{"_id":"5cfea2d6bdec22073b654717","slug":"15601916946-sultanpur-news35","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओपीडी से नदारद रहे चिकित्सक, फर्श पर कराहते मिले मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओपीडी से नदारद रहे चिकित्सक, फर्श पर कराहते मिले मरीज
विज्ञापन
डॉक्टर नदारद, फर्श पर कराहते मिले मरीज
सुल्तानपुर। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी से जहां लोगों को जीना दुश्वार हो रहा है, वहीं बीमारी की चपेट में आकर जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की हालत बदतर है।
अमर उजाला ने सोमवार को दोपहर 12 बजे से लेकर दो बजे तक जिला अस्पताल के न्यू इमरजेंसी विंग समेत ओपीडी की व्यवस्था का मुआयना किया तो हालात बेहद खराब मिले।
मरीजों को चबूतरे पर भर्ती कर जहां उपचार हो रहा था वहीं ओपीडी समेत न्यू इमरजेंसी विंग से चिकित्सक ड्यूटी से नदारद मिले। दूर दराज से पहुंचे तीमारदार अपने मरीजों को लेकर चिकित्सक की बाट जोहते रहे।
विज्ञापन
भीषण गर्मी से लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक रोजाना पेट दर्द और तेज बुखार से पीड़ित होकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में ज्यादा संख्या बच्चों की है। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में बेड खचाखच भरे हैं। जिला अस्पताल के ओपीडी के कक्ष संख्या पांच से चिकित्सक डॉ. एएन गुप्ता और कक्ष संख्या एक से फिजीशियन डॉ. एके सेंगर और ओपीडी से बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश ड्यूटी से गायब मिले।
डॉ. दिनेश को दिखाने के लिए लंभुआ के बड़ागांव की रहने वाली हीरावती अपने बेटे देव को लेकर पहुंची थीं। हीरावती ने बताया कि वह दो घंटे से बैठी हैं, लेकिन अभी तक चिकित्सक नहीं पहुंचे।
डॉ. दिनेश को ही दिखाने के लिए कटका की रहने वाली गुड़िया अपनी बेटी अंजली को लेकर पहुंची थी। उसे भी निराशा ही हाथ लगी। कक्ष संख्या 14 में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भार्गेव भी ड्यूटी से गायब मिले।
सबसे खराब स्थित पैथोलॉजी सेंटर की मिली। पैथोलॉजी सेंटर से फार्मासिस्ट ही गायब मिला। इमरजेंसी विंग में 24 घंटे उपचार मिलने का दावा भी खोखला साबित हुआ।
सोमवार की दोपहर दुर्घटना में घायल लोग दर्द से कराहते रहे, लेकिन न्यू इमरेंजी विंग में तैनात चिकित्सक डॉ. मनीष गायब मिले। दूसरी तरफ चिकित्सक डॉ. एससी गुप्ता अपने ओपीडी के कक्ष संख्या छह में मरीजों को देखते मिले। डॉ. सीएल रस्तोगी भी कक्ष संख्या नौ में मरीजों को देखकर उन्हें दवाएं लिखते हुए देखे गए।
जिला अस्पताल में शनिवार को चिकित्कों ने ओपीडी में 1800 मरीजों को देखा। इनमें ज्यादा संख्या बच्चों व महिलाओं की थी। चिकित्सकों की मानें तो अधिकतर लोग ग्रामीण अंचल से पहुंचे थे।
जिन मरीजों का इलाज किया गया, इनमें डायरिया और बुखार से पी ड़ित मरीज शामिल थे। कई मरीजों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें भर्ती किया गया है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि ओपीडी में चिकित्सकों को हर हाल में बैठने का निर्देश दिया गया है। ओपीडी से चिकित्सकों के नदारद रहने की शिकायतें मिली हैं। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. एससी गुप्ता ने बताया कि गर्मी के सीजन में बचाव ही बेहतर उपाय है। गर्मी में सिर पर गमछा या फिर टोपी पहनकर बाहर निकलें।
नींबू पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं। मोटा कपड़ा पहनें, जिससे हाथ पूरी तरह से ढका हो। वायरल फीवर होने पर मरीज को तत्काल चिकित्सक को दिखाएं।
विज्ञापन
सुल्तानपुर। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी से जहां लोगों को जीना दुश्वार हो रहा है, वहीं बीमारी की चपेट में आकर जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की हालत बदतर है।
अमर उजाला ने सोमवार को दोपहर 12 बजे से लेकर दो बजे तक जिला अस्पताल के न्यू इमरजेंसी विंग समेत ओपीडी की व्यवस्था का मुआयना किया तो हालात बेहद खराब मिले।
विज्ञापन
मरीजों को चबूतरे पर भर्ती कर जहां उपचार हो रहा था वहीं ओपीडी समेत न्यू इमरजेंसी विंग से चिकित्सक ड्यूटी से नदारद मिले। दूर दराज से पहुंचे तीमारदार अपने मरीजों को लेकर चिकित्सक की बाट जोहते रहे।
विज्ञापन
भीषण गर्मी से लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक रोजाना पेट दर्द और तेज बुखार से पीड़ित होकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में ज्यादा संख्या बच्चों की है। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में बेड खचाखच भरे हैं। जिला अस्पताल के ओपीडी के कक्ष संख्या पांच से चिकित्सक डॉ. एएन गुप्ता और कक्ष संख्या एक से फिजीशियन डॉ. एके सेंगर और ओपीडी से बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश ड्यूटी से गायब मिले।
डॉ. दिनेश को दिखाने के लिए लंभुआ के बड़ागांव की रहने वाली हीरावती अपने बेटे देव को लेकर पहुंची थीं। हीरावती ने बताया कि वह दो घंटे से बैठी हैं, लेकिन अभी तक चिकित्सक नहीं पहुंचे।
डॉ. दिनेश को ही दिखाने के लिए कटका की रहने वाली गुड़िया अपनी बेटी अंजली को लेकर पहुंची थी। उसे भी निराशा ही हाथ लगी। कक्ष संख्या 14 में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भार्गेव भी ड्यूटी से गायब मिले।
सबसे खराब स्थित पैथोलॉजी सेंटर की मिली। पैथोलॉजी सेंटर से फार्मासिस्ट ही गायब मिला। इमरजेंसी विंग में 24 घंटे उपचार मिलने का दावा भी खोखला साबित हुआ।
सोमवार की दोपहर दुर्घटना में घायल लोग दर्द से कराहते रहे, लेकिन न्यू इमरेंजी विंग में तैनात चिकित्सक डॉ. मनीष गायब मिले। दूसरी तरफ चिकित्सक डॉ. एससी गुप्ता अपने ओपीडी के कक्ष संख्या छह में मरीजों को देखते मिले। डॉ. सीएल रस्तोगी भी कक्ष संख्या नौ में मरीजों को देखकर उन्हें दवाएं लिखते हुए देखे गए।
जिला अस्पताल में शनिवार को चिकित्कों ने ओपीडी में 1800 मरीजों को देखा। इनमें ज्यादा संख्या बच्चों व महिलाओं की थी। चिकित्सकों की मानें तो अधिकतर लोग ग्रामीण अंचल से पहुंचे थे।
जिन मरीजों का इलाज किया गया, इनमें डायरिया और बुखार से पी ड़ित मरीज शामिल थे। कई मरीजों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें भर्ती किया गया है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि ओपीडी में चिकित्सकों को हर हाल में बैठने का निर्देश दिया गया है। ओपीडी से चिकित्सकों के नदारद रहने की शिकायतें मिली हैं। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. एससी गुप्ता ने बताया कि गर्मी के सीजन में बचाव ही बेहतर उपाय है। गर्मी में सिर पर गमछा या फिर टोपी पहनकर बाहर निकलें।
नींबू पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं। मोटा कपड़ा पहनें, जिससे हाथ पूरी तरह से ढका हो। वायरल फीवर होने पर मरीज को तत्काल चिकित्सक को दिखाएं।