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अनपरा की दूसरी इकाई से शुरू हुआ उत्पादन
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Fri, 01 Apr 2016 10:31 PM IST
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नए वित्तीय वर्ष का पहला दिन ऊर्जा जगत के लिए राहत भरा रहा। अनुरक्षण कार्य के चलते मार्च 2012 से बंद पड़ी दो सौ मेगावाट वाली 10वीं इकाई जहां गुरुवार की देर शाम सिंक्रोनाइज (उत्पादन) कर ली गई। वहीं तीन दिन पूर्व तकनीकी कारणों से बंद हुई अनपरा डी की पांच सौ मेगावाट वाली दूसरी इकाई को गुरुवार रात दो बजकर दस मिनट पर उत्पादन पर ले लिया गया। दोनों इकाइयों से फिलहाल पांच सौ मेगावाट के करीब अतिरिक्त बिजली प्रदेश को मिलनी शुरू हो गई है। तपिश के मद्देनजर इसे बड़ा राहत माना जा रहा है।
ओबरा परियोजना की दो सौ मेगावाट वाली पांचों इकाइयों का एक-एक कर वृहद अनुरक्षण कार्य किया जाना है। इसी क्रम में दसवीं इकाई को मार्च 2012 में उत्पादन से अलग कर भेल को अनुरक्षण कार्य के लिए दे दिया गया था। उस समय छह माह के भीतर इकाई का अनुरक्षण कार्य पूरा होने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन कार्य पूर्ण होते होते करीब चार वर्ष गुजर गए और आखिरकार गुरुवार की देर शाम से इस इकाई को उत्पादन पर ले लिया गया।
महाप्रबंधक ब इं. डीके मिश्रा ने भी इकाई को उत्पादन पर आने की पुष्टि की। उधर, अनपरा में तीन दिन पूर्व एसी सिस्टम में आई तकनीकी दिक्कत को दूर करने और अनपरा डी-बी पारेषण लाइन को चार्ज करने के लिए बंद की गई अनपरा डी की पांच सौ मेगावाट वाली दूसरी इकाई को गुरुवार को अर्धरात्रि के बाद उत्पादन पर ले लिया गया। सीजीएम इं. त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि इकाई का सफलतापूर्वक संचालन जारी है। शुक्रवार शाम तक इस इकाई से तीन से साढ़े तीन सौ मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही थी।
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ओबरा परियोजना की दो सौ मेगावाट वाली पांचों इकाइयों का एक-एक कर वृहद अनुरक्षण कार्य किया जाना है। इसी क्रम में दसवीं इकाई को मार्च 2012 में उत्पादन से अलग कर भेल को अनुरक्षण कार्य के लिए दे दिया गया था। उस समय छह माह के भीतर इकाई का अनुरक्षण कार्य पूरा होने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन कार्य पूर्ण होते होते करीब चार वर्ष गुजर गए और आखिरकार गुरुवार की देर शाम से इस इकाई को उत्पादन पर ले लिया गया।
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महाप्रबंधक ब इं. डीके मिश्रा ने भी इकाई को उत्पादन पर आने की पुष्टि की। उधर, अनपरा में तीन दिन पूर्व एसी सिस्टम में आई तकनीकी दिक्कत को दूर करने और अनपरा डी-बी पारेषण लाइन को चार्ज करने के लिए बंद की गई अनपरा डी की पांच सौ मेगावाट वाली दूसरी इकाई को गुरुवार को अर्धरात्रि के बाद उत्पादन पर ले लिया गया। सीजीएम इं. त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि इकाई का सफलतापूर्वक संचालन जारी है। शुक्रवार शाम तक इस इकाई से तीन से साढ़े तीन सौ मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही थी।
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