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2000 बसें थमने से यात्रियों पर बरसी आफत
लखनऊ/नरेश्ा श्ार्मा
Updated Tue, 25 Jun 2013 07:11 PM IST
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परिवहन निगम के चार कर्मचारी संगठनों के तत्वावधान में सोमवर रात 12 बजे से शुरू हुए कार्य बहिष्कार के कारण प्रदेश भर में 20 फीसदी बस संचालन ठप हुआ।
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राजधानी समेत कई जिलों के लोगों ने झेली दिक्कत
इस हड़ताल का असर न सिर्फ राजधानी बल्कि कानपुर, फैजाबाद और इलाहाबाद जैसे कई दूसरे जिलों के लोगों पर भी देखने को मिला। लखनऊ और इलाहाबाद की सिटी बस सेवा पूरी तरह ध्वस्त रही। निगम के बेड़े में कुल 9000 बसों में से 1900 से 2000 बसों का संचालन नहीं हो सका।
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टकराव भी हुआ
फैजाबाद एवं कानपुर में संचालन को लेकर आंदोलनरत ड्राइवर एवं कंडक्टर और प्रबंधन के बीच टकराव भी हुआ। लखनऊ में कुल 120 सिटी बस में से महज 30 सिटी का बस संचालन हुआ। वहीं इलाहाबाद में तो एक भी बस नहीं चल सकी। लखनऊ में पीआरडी के कंडक्टरों को सेवा से हटाने के लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है।
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निकालने की कार्रवाई हुई तेज
प्रदेश भर में क्षेत्रीय प्रबंधकों के द्वारा कार्य बहिष्कार करने वाले संविदा ड्राइवरों एवं कंडक्टरों को नौकरी से निकालने की कार्रवाई तेज कर दी गई है और अब तक 108 संविदाकर्मियों को नौकरी से निकाल भी दिया गया है। परिवहन निगम के प्रबंधन पार्थ सारथी सेन शर्मा का दावा है कि कार्य बहिष्कार के कारण महज 5 फीसदी संचालन ठप हुआ है। प्रदेश भर में 95 बसें चली हैं।
प्रबंध निदेशक ने कार्य बहिष्कार पर गए संविदा कर्मियों से वापस आने की अपील करते हुए कहा कि वह संकट की घड़ी में निगम का साथ दें। बीते हफ्ते की पारिश्रमिक में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं नियमित कर्मियों की बकाया महंगाई भत्ते की किश्त का 7 फीसदी भुगतान किया जा चुका है इसलिए कार्य बहिष्कार करना उचित नहीं है।