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बिसरा रिपोर्ट के कारण कोर्ट में अटके हैं हजारों मुकदमे
इलाहाबाद/ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jan 2013 08:16 AM IST
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आपराधिक मामलों में पुलिस द्वारा बिसरा रिपोर्ट समय पर जांच के लिए न भेजे जाने से हजारों मुकदमे अदालतों में अटके हैं। इनके निस्तारण में हो रहे विलंब की वजह पुलिस अधिकारियों की लापरवाही है। हाईकोर्ट ने बिसरा रिपोर्ट को लेकर की जा रही हीलाहवाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह सहित तमाम अधिकारियों को तलब किया है। इनको एक फरवरी को न्यायालय में उपस्थित होकर बिसरा रिपोर्ट से संबंधित पूरे प्रदेश का जिलेवार आंकड़ा प्रस्तुत करना है।
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सोनभद्र जिले में हत्या के एक मामले के आरोपी अनोज कुमार की जमानत पर सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष यह समस्या खड़ी हुई। जमानत पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने इस समस्या के विस्तृत स्वरूप को देखते हुए यह आदेश जारी किया।
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सोनभद्र में कुमारी पूनम की मृत्यु के मामले में अभियुक्त अनोज कुमार जेल में बंद है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया। उसके प्रार्थनापत्र पर विचार करते हुए न्यायालय ने पाया कि मृतक का पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों ने बिसरा सुरक्षित किया था। मगर 17 माह बीत जाने के बाद भी इसे रासायनिक जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा गया। जबकि इसे छह माह से अधिक नहीं रखा जाना चाहिए।
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कोर्ट ने सोनभद्र के सीएमओ और एएसपी को तलब किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में 215 बिसरा सुरक्षित किए थे जिनमें से मात्र 57 को जांच के लिए भेजा गया। कोर्ट ने कहा कि यह मात्र एक जिले का मामला नहीं है। पूरे प्रदेश में इस समस्या की वजह से मुकदमों का निस्तारण प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट समय से न पाने के कारण मुकदमे की सुनवाई टालनी पड़ती है और निस्तारण में अनावश्यक विलंब होता है। कोर्ट ने सोनभद्र के एसएसपी, सीएमओ और एएसपी को भी उपरोक्त तिथि पर उपस्थित होने का निर्देश दिया है।