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यूपी: पश्चिम से पूर्वांचल तक ओवैसी की सियासी दस्तक, सपा के इलाकों में बदलेंगे समीकरण! किसे नफा, किसे नुकसान?
Sat, 24 Oct 2026 10:07 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 24 Oct 2026 10:07 AM IST
सार
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम से पूर्वांचल तक सियासी दस्तक दे दी है। ओवैसी सपा के इलाकों में चुनावी गणित बदल सकते हैं। मुसलमानों के अधिकार के सवाल पर यह पार्टी पश्चिम से पूर्वांचल तक जनसभाओं के जरिये पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही है।
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UP Elections 2027
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी अब थर्ड फ्रंट की मुहिम में लग गए हैं। एआईएमआईएम से सपा पहले से दूरी बनाए हुई थी, लेकिन अब दोनों के बीच रिश्ते और तल्ख होते जा रहे हैं।
चुनावी नतीजों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ओवैसी सपा का नुकसान ही करेंगे या खुद भी कुछ सीटें निकाल पाएंगे। मुसलमानों के अधिकार के सवाल पर यह पार्टी पश्चिम से पूर्वांचल तक जनसभाओं के जरिये पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही है।
मुस्लिम बहुल इलाकों पर इसकी खास नजर है, जिनमें से अधिकांश को सपा का गढ़ माना जाता है। ओवैसी की यह दस्तक सपा के मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण में सेंध लगा सकती है। सपा का मानना है कि एआईएमआईएम की सक्रियता से भाजपा को ही फायदा होना है क्योंकि यह पार्टी मुस्लिमों के कुछ वोट काटेगी।
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चुनावी नतीजों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ओवैसी सपा का नुकसान ही करेंगे या खुद भी कुछ सीटें निकाल पाएंगे। मुसलमानों के अधिकार के सवाल पर यह पार्टी पश्चिम से पूर्वांचल तक जनसभाओं के जरिये पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही है।
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मुस्लिम बहुल इलाकों पर इसकी खास नजर है, जिनमें से अधिकांश को सपा का गढ़ माना जाता है। ओवैसी की यह दस्तक सपा के मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण में सेंध लगा सकती है। सपा का मानना है कि एआईएमआईएम की सक्रियता से भाजपा को ही फायदा होना है क्योंकि यह पार्टी मुस्लिमों के कुछ वोट काटेगी।
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ओवैसी का कहना है कि समाजवादी पार्टी मुसलमानों के वोट तो लेती है, और मुसलमानों को केवल दरी बिछाने वाला मानती है। पिछले विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारे लेकिन कामयाबी कहीं नहीं मिली।
एआईएमआईएम के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद नेता तेजस्वी यादव ने हमें विधानसभा चुनाव में चरमपंथी कहा था, उनका हश्र सबने देख लिया, अब सपा हमें रावण बता रही है, सोच लें कि उनका क्या हाल होना है। हमारी पार्टी सौ से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
किसे नफा, किसे नुकसान?
ओवैसी की इस सक्रियता के चुनावी नतीजों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं। यदि एआईएमआईएम कुछ सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारकर ठीक-ठाक वोट काटने में सफल होती है, तो बहुकोणीय मुकाबलों में विरोधी मतों का विभाजन हो सकता है।
ओवैसी की इस सक्रियता के चुनावी नतीजों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं। यदि एआईएमआईएम कुछ सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारकर ठीक-ठाक वोट काटने में सफल होती है, तो बहुकोणीय मुकाबलों में विरोधी मतों का विभाजन हो सकता है।
इससे खासकर उन सीटों पर दिक्कत बढ़ सकती है जहां जीत-हार बहुत कम अंतर से होती है। ओवैसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती रैलियों की भीड़ को मजबूत बूथ स्तर के संगठन और चुनावी नतीजों में तब्दील करने की है।