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कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त

Fri, 27 Dec 2019 12:27 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 12:27 AM IST
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Life is disturbed due to bitter cold
कपकपाती ठंड में कुछ इस अपने को गर्म कपड़ों से ढककर जाती स्कूटी सवार युवतियां। - फोटो : UNNAO
उन्नाव। पिछले कई दिनों से हो रही कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बीते 24 घंटे में अधिकतम तापमान में 2.4 और न्यूनतम तापमान में 4.2 डिग्री सेल्सियस की कमी आई। गुरुवार शाम को न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। लोग गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए। जिसे जहां भी थोड़ी सी आंच दिखी हाथ गर्म कर ठंड से राहत लेता दिखा।
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शुक्रवार रात शीत लहर के साथ घना कोहरा छा गया। ठंडी हवा के झोकों से पारा और नीचे लुढ़क गया। गुरुवार को सूरज दिनभर बादलों की ओट से बाहर नहीं निकला। शाम को ठंड का कहर और तेज हो गया। दिनभर कोहरे की धुंध छाई रही। हवा चलने से गलन बढ़ गई। शाम होते ही लोग घरों मेें कैद हो गए। बाजारों में भी भीड़ छंट गई। दिन में भी लोग खुद को पूरी तरह से गर्म कपड़ों से ढककर ही बाहर निकले। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग अलाव जलाकर ठंड से बचाव करते दिखे।
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शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बीच शहर के अलाव ठंडे हैं। बीते छह दिनों में नगर पालिका ने सिर्फ दो दिन ही अलाव जलवाए हैं। नगर पालिका में बकाया ढाई लाख रुपये का भुगतान न होने से आपूर्तिकर्ता ने लकड़ी देना बंद कर दिया है।
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भीषण ठंड के बीच शहरियों और आम लोगों को अलाव की आंच देने की जिम्मेदारी पर उन्नाव नगर पालिका खरी नहीं उतरी। अलाव के लिए शहर में रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, प्रमुख चौराहों तिराहों सहित पूरे शहर में कुल 25 स्थान चिह्नित हैं। नगर पालिका के अनुसार प्रतिदिन 20 क्विंटल लकड़ी अलाव में खर्च होती है। लेकिन पिछले तीन दिनों में जब से कड़ाके की ठंड शुरू हुई अलाव नहीं जलाए जा सके हैं। हालांकि नगर पालिका ईओ रामपूजन श्रीवास्तव का दावा है कि गुरुवार को लकड़ी का बकाया भुगतान करने के साथ ही वर्क आर्डर तैयार कर लिया गया है। बताया कि अलाव की व्यवस्था सुचारू कर ली जाएगी।
भीषण ठंड के बावजूद जिला प्रशासन गरीबों और निराश्रितों को शीतलहर से बचाने के लिए कंबल की व्यवस्था नहीं कर पाया। कंबल की खरीदारी की जिम्मेदारी जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित छह सदस्यीय तकनीकी क्रय समिति को दिया गया था। जिला प्रशासन के पास कंबल खरीद के लिए 30 लाख रुपये का बजट उपलब्ध है। प्रत्येक तहसील को कंबल खरीदने के लिए 5 लाख रुपये दिए गए हैं। एक कंबल की कीमत अधिकतम 500 रुपये निर्धारित की गई है। जिले में 6000 कंबल खरीदे जाने हैं लेकिन अभी तक खरीद नहीं हो पाई है।

एडीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि कंबल की खरीदारी गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम पोर्टल) से होनी है। बताया कि जेम पोर्टल पर रजिस्टर्ड इकाइयों से टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। जल्द ही खरीद कर वितरण कराया जाएगा।
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