पांच सौ प्रशिक्षु दरोगाओं पर लूट, मारपीट व सड़क जाम करने की रिपोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फतेहपुर चौरासी के पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में रविवार की रात लगभग दो बजे तक प्रशासन हलाकान रहा। पुलिस ने सड़क पर जाम लगाने व बवाल करने के आरोपी पांच सौ ट्रेनी दरोगाओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। वहीं मीडिया कर्मियों ने भी मारपीट और लूटपाट की रिपोर्ट दर्ज कराई है। सोमवार को एडीजी पुलिस ट्रेनिंग पूरे दिन केंद्र में डटे रहे। प्रशिक्षुओं ने सुबह नाश्ता और खाना भी नही खाया। दोपहर को एडीजी ने नाराज प्रशिक्षुओं से बात की और मामले की जांच कराने व दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इसके बाद प्रशिक्षुओं का आक्रोश शांत हुआ।
मालूम हो कि फतेहपुर चौरासी में कालीमिट्टी स्थित शहीद गुलाब सिंह लोधी पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में रविवार रात खाना खाने के बाद 125 प्रशिक्षु दरोगाओं को पेट दर्द और उल्टी-दस्त शुरू हो गए थे। ट्रेनिंग सेंटर में इलाज की समुचित व्यवस्था न होने और मरीजों को अस्पताल न भेजे जाने से नाराज प्रशिक्षु केंद्र का ताला खोलकर सड़क पर उतर आए थे। एसपी व आरआई ने सफीपुर स्वास्थ्य केंद्र भेजना शुरू किया। प्रशिक्षु रात दो बजे तक उन्नाव-हरदोई मार्ग जाम लगाए रहे। इस दौरान कई वाहनों में तोड़फोड़ का प्रयास किया। कवरेज करने पर ट्रेनी दरोगाओं ने मीडिया कर्मी से मारपीट की जिसमें लूटपाट की शिकायत भी की गई है। करीब पांच सैकड़ा ट्रेनी दरोगा के आक्रोश को देखते हुए पुलिस भी कोई कार्रवाई करने से कतराती रही। घंटो की मशक्कत के बाद एडीजी पुलिस ट्रेनिंग वीके मौर्य हंगामा कर रहे प्रशिक्षुओं को समझाकर शांत करा पाए तब जाम खुला। उधर खाना खाने के बाद बीमार हुए सभी 125 ट्रेनी को रात में इलाज के बाद सोमवार सुबह अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। पीटीसी के एसपी और आरआई का विरोध कर रहे प्रशिक्षुओं ने सोमवार सुबह नाश्ता नहीं किया और दोपहर का खाना भी नहीं खाया। दोपहर को एडीजी वीके मौर्य ने सभी नाराज प्रशिक्षु दरोगा से बात की और उनकी शिकायतें सुनी। एडीजी ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया इसके बाद मामला शांत हुआ। फतेहपुर चौरासी थानाध्यक्ष मो. अशरफ ने बताया कि ट्रेनी दरोगा के खिलाफ सड़क जाम करने, अनुशासन तोड़ने के साथ ही दो मीडिया कर्मियों से मारपीट व लूट का मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कानून व अनुशासन की पाठशाला दोनो तार-तार
पुलिस अधिकारी बोले, अंधेरा न होता तो सिखा देते सबक
अमर उजाला ब्यूरो
दूसरों को कानून का पालन कराने वाले भावी दरोगा ही कानून का उल्लंघन करने लगें तो जनता को कानून का पाठ कैसे पढ़ाएंगे। यह कहना है उन पुलिस अधिकारियों का जिन्हें घटना के बाद मौके पर भेजा गया था। कई पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नाराजगी व्यक्त करने का जो तरीका प्रशिक्षुओं ने अपनाया वह किसी भी हालत में क्षम्य नहीं है। उनका कहना है कि रात का समय न होता तो सभी को ऐसा सबक सिखाते कि जीवन भर के लिए अनुशासन सीख जाते। हालांकि एडीजी ट्रेनिंग गहन जांच और कड़ी कार्रवाई की बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी यहां हुआ है उसे कभी नजर अंदाज या माफ नहीं किया जाता। कहा कि बात कहने और विरोध के और भी तरीके होते हैं।
अनुशासन और आईपीसी का ज्ञानार्जन करने के लिए आए प्रशिक्षुओं ने पांच घंटे ट्रेनिंग सेंटर में घंटो हंगामा, लूटपाट के साथ ही तोड़फोड़ का प्रयास, वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करने वाले प्रशिक्षुओं को काबू करने के लिए एसपी नेहा पांडेय स्वयं मौके पर पहुंचीं थीं और उन्होंने कई थानों की फोर्स के साथ ही दमकल और पुलिस लाइन से भी भारी संख्या में फोर्स रात करीब एक बजे मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने घेराबंदी शुरू की मगर रात का अंधेरा होने और दोनो और वाहनों की कई किमी लंबी लाइन लगे होने से पुलिस प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाई। हालांकि दबाव बनाने के लिए पुलिस ने कई राउंड हावाई फायरिंग की थी। इसी दौरान एडीजी के समझाने के बाद ट्रेनी दरोगा जाम खोलने को तैयार हो गए और कुछ ही देर में सभी सड़क से हट गए।
एडीजी ट्रेनिंग ने शुरू की जांच
पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में फूड प्वाइजनिंग, अधिकारियों के खिलाफ बगावत और जाम प्रदर्शन की घटना की जांच करने पहुंचे एडीजी ट्रेनिंग वीके मौर्य ने बताया कि पीटीसी में मौजूदा समय में कुल 800 प्रशिक्षु दरोगा की ट्रेनिंग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि 400 दरोगा की ट्रेनिंग पहले से चल रही है जबकि इसी महीने 6 फरवरी को इलाहाबाद, मुरादाबाद, चुनार और गोरखपुर से 400 और ट्रेनी आए हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षुओं में हर तरह के बच्चे होते हैं। उन्होंने माना कि घटना ऐेसी है कि जिसकी फोर्स में गंभीर अनुशासन हीनता माना जाता है। बताया कि वह जांच कर रहे हैं कि आखिर हालात इतना ज्यादा कैसे बिगड़े। उन्होंने वाहनों में तोड़फोड और पीडीसी में अधिकारियों के आवास व अन्य इमारत में तोड़फोड़ करने की घटना से इनकार किया है। एडीजी ने बताया कि पूरे मामले की गहन पड़ताल चल रही है।
प्रशिक्षुओं के आरोप
प्रशिक्षणार्थियों का आरोप है कि घर में जरूरी काम या किसी के बीमार होने पर भी छुट्टी नहीं दी जाती।
एक रूम में 12 लोगों के रहने की व्यवस्था, रखे जा रहे 17-18 प्रशिक्षु।
गांवों से खुला व पानी मिला दूध दिया जाता है, पैकेट बंद दूध की मांगने पर सजा।
प्रशिक्षण दे रहे अधिकारियों की बात करने का लहजा ठीक नहीं है।