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कोर्ट ने पलटा डीएम का आदेश, आढ़ती को मिलेंगे 1,15,000 रुपये
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आढ़ती को दिलाएं पैसा, नहीं तो सरकार से होगी वसूली
सुल्तानपुर। कालाबाजारी के आरेाप में 14 वर्ष पूर्व आढ़ती का गेहूं पकड़कर जब्त करने के मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। एडीजे मनोज कुमार शुक्ल ने डीएम का आदेश पलटते हुए आढ़ती का गेहूं जब्त कर बीपीएल कार्डधारकों को बांटने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह आढ़ती को जब्त किए गए 148 क्विंटल गेहूं का 775 रुपये प्रति क्विंटल की दर से एक लाख 15 हजार रुपये छह फीसदी ब्याज के साथ एक माह के अंदर भुगतान करे। एक माह के अंदर भुगतान नहीं करने पर राज्य सरकार से वसूली होगी। मामला चांदा थाने से जुड़ा है।
जिले के कादीपुर कस्बा निवासी व्यापारी ओम प्रकाश व उनके पुत्र विकास कुमार रजिस्टर्ड आढ़ती हैं। दोनों व्यापारी किसानों से गेहूं, चावल व अन्य सामनों की खरीदारी कर बिक्री करने का कारोबार करते हैं।
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चार अप्रैल 2005 को आढ़ती ओम प्रकाश व विकास कुमार अमहट मंडी से 148 गेहूं लेकर चंदौली में स्थित आटा मिल पर बेचने जा रहे थे। रास्ते में चांदा थाने की पुलिस ने कालाबाजारी की आशंका में वाहन को पकड़कर गेहूं को कब्जे में ले लिया था।
पुलिस ने इसकी सूचना पूर्ति विभाग को दी थी। व्यापारी ने पकड़े गए गेहूं का सभी वैध अभिलेख दिखाया, लेकिन पुलिस व पूर्ति विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी।
मामला जिलाधिकारी के पास पहुंचा तो वहां भी व्यापारी पिता-पुत्र की बातों की अनदेखी की गई। व्यापारी के अधिवक्ता यादवेंद्र सिंह ने बताया कि तत्कालीन डीएम आरके सिंह ने आठ मई 2009 को 148 क्विंटल गेहूं को जब्तकर पूर्ति विभाग को आदेश दिया था कि उसे बीपीएल कार्डधारकों को वितरित कर दिया जाए।
डीएम के आदेश पर पूर्ति विभाग ने गेहूं को कार्डधारकों में बंटवा दिया था। डीएम के आदेश को व्यापारी ने कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने व्यापारी, पूर्ति विभाग व राज्य का सरकार का पक्ष सुनने के बाद गेहूं जब्त करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
एडीजे मनोज कुमार शुक्ल ने डीएम का आदेश पलटते हुए पीड़ित व्यापारी के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह आढ़ती को जब्त किए गए 148 क्विंटल गेहूं का 775 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 1,15,000 रुपये छह फीसदी ब्याज के साथ एक माह के अंदर भुगतान करें। एक माह के अंदर भुगतान नहीं करने पर राज्य सरकार से वसूली होगी।
आढ़ती के जब्त किए गए 148 क्विंटल गेहूं के मूल्य को लेकर कोर्ट में पक्षों ने दांवपेंच चली थी। आढ़ती ने एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की रेट से गेहूं का मूल्य दिलाए जाने की मांग की।
पूर्ति विभाग की ओर से छह सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का मूल्य 66,495 रुपये जमा करा दिया गया। इसे आढ़ती ने लेने से इंकार दिया था। कोर्ट ने 775 रुपये प्रति क्विेंटल की दर से पेंमेट करने का आदेश दिया है।
आढ़ती का कारोबार करने वाले व्यापारी पिता-पुत्र को कोर्ट से न्याय पाने में 14 साल गुजारने पड़े। 14 साल तक पीड़ित को न्याय पाने के लिए कोर्ट का चक्कर काटना पड़ा।
पीड़ित व्यापारी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता यादवेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस, पूर्ति विभाग और डीएम की मनमानी कार्रवाई से आढ़ती के व्यापार पर असर पड़ा है। रजिस्टर्ड आढ़ती होने के बावजूद किसानों से खरीदे गए गेंहू को कालाबाजारी के आरोप में मनमानी ढंग से जब्त कर लिया गया था।
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सुल्तानपुर। कालाबाजारी के आरेाप में 14 वर्ष पूर्व आढ़ती का गेहूं पकड़कर जब्त करने के मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। एडीजे मनोज कुमार शुक्ल ने डीएम का आदेश पलटते हुए आढ़ती का गेहूं जब्त कर बीपीएल कार्डधारकों को बांटने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह आढ़ती को जब्त किए गए 148 क्विंटल गेहूं का 775 रुपये प्रति क्विंटल की दर से एक लाख 15 हजार रुपये छह फीसदी ब्याज के साथ एक माह के अंदर भुगतान करे। एक माह के अंदर भुगतान नहीं करने पर राज्य सरकार से वसूली होगी। मामला चांदा थाने से जुड़ा है।
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जिले के कादीपुर कस्बा निवासी व्यापारी ओम प्रकाश व उनके पुत्र विकास कुमार रजिस्टर्ड आढ़ती हैं। दोनों व्यापारी किसानों से गेहूं, चावल व अन्य सामनों की खरीदारी कर बिक्री करने का कारोबार करते हैं।
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चार अप्रैल 2005 को आढ़ती ओम प्रकाश व विकास कुमार अमहट मंडी से 148 गेहूं लेकर चंदौली में स्थित आटा मिल पर बेचने जा रहे थे। रास्ते में चांदा थाने की पुलिस ने कालाबाजारी की आशंका में वाहन को पकड़कर गेहूं को कब्जे में ले लिया था।
पुलिस ने इसकी सूचना पूर्ति विभाग को दी थी। व्यापारी ने पकड़े गए गेहूं का सभी वैध अभिलेख दिखाया, लेकिन पुलिस व पूर्ति विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी।
मामला जिलाधिकारी के पास पहुंचा तो वहां भी व्यापारी पिता-पुत्र की बातों की अनदेखी की गई। व्यापारी के अधिवक्ता यादवेंद्र सिंह ने बताया कि तत्कालीन डीएम आरके सिंह ने आठ मई 2009 को 148 क्विंटल गेहूं को जब्तकर पूर्ति विभाग को आदेश दिया था कि उसे बीपीएल कार्डधारकों को वितरित कर दिया जाए।
डीएम के आदेश पर पूर्ति विभाग ने गेहूं को कार्डधारकों में बंटवा दिया था। डीएम के आदेश को व्यापारी ने कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने व्यापारी, पूर्ति विभाग व राज्य का सरकार का पक्ष सुनने के बाद गेहूं जब्त करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
एडीजे मनोज कुमार शुक्ल ने डीएम का आदेश पलटते हुए पीड़ित व्यापारी के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह आढ़ती को जब्त किए गए 148 क्विंटल गेहूं का 775 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 1,15,000 रुपये छह फीसदी ब्याज के साथ एक माह के अंदर भुगतान करें। एक माह के अंदर भुगतान नहीं करने पर राज्य सरकार से वसूली होगी।
आढ़ती के जब्त किए गए 148 क्विंटल गेहूं के मूल्य को लेकर कोर्ट में पक्षों ने दांवपेंच चली थी। आढ़ती ने एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की रेट से गेहूं का मूल्य दिलाए जाने की मांग की।
पूर्ति विभाग की ओर से छह सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का मूल्य 66,495 रुपये जमा करा दिया गया। इसे आढ़ती ने लेने से इंकार दिया था। कोर्ट ने 775 रुपये प्रति क्विेंटल की दर से पेंमेट करने का आदेश दिया है।
आढ़ती का कारोबार करने वाले व्यापारी पिता-पुत्र को कोर्ट से न्याय पाने में 14 साल गुजारने पड़े। 14 साल तक पीड़ित को न्याय पाने के लिए कोर्ट का चक्कर काटना पड़ा।
पीड़ित व्यापारी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता यादवेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस, पूर्ति विभाग और डीएम की मनमानी कार्रवाई से आढ़ती के व्यापार पर असर पड़ा है। रजिस्टर्ड आढ़ती होने के बावजूद किसानों से खरीदे गए गेंहू को कालाबाजारी के आरोप में मनमानी ढंग से जब्त कर लिया गया था।