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Sultanpur News: पढ़ाई अब कितना पढ़ाया कितना सीखा पर रहेगी केंद्रित
Wed, 19 Aug 2026 12:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 19 Aug 2026 12:11 AM IST
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सुल्तानपुर। जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सिर्फ हाजिरी और पाठ पूरा कराने से तय नहीं होगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने निपुण भारत मिशन के लक्ष्य हासिल करने की तैयारी की है। इसके लिए शिक्षण व्यवस्था को बच्चे की प्रगति पर केंद्रित किया जाएगा।
जिले के 2065 परिषदीय स्कूलों में करीब 1.85 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। नई व्यवस्था में शिक्षकों को नियमित अभ्यास पर ध्यान देना होगा। सीखने का आकलन, उपचारात्मक शिक्षण और मौलिक साक्षरता एवं संख्या ज्ञान महत्वपूर्ण होंगे। सीखने की निगरानी पर विशेष जोर दिया जाएगा। अब पढ़ाई का मुख्य ध्यान ''कितना पढ़ाया'' से ज्यादा '' कितना सीखा'' पर रहेगा। जिले के सभी 15 बीआरसी पर प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें पाठ योजना बनाने और गतिविधियों के जरिये पढ़ाने की जानकारी दी जा रही है। बच्चों के स्तर के अनुसार शिक्षण रणनीति बदलने पर भी जोर है।
हर बच्चे की कमजोरी होगी चिह्नित
प्रश्नोत्तरी, खेल और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की सीखने की स्थिति जांची जाएगी। कक्षा आधारित छोटे आकलन भी इसमें शामिल होंगे। इससे यह पता चलेगा कि कौन बच्चा पढ़ने, लिखने, समझने या गणितीय कौशल में कमजोर है। ऐसे कमजोर विद्यार्थियों को चिह्नित कर उनके लिए अलग से उपचारात्मक शिक्षण कराया जाएगा।
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गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर
नई व्यवस्था में बच्चों के दैनिक जीवन से जोड़कर पढ़ाया जाएगा। इससे भाषा और गणित जैसे बुनियादी विषयों को समझने में बच्चों को आसानी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी उपेंद्र गुप्ता ने बताया कि इन 10 मानकों का उद्देश्य बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति की लगातार निगरानी करना है। कमी सामने आते ही उसका समाधान करना भी इसका लक्ष्य है।
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जिले के 2065 परिषदीय स्कूलों में करीब 1.85 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। नई व्यवस्था में शिक्षकों को नियमित अभ्यास पर ध्यान देना होगा। सीखने का आकलन, उपचारात्मक शिक्षण और मौलिक साक्षरता एवं संख्या ज्ञान महत्वपूर्ण होंगे। सीखने की निगरानी पर विशेष जोर दिया जाएगा। अब पढ़ाई का मुख्य ध्यान ''कितना पढ़ाया'' से ज्यादा '' कितना सीखा'' पर रहेगा। जिले के सभी 15 बीआरसी पर प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें पाठ योजना बनाने और गतिविधियों के जरिये पढ़ाने की जानकारी दी जा रही है। बच्चों के स्तर के अनुसार शिक्षण रणनीति बदलने पर भी जोर है।
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हर बच्चे की कमजोरी होगी चिह्नित
प्रश्नोत्तरी, खेल और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की सीखने की स्थिति जांची जाएगी। कक्षा आधारित छोटे आकलन भी इसमें शामिल होंगे। इससे यह पता चलेगा कि कौन बच्चा पढ़ने, लिखने, समझने या गणितीय कौशल में कमजोर है। ऐसे कमजोर विद्यार्थियों को चिह्नित कर उनके लिए अलग से उपचारात्मक शिक्षण कराया जाएगा।
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गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर
नई व्यवस्था में बच्चों के दैनिक जीवन से जोड़कर पढ़ाया जाएगा। इससे भाषा और गणित जैसे बुनियादी विषयों को समझने में बच्चों को आसानी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी उपेंद्र गुप्ता ने बताया कि इन 10 मानकों का उद्देश्य बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति की लगातार निगरानी करना है। कमी सामने आते ही उसका समाधान करना भी इसका लक्ष्य है।