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यूपी: छात्र ने फेसबुक पर कहा 'अलविदा' और दे दी जान

Thu, 11 Jul 2013 08:07 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Thu, 11 Jul 2013 08:07 PM IST
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suicide by student in up

जीवन में तमाम उतार चढ़ाव आते रहते हैं। इनसे लड़ते हुए बढ़ते जाना ही जिंदगी है लेकिन वर्तमान में युवा जरा-जरा सी बात पर हताश होकर खुदकुशी तक कर रहे हैं।

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ऐसे ही एक मामले में गाजीपुर क्षेत्र निवासी एक छात्र ने बीए में कम नंबर आने पर ने फांसी लगाकर जान दे दी। फेसबुक पर बृहस्पतिवार सुबह चार बजे पोस्ट उसका मैसेज पढ़ने के बाद कमरे पर पहुंचे दोस्त को वह फंदे पर लटका मिला।
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सूचना पर परिवार के लोग और पुलिस मौके पर पहुंची। तलाशी में कमरे से मिले सुसाइड नोट में उसने मां-बाप की कसौटी पर खरा न उतरने के चलते जान देने की बात कही है।
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लखीमपुर के फूलबेहड़ निवासी राकेश गुप्ता का मंझला बेटा सौरभ (20) लखनऊ विवि से बीए कर रहा था। पिछले दो माह से सौरभ शक्तिनगर इलाके में किराए के मकान पर रहता था।

भाई गौरव ने बताया कि सुबह करीब ग्यारह बजे सौरभ के एक दोस्त ने फोन पर पूरी जानकारी दी। सुबह चार बजे सौरभ ने फेसबुक पर पोस्ट मैसेज में लिखा था कि ‘गुड मार्निंग, आज मेरी जिंदगी का सफर खत्म हो रहा है। मैं सबको मिस करूंगा। आप सब प्रार्थना करना कि किसी दूसरे के साथ ऐसा न हो, अलविदा।’

इस मैसेज को करीब नौ बजे पढ़ने के बाद सकते में आए दोस्त ने फोन मिलाया, लेकिन कॉल नहीं लगी। काफी कोशिश के बावजूद परिवार के लोगों से भी बात नहीं हो सकी।

इसके बाद वह सीधे शक्तिनगर स्थित उसके कमरे पर पहुंचा। जोर से धक्का देने पर दरवाजा खुल गया। अंदर सौरभ रस्सी के सहारे पंखे से लटका हुआ था।

दोस्त से जानकारी मिलते ही परिवार के लोग व पुलिस मौके पर पहुंच गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ ही कमरे की तलाशी ली गई।

पुलिस को मिले सुसाइड नोट में उसने लिखा था कि ‘मैं आपकी सोच के मुताबिक खरा नहीं उतर पा रहा हूं। मेरे किसी दोस्त को परेशान न किया जाए और न ही मेरी बॉडी का पोस्टमार्टम किया जाए’।


परिवार के लोगों ने बताया कि दो-तीन पहले ही सौरभ का बीए द्वितीय वर्ष का रिजल्ट आया था। नंबर कम आने की वजह से वह डिप्रेशन में था।

उधर, जवान बेटे की मौत की खबर मिलते ही मां बेसुध हो गई। भाई वैभव व गौरव नम आंखों उसे संभालने की कोशिश कर रहे थे।

मर्चेंट नेवी में जाने का था सपना
गौरव ने बताया कि उसके भाई का सपना मर्चेंट नेवी में जाने का सपना था। इसके लिए सौरभ काफी मेहनत भी कर रहा था। मिलनसार स्वभाव के चलते वह सबका दुलारा था। ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्च निकालने के साथ ही वह एनसीसी कैडेट भी था। बीए में नंबर कम आने के चलते उसे अपना सपना टूटता दिखा, जिसके चलते डिप्रेशन में आकर उसने जान दे दी।

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