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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: तीन चरणों की कठिन परीक्षा पास करेंगे तभी मिलेगा भाजपा का टिकट, कटेगा मंत्रियों-विधायकों का पत्ता!

Fri, 20 Aug 2021 04:43 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 20 Aug 2021 04:43 PM IST
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सार
भाजपा के एक शीर्ष नेता ने बताया कि यूपी की हर विधानसभा सीट पर एक विस्तारक की नियुक्ति की जा रही है। चुनाव के दौरान इन विस्तारकों का काम पन्ना प्रमुखों, बूथ प्रमुखों, शक्ति केंद्र प्रमुखों से सीधा संपर्क कर भाजपा को वोट डलवाना होगा। इसके पूर्व इन्हीं प्रमुखों से मंडल स्तर तक लोगों से बातचीत कर उन उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा, जो क्षेत्र से चुनाव जीतने की क्षमता रखते हों...
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Uttar Pradesh Assembly Elections: Only if you pass the test of three phases then will get BJP ticket for up election 2022
उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी में भाजपा - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के परिणाम भाजपा की दीर्घकालिक राजनीति पर असर डालेंगे। ये परिणाम न केवल योगी आदित्यनाथ की राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि इनका असर लोकसभा चुनाव 2024 पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। यही कारण है कि भाजपा इस चुनाव को जीतने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती। यही कारण है कि इस बार उम्मीदवारों के चयन में भाजपा बेहद कड़ा रूख अपनाएगी। उम्मीदवारों के चयन में तीन बिल्कुल स्वतंत्र माध्यमों से चुनकर आए नामों पर ही अंतिम विचार किया जाएगा। इस मानक पर खरे न उतरने पर इस बार कई मंत्रियों-विधायकों तक का पत्ता कटना तय है।



भाजपा के एक शीर्ष नेता ने अमर उजाला को बताया कि यूपी की हर विधानसभा सीट पर एक विस्तारक की नियुक्ति की जा रही है। चुनाव के दौरान इन विस्तारकों का काम पन्ना प्रमुखों, बूथ प्रमुखों, शक्ति केंद्र प्रमुखों से सीधा संपर्क कर भाजपा को वोट डलवाना होगा। इसके पूर्व इन्हीं प्रमुखों से मंडल स्तर तक लोगों से बातचीत कर उन उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा, जो क्षेत्र से चुनाव जीतने की क्षमता रखते हों। इन विस्तारकों की रिपोर्ट यूपी चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ये सीधे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।


बताया गया है कि ये विस्तारक चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन पार्टी में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। लिहाजा इस पद पर पार्टी में 15 से 20 साल काम कर चुके अनुभवी नेताओं को ही जगह दी जाएगी। इसमें पार्टी के विधानसभा स्तर पर काम कर चुके नेताओं से लेकर विधायक, सांसद, एमएलसी और संगठन पदाधिकारी शामिल होंगे।

मध्यप्रदेश और गुजरात के पदाधिकारी भी जुटेंगे

चूंकि पार्टी ने इन विस्तारकों को चुनाव लड़ने से दूर रखने का स्पष्ट निर्णय लिया है, इसलिए उत्तर प्रदेश के कई नेता इस पद पर काम करने में अनिच्छा भी जता रहे हैं। इसके कारण पार्टी ने इस पद पर काम करने के लिए मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात के अनुभवी नेताओं को भी जिम्मेदारी देने की रणनीति बनाई है। ये विस्तारक चुनावों तक विधानसभा क्षेत्रों में ही रहकर वहां की संस्कृति, सामाजिक समीकरणों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देंगे।

विस्तारकों को मजबूती देने के लिए पार्टी ने इस बार हर पांच बूथ पर एक शक्ति केंद्र प्रमुख की नियुक्ति करने का प्रयोग करने का निर्णय लिया है। ये हर पांच बूथ की बेहद जमीनी रिपोर्ट पार्टी की केंद्रीय इकाई को सीधे सौंपेंगे। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा शीघ्र ही वर्चुअल बैठक के माध्यम से इन शक्ति केंद्र प्रमुखों को संबोधित भी करेंगे।

आरएसएस कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट होगी अहम

भाजपा संगठन के अलावा यूपी की जीत सुनिश्चित करने के लिए आरएसएस कार्यकर्ताओं की टीम जमीन पर लगातार काम कर रही है। संघ कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में संपर्क कर मतदाताओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं के माध्यम से हर सीट पर एक अलग रिपोर्ट तैयार होगी और इसके माध्यम से उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम राय ली जाएगी।

विचारधारा से स्वतंत्र सर्वेक्षण भी

विधानसभा विस्तारकों या संघ की रिपोर्ट तैयार करने में उन्हीं कार्यकर्ताओं की भूमिका रहती है, जो पहले से ही पार्टी की विचारधारा के साथ लंबे समय से जुड़े रहते हैं। इन कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट पूरी तरह विश्वसनीय और ठोस जमीनी जानकारी पर आधारित होती है। लेकिन पार्टी इन रिपोर्ट्स पर विचारधारा के असर पड़ने की संभावना को खारिज करके नहीं चलना चाहती है। यही कारण है कि विचारधारा से स्वतंत्र एक अलग सर्वेक्षण एजेंसी के सहारे हर सीट पर उम्मीदवारों के जिताऊ होने की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी उम्मीदवारों के चयन में बेहद अहम भूमिका निभाएगी।

जिताऊ न होने पर कटेंगे दिग्गजों के नाम

भाजपा के महामंत्री स्तर के एक नेता के अनुसार उम्मीदवारों के चयन में जिताऊ होना सबसे पहली और अनिवार्य योग्यता होगी। इन मानकों पर खरा न उतरने पर पार्टी के बड़े चेहरों को भी मैदान में उतरने से रोका जा सकता है, या उनकी सीट बदलने पर विचार किया जा सकता है। जिन मंत्रियों-विधायकों की अपने क्षेत्रों में काम करने की रिपोर्ट अच्छी नहीं पाई जाएगी, उनका टिकट कटना तय माना जा रहा है।

उम्मीदवारों के चयन में हर वर्ग को पर्याप्त भागीदारी देने का निर्णय किया गया है। लेकिन किसी भी सीट पर जिताऊ होना उम्मीदवार की सबसे पहली योग्यता होगी। हालांकि, कुल उम्मीदवारों में ओबीसी समुदाय को प्राथमिकता मिलना तय माना जा रहा है। इसके अलावा पूर्वांचल, अवध प्रांत और मध्य क्षेत्र में ब्राह्मण बहुल सीटों पर ब्राह्मण उम्मीदवारों को प्रमुखता मिल सकती है।

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