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सपा-कांग्रेस में सीट शेयरिंग पर कशमकश: इन 111 सीटों पर खुद ही लड़ेगी समाजवादी पार्टी; 'हाथ' के लिए ये है प्लान

Tue, 15 Sep 2026 08:02 AM IST
Sharukh Khan अजीत खरे, नई दिल्ली
अजीत खरे, नई दिल्ली Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 15 Sep 2026 08:02 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर गुत्थी सुलझ नहीं पा रही है। सीटों को लेकर दोनों दलों में कशमकश चल रही है। दोनों दलों के सामने वोटरों का मूड बनाए रखने की चुनौती है। सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने चुनौती यह है कि 2024 में पीडीए की बिसात पर मिली कामयाबी इस बार कैसे दोहराई जाए।

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uttar pradesh assembly election 2027 SP-Congress seat-sharing issue remains unresolved navigating two parties
sp congress alliance - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस जहां सीटें तय किए जाने की जल्दी में हैं, वहीं सपा अभी जमीनी हकीकत का जायजा लेने में और वक्त लगा रही है। उसका जोर जीतने की क्षमता पर है तो कांग्रेस अपनी बढ़ती ताकत का हवाला दे रही है। 
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इसके चलते सीट निर्धारण के फार्मूले पर सहमति अभी तक नहीं बन पा रही है। असल में सपा व कांग्रेस दोनों ने चुनाव से पहले आंतरिक सर्वे कराए हैं और इसमें सपा को 2022 के चुनाव के नतीजों से काफी ज्यादा सीटें मिलती दिखाई गई हैं, लेकिन बहुमत से दूरी है।
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जबकि कांग्रेस ने 100 से ज्यादा सीटें जीतने योग्य मानी हैं। दोनों ने एक दूसरे को इसके बारे में बता दिया है। कांग्रेस अब 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर तो सीटें मांग रही है, साथ ही उसकी निगाह राज्य के हर जिले से कम से कम एक सीट लड़ने की है ताकि सब जगह उसकी मौजूदगी दिखे। 

यही नहीं वह अब यूपी में छोटे भाई के रोल से अधिक अहमियत चाहती है, इसे सपा के लिए स्वीकार करना खासा मुश्किल है। दोनों यह मान रहे हैं कि सपा-कांग्रेस के मौजूदा आधार में कांग्रेस अतिरिक्त वोटरों को जोड़ दे तो बात बन सकती है।
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सपा जीती हुई 111 सीटों पर खुद ही लड़ेगी
सपा ने कांग्रेस को संदेश दिया है सीटों की संख्या व संभावित प्रत्याशी के नाम तय हो जाएं ताकि सीट वितरण में जातीय समीकरणों का ख्याल रखा जा सके। सपा पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को उतनी ही सीटें देने की तैयारी में थी जितनी उसने अपने सहयोगियों को दी थी। यह संख्या 60 से कम थी। पर बदले हालात में यह संख्या 75 से 80 तक हो सकती है। 
 

भाजपा की जीती सीटों पर ही कांग्रेस को सीटें मिलेंगी
भाजपा की जीती सीटों पर ही कांग्रेस को सीटें मिलेंगी। सपा अपनी सभी जीती हुई 111 सीटों पर खुद ही लड़ेगी। पार्टी विधायकों में ज्यादातर को दोबारा लड़ने के लिए कह दिया गया है। पार्टी छोड़कर जाने वाले विधायकों को हराने के लिए खास तरह की घेराबंदी कांग्रेस के सहयोग से होगी।

 

2024 में पीडीए की बिसात पर मिली कामयाबी फिर कैसे दोहराए?
सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने चुनौती यह है कि 2024 में पीडीए की बिसात पर मिली कामयाबी इस बार कैसे दोहराई जाए। हालांकि मुद्दों व माहौल दोनों में फर्क आ गया है। वोटरों का मूड बदलता रहता है। इसमें भी अब जेन जी को अलग से साधना है जो शायद पीडीए के खांचे में यकीन नहीं करता।

 

अलग-अलग रणनीति पर काम
जेन जी व महिलाओं पर फोकस

कांग्रेस की ओर से जहां राहुल गांधी जेन जी के बीच पैठ बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं, वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने युवाओं महिलाओं को समर्थन पाने के लिए अलग रणनीति पर काम शुरू किया है।
 
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