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Sultanpur News: गोमती में बढ़े प्रदूषण से दम तोड़ रहीं मछलियां
Fri, 06 Jun 2025 12:50 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Fri, 06 Jun 2025 12:50 AM IST
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गोमती नदी के सीताकुंड घाट पर मृत मछलियां (फाइल फोटो)।
सुल्तानपुर। प्रदूषण बढ़ने से गोमती नदी में जलीय जंतुओं के जीवन पर संकट मंडरा रहा है। दो दिनों में सैंकड़ों मछलियों की मौत हो गई। मत्स्य विभाग की जांच में पता चला है कि नदी के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई है, जिससे मछलियां मरने लगी हैंं। इसमें सुधार नहीं हुआ तो स्थिति भयावह हो सकती है।
सीताकुंड घाट पर मंगलवार को बड़ी संख्या में गोमती नदी में मृत मछलियां तट के किनारे मिलीं थी। बुधवार को भी करौंदीकला के अमिलिया घाट, सकरदे व शहाबुद्दीनपुर गांव के पास गोमती नदी के किनारे सैंकड़ों की संख्या में मृत मछलियां मिलीं थीं। मत्स्य विभाग की टीम ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रायबरेली की टीम से गोमती नदी के पानी की जांच कराई।
प्रथम दृष्टया जांच में पता चला कि नदी के पानी में घुली ऑक्सीजन की पानी में आॅक्सीजन की मात्रा कम हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक, नदी के पानी में घुली आक्सीजन पांच मिली ग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। इससे एक प्रतिशत भी ऑक्सीजन लेवल कम हुआ तो मछलियों की मौत हो जाएगी।
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इन स्थानों से आता है दूषित जल
नदी में कारखानों का रसायन युक्त पानी छोड़ा जाता है। शहर के छह बड़े नालों का पानी भी गोमती नदी में गिरता है। नालों पर बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की शोधन की क्षमता सीमित है, जबकि दूूषित जल का डिस्चार्ज अधिक हैं। केमिकल युक्त पानी से नदी के जल में आक्सीजन लेवल घट रहा है।
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सीताकुंड घाट पर मंगलवार को बड़ी संख्या में गोमती नदी में मृत मछलियां तट के किनारे मिलीं थी। बुधवार को भी करौंदीकला के अमिलिया घाट, सकरदे व शहाबुद्दीनपुर गांव के पास गोमती नदी के किनारे सैंकड़ों की संख्या में मृत मछलियां मिलीं थीं। मत्स्य विभाग की टीम ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रायबरेली की टीम से गोमती नदी के पानी की जांच कराई।
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प्रथम दृष्टया जांच में पता चला कि नदी के पानी में घुली ऑक्सीजन की पानी में आॅक्सीजन की मात्रा कम हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक, नदी के पानी में घुली आक्सीजन पांच मिली ग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। इससे एक प्रतिशत भी ऑक्सीजन लेवल कम हुआ तो मछलियों की मौत हो जाएगी।
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इन स्थानों से आता है दूषित जल
नदी में कारखानों का रसायन युक्त पानी छोड़ा जाता है। शहर के छह बड़े नालों का पानी भी गोमती नदी में गिरता है। नालों पर बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की शोधन की क्षमता सीमित है, जबकि दूूषित जल का डिस्चार्ज अधिक हैं। केमिकल युक्त पानी से नदी के जल में आक्सीजन लेवल घट रहा है।