{"_id":"69e4b89cea4ebceb8333a3fdc60ec1cc","slug":"terror-of-police-in-up","type":"story","status":"publish","title_hn":"EXCLUSIVE: हिंसा के बाद पुलिसिया दहशत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
EXCLUSIVE: हिंसा के बाद पुलिसिया दहशत
अमर उजाला, शामली
Updated Thu, 19 Sep 2013 11:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर हिंसा के कई दिन बाद सामान्य होते हालात के बीच बहावड़ी गांव की दुश्वारियां कम नहीं हुई।
विज्ञापन
गांव में हुई हिंसा के बाद लोग पुलिसिया दहशत में हैं। नौजवान छिपते घूम रहे हैं और बच्चों को उनके अभिभावक स्कूल भेजने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।
व्यापारी भी भय के माहौल में दुकान खोलने के बारे में नहीं सोच पा रहे। ऐसे में ग्रामीणों के अंदर अजीब सा डर पैदा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिसिया आहट होते ही घरों के दरवाजे बंद हो जाते हैं। कई ग्रामीणों ने कहा कि कुछ लोगों की गलती की सजा सबको क्यों मिल रही है।
बहावड़ी में दोपहर 12.30 बजे अमर उजाला टीम पहुंची। गांव में घुसते ही पड़ने वाले तिराहे पर बुजुर्गों की चौकड़ी बैठकर हुक्के गुड़गुड़ा रही थी। टीम आगे बढ़ी पर नजारा बदला हुआ था, जिन गलियों में लोग मकानों के बाहर चारपाई डालकर बैठे नजर आते थे, उन गलियों में सन्नाटा था।
विज्ञापन
बच्चे गली में खेलने की बजाय मकान के छज्जों पर खड़े होकर नीचे सूनी पड़ी गली को देखते हुए शायद हिंसा वाले दिन को कोस रहे थे।
गांव की धौलसरी पट्टी के निकट पुलिस की सायरन बजाती जीप की आवाज सुनते ही लोगों के मकान के दरवाजे धड़ाधड़ बंद होने शुरू हो गए। गली में मौजूद ग्रामीण इधर-उधर भागने लगे। काफी देर बाद लोगों ने डरते-डरते दरवाजे खोले।
विज्ञापन
बुजुर्ग महिला प्रेम ने बताया कि जो कुछ भी हुआ है, हमें भी दुख है। यह सब करने वाले कुछ ही लोग होंगे, पर इसकी सजा सबको क्यों दी जा रही है। पुलिस वालों की दबिश की डर से लोग न दुकान खोल रहे और न ही काम पर जा पा रहे हैं। 50 साल से कम के लोग तो इधर-उधर छिपते फिर रहे हैं। पता नहीं पुलिस कब किसको उठाकर ले जाए।
पड़ोस की बाला भी यहां आ गई। उसने कहा कि बच्चे डर के मारे स्कूल नहीं जा रहे। गांव के मास्टर धीर सिंह भी यहां पहुंच गए। उन्होंने बताया कि पुलिस के डर के मारे शामली से गांवों में चलने वाले जुगाड़ भी बंद हैं।
जिन्होंने बचाया, उन्हें ही फंसाया
बहावड़ी गांव में पहुंची टीम को देख लोगों ने अपनी पीड़ा सुनानी शुरू कर दी। गांव की अमरेश ने बताया कि हिंसा वाले दिन उनकी पट्टी धौलसरी में कोई हिंसा नहीं हुई। उनके देवर ने हिंसा वाले दिन चार मुस्लिम परिवारों की मोटरसाइकिलें सुरक्षित ढंग से अपने पास रखी। आरोप है कि फिर भी पुलिस लाइसेंस के नाम पर उनके देवर को उठाकर ले गई।
गांव की 80 साल की वृद्धा मेमकला ने बताया कि उसके मनोरोगी बेटे मिंटू को पुलिस घर की छत पर सोते हुए उठाकर ले गई। उसकी बीवी दो बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। अब घर में कोई मर्द भी नहीं है। शुक्रवार को पुलिस उनके घर आई, घर में बैठे उनके पति सुरेंद्र से गांव के लोकेंद्र का मकान पूछा। वह मकान बताने गए तो पुलिस उन्हें गाड़ी में बैठाकर ले गई।
अमरेश ने बताया कि पुलिस उनके घर आई और रायफल का लाइसेंस मंगाई। उन्होंने लाकर दे दिए तो दोनों के साथ पुलिस उनके पति को भी उठाकर ले गई। बाला ने बताया कि उनके परिवार से नौवीं पास सोनू को भी पुलिस उठाकर ले गई।
निर्दोष पर कार्रवाई नहीं होगी: एडीएम
एडीएम प्रताप सिंह भदौरिया ने कहा है कि कानून अपना काम करता रहेगा। हिंसा के मामले में जो नाम सामने आ रहे हैं, उन्हें पुलिस जरूर गिरफ्तार करेगी। पुलिस अधिकारियों से कहा गया है कि वह दर्ज मुकदमों में गहनता से जांच करें, किसी निर्दोष को न फंसाया जाए।