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उन्नाव..
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उन्नाव। बारिश से पहले पीडब्ल्यूडी ने 338 किमी लंबी 108 सड़कों की मरम्मत शुरू कराई थी लेकिन गड्ढा मुक्ति का अभियान औपचारिक रहा। बारिश होने पर ये गड्ढे हादसे का सबब बन रहे हैं। अधिकांश सड़कें पहली बारिश में फिर क्षतिग्रस्त हो गईं हैं।
शासन ने सड़कों की मरम्मत के लिए 1.83 करोड़ रुपये जारी किए हैं। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि केवल 100 किमी सड़कों के गड्ढे भरना बाकी रह गया है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बता रही है। उन्नाव-हरदोई मार्ग, मोहनलालगंज-मौरावां-उन्नाव मार्ग, बिहार-भगवंतनगर-बक्सर मार्ग, मौरावां-हिलौली-बछरावां मार्ग सहित मंगतखेड़ा-पड़री मार्ग, हुसैन नगर, ओसियास, बीघापुर, बदरका, मौरावां-बिहार, कालूखेड़ा मार्गों में जगह-जगह गड्ढे है। फैली गिट्टी से आए दिन हादसे हो रहे हैं।
एक माह से जर्जर पड़ी 50 मीटर सड़क
अचलगंज-पुरवा मार्ग पर जहां हादसे में चचेरे भाइयों की मौत हुई है, वहां करीब एक माह से पुलिया बनाने का काम चल रहा था। पीछे की तरफ से पूरी सड़क बनी हुई है लेकिन चपरी मोड़ के पास पचास मीटर सड़क जर्जर है। हालांकि निर्माण के दौरान आवागमन सुगम बनाए रखने के लिए पुरानी सड़क या सर्विस लेन की मरम्मत कराने कराने का प्रावधान है लेकिन पीडब्ल्यूडी ने ऐसा नहीं कराया। एई अनुपम शुक्ला का कहना है कि निर्माण एजेंसी से जवाब तलब किया जाएगा।
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सड़क दुर्घटना में लिया जा सकता है प्रतिकर
अधिवक्ता अजेंद्र अवस्थी ने बताया कि सड़क खराब होने के कारण वाहन दुर्घटना व उसमें जनहानि होने पर मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर अधिनियम के तहत क्लेम किया जा सकता है। इसका वाद मोटर वाहन दुर्घटना ट्रिब्यूनल (अभिकरण) में दायर किया जा सकता है। सुनवाई के बाद अभिकरण मृतक की आय व आयु के आधार पर बीमा कंपनी के माध्यम से आश्रितों को प्रतिकर देने का आदेश पारित करता है। निर्माण एजेंसी के खिलाफ भी वाद दायर किया जा सकता है। परीक्षण के बाद न्यायालय संबधित विभाग पर भी अर्थदंड लगा सकती है।
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएएन हरदयाल अहवार ने बताया कि सड़कों की गड्ढा मुक्ति का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। केवल 100 किमी काम शेष है, वह भी जल्द ही पूरा हो जाएगा।
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शासन ने सड़कों की मरम्मत के लिए 1.83 करोड़ रुपये जारी किए हैं। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि केवल 100 किमी सड़कों के गड्ढे भरना बाकी रह गया है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बता रही है। उन्नाव-हरदोई मार्ग, मोहनलालगंज-मौरावां-उन्नाव मार्ग, बिहार-भगवंतनगर-बक्सर मार्ग, मौरावां-हिलौली-बछरावां मार्ग सहित मंगतखेड़ा-पड़री मार्ग, हुसैन नगर, ओसियास, बीघापुर, बदरका, मौरावां-बिहार, कालूखेड़ा मार्गों में जगह-जगह गड्ढे है। फैली गिट्टी से आए दिन हादसे हो रहे हैं।
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एक माह से जर्जर पड़ी 50 मीटर सड़क
अचलगंज-पुरवा मार्ग पर जहां हादसे में चचेरे भाइयों की मौत हुई है, वहां करीब एक माह से पुलिया बनाने का काम चल रहा था। पीछे की तरफ से पूरी सड़क बनी हुई है लेकिन चपरी मोड़ के पास पचास मीटर सड़क जर्जर है। हालांकि निर्माण के दौरान आवागमन सुगम बनाए रखने के लिए पुरानी सड़क या सर्विस लेन की मरम्मत कराने कराने का प्रावधान है लेकिन पीडब्ल्यूडी ने ऐसा नहीं कराया। एई अनुपम शुक्ला का कहना है कि निर्माण एजेंसी से जवाब तलब किया जाएगा।
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सड़क दुर्घटना में लिया जा सकता है प्रतिकर
अधिवक्ता अजेंद्र अवस्थी ने बताया कि सड़क खराब होने के कारण वाहन दुर्घटना व उसमें जनहानि होने पर मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर अधिनियम के तहत क्लेम किया जा सकता है। इसका वाद मोटर वाहन दुर्घटना ट्रिब्यूनल (अभिकरण) में दायर किया जा सकता है। सुनवाई के बाद अभिकरण मृतक की आय व आयु के आधार पर बीमा कंपनी के माध्यम से आश्रितों को प्रतिकर देने का आदेश पारित करता है। निर्माण एजेंसी के खिलाफ भी वाद दायर किया जा सकता है। परीक्षण के बाद न्यायालय संबधित विभाग पर भी अर्थदंड लगा सकती है।
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएएन हरदयाल अहवार ने बताया कि सड़कों की गड्ढा मुक्ति का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। केवल 100 किमी काम शेष है, वह भी जल्द ही पूरा हो जाएगा।