लक्ष्मण के पास पहुंचती है। दुश्मन की बहन समझ वह श्रीराम की ओर देखते हैं। सूर्पणखा का रंग रूप देख सीता भी डर जाती हैं। श्रीराम लक्ष्मण को इशारा करते हैं और लक्ष्मण उसके नाक कान काट देते हैं। यह सब प्रसंग पंचवटी - लंका व आसपास के क्षेत्रों में मंचित किया गया। सूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध, श्री जानकी हरण, रावण- गिद्धराज युद्ध की लीला देखने के लिए भीड़ लग गई थी। काशिराज अनंत नारायण सिंह बग्घी से लीला स्थल पहुंचे। वहां हाथी पर सवार होकर उन्होंने लीला देखी। इस दौरान लीला स्थल लीला प्रेमियों से खचाखच भरा हुआ था ।
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उधर नाक कटने के बाद सूर्पणखा अपने भाई खर-दूषण के पास पहुंचती है। रो -रो कर आपबीती सुनाती है। खर-दूषण आक्रोशित हो कर बदले की भावना से अस्त्र-शस्त्र से लैस होकर युद्ध के लिए चल देते हैं ।
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युद्ध में राम सेना समेत खर-दूषण का वध कर देते हैं। सूर्पणखा खरदूषण के मारे जाने के बाद लंका जा कर रावण को भड़काती है। रावण सूर्पणखा को समझाकर महल में चला जाता है। अपने मामा मारीच से कहता है कि छल कपट से मृग का रूप धारण कर सीता को चुरा लाओ। मारीच सोने के मृग का रूप धरकर पंचवटी पहुंचता है। सीता उसे देख मुग्ध हो जाती हैं। श्रीराम पीछा करते करते उसे वाण मारते हैं। मारीच हाय लक्ष्मण... हाय लक्ष्मण कहकर चिल्लाता है। प्राण छोड़ते समय मारीच श्रीराम का स्मरण करता है। उधर, पंचवटी में सूना पा कर साधु वेश में रावण सीता का हरण कर ले जाता है। रास्ते में गिद्धराज जटायु सीता की करुण पुकार सुनकर रावण से युद्ध करते हैं।