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: मासिक पारिश्रमिक के लिए मजदूरों ने किया प्रदर्शन
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बंथर यूपीएसआईडीसी स्थित फैक्टरी के बाहर वेतन न मिलने पर प्रदर्शन करते श्रमिक।
- फोटो : UNNAO
अचलगंज(उन्नाव) में मजदूरी न मिलने से आक्रोशित मजदूरों ने फैक्टरी गेट पर प्रदर्शन करते हुए प्रबंधतंत्र पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। सूचना पर पहुंचे अचलगंज इंस्पेक्टर ने प्रबंधतंत्र व मजदूरों के बीच समझौता कराने की कोशिश की। वहीं, फैक्टरी प्रबंधन ने कोर्ट का हवाला देते हुए मजदूरी का भुगतान न देकर एडवांस देने की बात पर अड़े रहे।
गुरुवार को यूपीएसआईडीसी स्थित एक चर्म इकाई के एक सैकड़ा से अधिक मजदूरों ने फैक्टरी गेट घेरकर नारेबाजी शुरू कर दी। उनका आरोप था कि अप्रैल माह का मेहनताना अभी तक नहीं दिया गया है। साथ ही मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनसे निर्धारित समय से एक घंटे अधिक काम लिया जाता है तथा ओवरटाइम के लिए निर्धारित चालीस रुपये के स्थान पर मात्र 18 रुपये ही दिए जाते हैं। मजदूरों ने बताया कि अन्य सभी इकाइयों में एक घंटे का लंच टाइम होता है जबकि इस इकाई में तीस मिनट का ही होता है।
इससे अधिक समय लगाने पर उनकी मजदूरी काट ली जाती है। हंगामे की सूचना पर इंस्पेक्टर डीपी सिंह व बदरका चौकी इंचार्ज संजीव शाक्य भी मौके पर पहुंचे और फैक्टरी मैनेजर मोहम्मद मोवज्जिम से मजदूरों की बातचीत कराने का प्रयास किया। वहीं, फैक्टरी संचालकों का कहना है कि पहले कुंभ मेले को लेकर इकाइयां बंद रही। इसके बाद लॉकडाउन के कारण फैक्टरी बंद हो गई जिससे इकाई दिवालिया होने की कगार पर है।
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अप्रैल माह के मेहनताना को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। जैसा निर्णय होगा हम उसका पालन करेंगे। तब तक के लिए हमने सभी मजदूरों के खातों में उनके मेहनताना की आधी रकम ट्रांसफ र कर दी है। बाद में यदि कोर्ट पूर्ण भुगतान का आदेश देता है तो हम आधी मजदूरी और दे देंगे। नहीं तो अग्रिम के तौर पर मजदूरों के भुगतान में किस्तवार कटौती करते रहेंगे। इससे अधिक की इस समय क्षमता नहीं है। लगभग छह घंटे तक हंगामा करने के बाद सभी लौट गए।
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गुरुवार को यूपीएसआईडीसी स्थित एक चर्म इकाई के एक सैकड़ा से अधिक मजदूरों ने फैक्टरी गेट घेरकर नारेबाजी शुरू कर दी। उनका आरोप था कि अप्रैल माह का मेहनताना अभी तक नहीं दिया गया है। साथ ही मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनसे निर्धारित समय से एक घंटे अधिक काम लिया जाता है तथा ओवरटाइम के लिए निर्धारित चालीस रुपये के स्थान पर मात्र 18 रुपये ही दिए जाते हैं। मजदूरों ने बताया कि अन्य सभी इकाइयों में एक घंटे का लंच टाइम होता है जबकि इस इकाई में तीस मिनट का ही होता है।
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इससे अधिक समय लगाने पर उनकी मजदूरी काट ली जाती है। हंगामे की सूचना पर इंस्पेक्टर डीपी सिंह व बदरका चौकी इंचार्ज संजीव शाक्य भी मौके पर पहुंचे और फैक्टरी मैनेजर मोहम्मद मोवज्जिम से मजदूरों की बातचीत कराने का प्रयास किया। वहीं, फैक्टरी संचालकों का कहना है कि पहले कुंभ मेले को लेकर इकाइयां बंद रही। इसके बाद लॉकडाउन के कारण फैक्टरी बंद हो गई जिससे इकाई दिवालिया होने की कगार पर है।
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अप्रैल माह के मेहनताना को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। जैसा निर्णय होगा हम उसका पालन करेंगे। तब तक के लिए हमने सभी मजदूरों के खातों में उनके मेहनताना की आधी रकम ट्रांसफ र कर दी है। बाद में यदि कोर्ट पूर्ण भुगतान का आदेश देता है तो हम आधी मजदूरी और दे देंगे। नहीं तो अग्रिम के तौर पर मजदूरों के भुगतान में किस्तवार कटौती करते रहेंगे। इससे अधिक की इस समय क्षमता नहीं है। लगभग छह घंटे तक हंगामा करने के बाद सभी लौट गए।