{"_id":"b3bb38216f17a923f643023eaedcc87a","slug":"getting-away-from-the-new-generation-of-culture-and-rituals-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संस्कृति व संस्कार से दूर हो रही नई पीढ़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संस्कृति व संस्कार से दूर हो रही नई पीढ़ी
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Tue, 03 Feb 2015 12:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अश्वमेध यज्ञ के दूसरे दिन बड़ी संख्या में लोग यज्ञ स्थल पर पहुंचे और आहुतियां दीं। गायत्री शक्तिपीठ के आचार्यों ने कहा कि संस्कृति व संस्कार से नई पीढ़ी दूर होती जा रही है। उन्होंने नई पीढ़ी से पुरातन संस्कृति की ओर लौटने का आह्वान किया और कहा कि संस्कृति व संस्कार से दूर होना ही मानव के कष्टों का प्रमुख कारण है।
विज्ञापन
अश्वमेध यज्ञ के धर्माध्वज को तहसीलदार त्रिवेणी प्रसाद वर्मा ने फहराया। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुवंदना से किया गया। इसके बाद गायत्री शक्तिपीठ उन्नाव से आए आचार्यों जगदीश, जगन्नाथ उपाध्याय, छबीलेदास मिश्र ने मंज्ञोच्चारण के साथ पूजन कराया। इसी के साथ यज्ञ प्रारंभ कराया।
विज्ञापन
कलश पूजन गुजरात से आईं ईला दीदी ने किया। त्रिवेदी प्रसाद वर्मा ने कहा कि आज हमारी पीढ़ी गायत्री, गुरु, यज्ञ, संस्कार को भूलती जा रही है। जब हमारे भाई-बहन संस्कारों को धारण करते थे तो हमारे यहां रामकृष्ण, ध्रुव, प्रहलाद, सीता, गायत्री, सावित्री आदि जन्म लेते थे। अब हमें पुन: अपनी संस्कृति की ओर लौटना चाहिए।
विज्ञापन
मुकेश गुप्ता ने कहा कि हमारी यह गुरुवाणी सत्य होगी। मानव जीवन परमात्मा की सर्वोत्कृष्ट कृति है। वह भगवान का राजकुमार है, जिसे सारी रिद्धियां सिद्धियां प्राप्त हो सकती हैं, यदि वह अपने आप को परिष्कृत कर ले। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी गरिमा का ध्यान रखते हुए कार्य करना चाहिए।
इस दौरान सदन सिंह, प्रमोद रस्तोगी, मधुर सिंह, आनंद, अमित, राजन, सूरज, पप्पू राठौर, गोल्डी, नेहा, प्रज्ञा, सीता आदि मौजूद रहे।