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Sonebhadra News: तेजी से घट रहा रिहंद जलाशय का जलस्तर, न्यूनतम से बस 2.6 फीट अधिक
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अनपरा। भीषण गर्मी का असर रिहंद जलाशय पर दिखने लगा है। जलाशय में अब 837.6 फीट ही पानी शेष बचा है, जो न्यूनतम स्तर से मात्र ढाई फीट ही ऊपर है। तेजी से घट रहे जलस्तर का असर पेयजल एवं विद्युत परियोजनाओं पर पड़ सकता है।रिहंद जलाशय एशिया के विशालतम जलाशयों में से एक है। यूपी-एमपी की दर्जनभर से अधिक ताप विद्युत परियोजनाएं, इस पर आधारित हैं। ताप विद्युत गृहों की चिमनियों को ठंडा करने के लिए रिहंद जलाशय से भारी मात्रा में सभी परियोजनाएं पानी लेतीं हैं। इसके साथ ही हाल ही में सरकार के हर घर नल योजना के तहत कई पेयजल परियोजनाओं के संचालन के लिए रिहंद से ही पानी लिया जा रहा है।
इसके चलते रिहंद जलाशय का जलस्तर तेजी से घट रहा है। रविवार को रिहंद जलाशय का जलस्तर 837.6 फीट दर्ज किया, जो न्यूनतम जलस्तर से मात्र 2.6 फीट ही अधिक है। पूर्व में न्यूनतम जलस्तर 830 फीट पर था, लेकिन बिजली परियोजनाओं से निकलने वाली राख के कारण रिहंद कैचमेंट क्षेत्र में कमी से इसे 835 फीट पर कर दिया गया।
मानसून ने दस्तक जरूर दे दी है, लेकिन अभी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। रिहंद जलाशय के पानी का मुख्य स्रोत छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश है, लेकिन वहां मानसून अभी पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है। हल्की बारिश से लोगों को राहत जरूर मिल रही है, लेकिन जब तक झमाझम बारिश नहीं होगी रिंहद का जलस्तर नहीं बढ़ेगा।
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फिलहाल जल विद्युत संयंत्रों से उत्पादन बंद कर दिया गया है। अगर जल्द ही बारिश का पानी रिहंद जलाशय में नही पहुंचा तो ताप विद्युत गृहों को पानी सप्लाई आधी करनी पड़ेगी, जिससे थर्मल बैकिंग भी लग सकती है। साथ ही पेयजल परियोजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
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इसके चलते रिहंद जलाशय का जलस्तर तेजी से घट रहा है। रविवार को रिहंद जलाशय का जलस्तर 837.6 फीट दर्ज किया, जो न्यूनतम जलस्तर से मात्र 2.6 फीट ही अधिक है। पूर्व में न्यूनतम जलस्तर 830 फीट पर था, लेकिन बिजली परियोजनाओं से निकलने वाली राख के कारण रिहंद कैचमेंट क्षेत्र में कमी से इसे 835 फीट पर कर दिया गया।
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मानसून ने दस्तक जरूर दे दी है, लेकिन अभी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। रिहंद जलाशय के पानी का मुख्य स्रोत छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश है, लेकिन वहां मानसून अभी पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है। हल्की बारिश से लोगों को राहत जरूर मिल रही है, लेकिन जब तक झमाझम बारिश नहीं होगी रिंहद का जलस्तर नहीं बढ़ेगा।
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फिलहाल जल विद्युत संयंत्रों से उत्पादन बंद कर दिया गया है। अगर जल्द ही बारिश का पानी रिहंद जलाशय में नही पहुंचा तो ताप विद्युत गृहों को पानी सप्लाई आधी करनी पड़ेगी, जिससे थर्मल बैकिंग भी लग सकती है। साथ ही पेयजल परियोजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।