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'दूरस्थ' पीएचडी पर रोक, गोरखधंधा होगा मंदा!
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 26 Jun 2013 11:36 AM IST
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दूरस्थ शिक्षा के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर लगाम कसने की तैयारी हो चुकी है। यूजीसी ने ऐसे नियम बनाए हैं कि अब दूरस्थ शिक्षा के नाम पर गोरखधंधा करने वालों की दुकानें बंद हो जाएंगी। ऐसे लोगों की मठाधीशी भी बंद हो जाएगी, जो जुगाड़ और पैसे के दम पर घर बैठे डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करना चाहते हैं।
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'दूरस्थ' पीएचडी पर रोक
यूजीसी ने किसी भी विश्वविद्यालय द्वारा दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से एमफिल और पीएचडी करवाने पर रोक लगा दी है। अभी तक विवि दूरस्थ शिक्षा के नाम पर धड़ल्ले से एमफिल-पीएचडी करवाने का धंधा करते रहे हैं। यूजीसी के नए नियमों के मुताबिक कोई भी विश्वविद्यालय सिर्फ अपने संबद्ध कॉलेजों के माध्यम से ही कोर्स चला सकेगा। वह किसी प्राइवेट संस्थान के साथ मिलकर दूरस्थ शिक्षा के तहत कोर्स नहीं चला सकेगा।
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इसके अलावा विश्वविद्यालय अपनी राज्य की सीमा के भीतर ही चलेगा। वह अन्य राज्यों में अपने स्टडी सेंटर नहीं खोल पाएगा। निजी और डीम्ड विश्वविद्यालय किसी कॉलेज या संस्थान के साथ मिलकर डिग्री, डिप्लोमा व अन्य योग्यता प्रदान करने के लिए कोर्सेज नहीं चला सकेंगे।
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कई संस्थान कर रहे गोरखधंधा
अभी कई निजी विश्वविद्यालय अपने विभिन्न विशेष पाठ्यक्रमों के जरिए विश्वविद्यालय की डिग्रियां दे रहे हैं। यह निजी विश्वविद्यालय खुद को विभिन्न विश्वविद्यालयों के अध्ययन केंद्र व प्रशिक्षण केंद्र बताकर गोरखधंधा कर रहे हैं। सभी वििव सिर्फ यूजीसी रेगुलेशन के अनुसार ही स्नातक से लेकर परास्नातक स्तर तक के कोर्स चला सकेंगे।
छात्रों को सावधान रहने की सलाह
निजी विवि सिर्फ अपने मुख्यालय पर ही चलेगा। वह पांच वर्ष बाद तभी अपना ऑफ कैंपस सेंटर खोल सकता है जब वह यूजीसी विनिमय वर्ष 2003 में बनाई गईं शर्तों को पूरा करता हो। यूजीसी के सचिव अखिलेश गुप्ता ने सभी छात्रों व अभिभावकों को फर्जीवाड़ा करने वालों से सावधान रहने की सलाह दी है।
कोई भी छात्र व अभिभावक निजी व डीम्ड विश्वविद्यालय की मान्यता तथा उनके द्वारा संचालित कोर्सेज के संबंध में यूजीसी से जानकारी हासिल कर सकते हैं। गुप्ता ने छात्रों को निजी या डीम्ड विवि से संबद्धता का दावा करने वाले गैर-अनुमोदित अध्ययन केंद्रों में दाखिला न लेने क सलाह दी है।