अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश: इस मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ और मायावती दोनों लगा रहे हैं दांव, किसे मिलेगा जनता का साथ
मऊ सदर से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार घोषित किए जा चुके भीम राजभर ने अमर उजाला से कहा कि उनको उम्मीदवार घोषित कर 'बहन जी' ने साफ कर दिया है कि उनके लिए कानून-व्यवस्था का मुददा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। वे ऐसे किसी भी व्यक्ति को टिकट देने के विरोध में हैं जिसकी आपराधिक पृष्ठभूमि रही है...
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बसपा नेता मायावती ने मऊ सदर विधानसभा सीट से बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी का टिकट काट दिया है। उनकी जगह पार्टी प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर को मैदान में उतारने की घोषणा की है। इसके साथ ही मायावती ने कानून-व्यवस्था को अपनी पहली वरीयता बताते हुए कहा है कि पार्टी विधानसभा चुनाव में किसी अपराधी को टिकट नहीं देगी। इससे साफ हो गया है कि बसपा इस चुनाव में सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर मैदान में उतरेगी जो कभी उनकी बड़ी ताकत हुआ करती थी।
वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए जाने जाते रहे हैं। भाजपा का दावा है कि योगी आदित्यनाथ के शासन में पुलिस ने अपराधियों पर नकेल कसी है। पुलिस ने अनेक दुर्दांत अपराधियों को मार गिराया है और अब उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का राज है। पार्टी योगी आदित्यनाथ की अपराधियों के प्रति सख्त छवि को अपनी बड़ी चुनावी ताकत मानती है।
बड़ा सवाल- कानून-व्यवस्था को लेकर जनता किसके साथ
मऊ सदर से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार घोषित किए जा चुके भीम राजभर ने अमर उजाला से कहा कि उनको उम्मीदवार घोषित कर 'बहन जी' ने साफ कर दिया है कि उनके लिए कानून-व्यवस्था का मुददा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। वे ऐसे किसी भी व्यक्ति को टिकट देने के विरोध में हैं जिसकी आपराधिक पृष्ठभूमि रही है। बहन जी के पिछले कार्यकाल में जनता ने देखा था कि कैसे उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेता उमाकांत यादव को पुलिस बुलाकर गिरफ्तार करवा दिया था। अपराधियों पर कार्रवाई करने के मामले में वे अपने ही नेताओं, मंत्रियों और विधायकों तक को नहीं छोड़ती थीं।
भीम राजभर ने आरोप लगाया कि वर्तमान योगी आदित्यनाथ सरकार अपराधियों पर कार्रवाई के नाम पर वर्ग और जाति विशेष के लोगों पर कार्रवाई करती है, जबकि मंत्रियों-विधायकों और एक वर्ग विशेष के लोगों के अपराधियों के मामलों पर पुलिस चुप बैठी रहती है और कोई कार्रवाई नहीं करती। कुलदीप सेंगर से लेकर हाथरस कांड तक देश-प्रदेश की जनता ने देखा है कि किस प्रकार अपराधियों को बचाने की कोशिश की गई।
बसपा के राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने अमर उजाला से बातचीत में आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासन को जंगलराज कहा जाता था, क्योंकि अखिलेश यादव के शासनकाल में अपराधियों को खुली छूट मिली हुई थी। मंत्री तक बलात्कारियों के बचाव में खड़े नजर आते थे। इस वीभत्स स्थिति से बचाने के लिए जनता ने भाजपा को अवसर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि, अब तक का अनुभव बताता है कि योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में सपा का जंगलराज अपना रूप बदलकर नए तरीके से जनता के सामने आ गया है।
अब पुलिस ही अपराधियों वाला काम करने लगी है। हाथरस कांड बताता है कि किस प्रकार न्याय दिलाने वाले लोगों ने ही अपराधियों को बचाने का काम किया है। आज भी प्रदेश में लगातार अपराध हो रहे हैं, बहन-बेटियों से छेड़छाड़ हो रही है और जनता बेबस होकर देख रही है। बसपा नेता ने कहा कि आज प्रदेश की जनता बहन जी की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रही है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि सपा-भाजपा से निराश जनता उन्हें अवसर देगी।
बसपा के पूर्वांचल क्षेत्र के प्रभारी अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि प्रदेश के 21 फीसदी दलित और 15 फीसदी ब्राह्मणों की ताकत एक साथ मिल गई है। मुस्लिमों के साथ-साथ समाज के अन्य वर्गों से भी उन्हें पूरा समर्थन मिल रहा है। उन्हें विश्वास है कि अपराध, बेरोजगारी से जूझती जनता मायावती को भारी समर्थन से जिताएगी।
योगी आदित्यनाथ की पहचान है कठोर कार्रवाई
भाजपा नेता शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि मायावती का कानून-व्यवस्था के नाम पर दुहाई देना 'सौ चूहे खाकर हज जाने' वाली कहावत को सही साबित करने जैसा है। जनता ने देखा है कि किस प्रकार मायावती ने अपनी राजनीतिक यात्रा में अपराधियों का साथ लिया। बड़े-बड़े अपराधी जिन्हें कहीं टिकट नहीं मिलता था, वे पैसे के बल पर बहुजन समाज पार्टी से टिकट पाते थे। बदले में उन्हें जनता को लूटने और सताने का खुला लाइसेंस मिल जाता था। मुख्तार अंसारी और धनंजय सिंह जैसे दर्जनों अपराधी नेता मायावती के साथ हमेशा से रहे हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सुशासन, योगी आदित्यनाथ की बेदाग छवि, जनता के कल्याण के लिए कार्य और विकास के कामों पर जनता वोट करेगी और उन्हें विश्वास है कि योगी आदित्यनाथ सरकार सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करेगी।