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Sultanpur News: रामायण सर्किट में शामिल हुआ धोपाप धाम
Thu, 18 Sep 2025 01:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 18 Sep 2025 01:02 AM IST
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धोपाप धाम पर स्थित राम जानकी मंदिर।
सुल्तानपुर। रामायण काल से जुड़ा गोमती नदी स्थित लंभुआ का धोपाप धाम रामायण सर्किट योजना में शामिल कर लिया गया है। योजना के अध्यक्ष डॉ. राम अवतार शर्मा ने सूची में धोपाप धाम को 246 वें स्थान पर रख लिया है। रामायण सर्किट से जुड़ने से धोपाप धाम पर धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाएंगी और यह धाम राष्ट्रीय फलक पर चमकेगा। विजेथुआ धाम 247वें नंबर पर है।
मान्यता है कि श्रीलंका में रावण वध के बाद अयोध्या वापसी के समय भगवान राम अपनी पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ गोमती नदी के धोपाप घाट पर रुक कर स्नान किया था। पूजा व हवन करके ब्रह्म हत्या से मुक्ति पाई थी। तब से ज्येष्ठ मास के गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालु यहां पहुंच कर गोमती नदी में स्नान करते आ रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से भगवान राम से जुड़े स्थलों को जोड़ने के लिए रामायण सर्किट बनाने की योजना लाने पर रामायण काल के स्थानों को जोड़ा जा रहा है।
विजेथुआ धाम को शामिल किए जाने के बाद उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री रवींद्र त्रिपाठी लगातार प्रयास कर रहे थे। प्रदेश महामंत्री ने लंभुआ के लोटिया निवासी व विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री दिनेश तिवारी को प्रस्ताव दिया था। बताया कि दिनेश तिवारी चार सितंबर को अयोध्या राम जन्मभूमि कारसेवक पुरम के प्रभारी उमेश पोरवाल को लेकर धोपाप पहुंचे थे। मौके से उन्होंने रामायण सर्किट के अध्यक्ष डॉ. राम अवतार शर्मा से बातचीत करके जरूरी कागजात उपलब्ध करा दिए। इसके बाद अध्यक्ष ने धोपाप तीर्थस्थल को रामायण सर्किट में शामिल कर दिया।
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रामायण सर्किट में धोपाप के शामिल होने से तीर्थस्थल का विकास होगा। योजना के मुताबिक स्मृति स्तंभ बनाए जाएंगे। एक वृहद ग्रंथ तैयार करके रामायण से जुड़ा धारावाहिक बनाया जाएगा। धोपाप को श्रीराम-जानकी व श्रीराम वनगमन मार्ग से जोड़ा जाएगा। मंदिरों का निर्माण व जीर्णोद्धार किया जाएगा। इससे पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
शासन से विभाग को नहीं मिली जानकारी
रामायण सर्किट योजना एक अलग संस्था है। रामायण काल से जुड़े स्थलों को महत्व के हिसाब से सर्किट के पदाधिकारी शामिल कर रहे हैं। अभी शासन की तरफ से कोई जानकारी पर्यटन विभाग को नहीं दिया गया है।-डॉ.धीरेंद्र यादव, प्रभारी पर्यटन अधिकारी
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मान्यता है कि श्रीलंका में रावण वध के बाद अयोध्या वापसी के समय भगवान राम अपनी पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ गोमती नदी के धोपाप घाट पर रुक कर स्नान किया था। पूजा व हवन करके ब्रह्म हत्या से मुक्ति पाई थी। तब से ज्येष्ठ मास के गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालु यहां पहुंच कर गोमती नदी में स्नान करते आ रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से भगवान राम से जुड़े स्थलों को जोड़ने के लिए रामायण सर्किट बनाने की योजना लाने पर रामायण काल के स्थानों को जोड़ा जा रहा है।
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विजेथुआ धाम को शामिल किए जाने के बाद उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री रवींद्र त्रिपाठी लगातार प्रयास कर रहे थे। प्रदेश महामंत्री ने लंभुआ के लोटिया निवासी व विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री दिनेश तिवारी को प्रस्ताव दिया था। बताया कि दिनेश तिवारी चार सितंबर को अयोध्या राम जन्मभूमि कारसेवक पुरम के प्रभारी उमेश पोरवाल को लेकर धोपाप पहुंचे थे। मौके से उन्होंने रामायण सर्किट के अध्यक्ष डॉ. राम अवतार शर्मा से बातचीत करके जरूरी कागजात उपलब्ध करा दिए। इसके बाद अध्यक्ष ने धोपाप तीर्थस्थल को रामायण सर्किट में शामिल कर दिया।
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रामायण सर्किट में धोपाप के शामिल होने से तीर्थस्थल का विकास होगा। योजना के मुताबिक स्मृति स्तंभ बनाए जाएंगे। एक वृहद ग्रंथ तैयार करके रामायण से जुड़ा धारावाहिक बनाया जाएगा। धोपाप को श्रीराम-जानकी व श्रीराम वनगमन मार्ग से जोड़ा जाएगा। मंदिरों का निर्माण व जीर्णोद्धार किया जाएगा। इससे पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।
शासन से विभाग को नहीं मिली जानकारी
रामायण सर्किट योजना एक अलग संस्था है। रामायण काल से जुड़े स्थलों को महत्व के हिसाब से सर्किट के पदाधिकारी शामिल कर रहे हैं। अभी शासन की तरफ से कोई जानकारी पर्यटन विभाग को नहीं दिया गया है।-डॉ.धीरेंद्र यादव, प्रभारी पर्यटन अधिकारी