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अगोरी किले को अब संरक्षण की दरकार

Sun, 26 Jun 2016 11:48 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ सोनभद्र
ब्यूरो, अमर उजाला/ सोनभद्र Updated Sun, 26 Jun 2016 11:48 PM IST
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The fort is now in desperate need of protection agori
अगोरी किला
ब्लॉक क्षेत्र के अगोरी गांव में सोन, रेणु और विजुल नदियों से घिरा अगोरी किला उपेक्षा का शिकार है। किले के पास बाबा सोमनाथ का मंदिर है, जहां शिवरात्रि और वसंत पंचमी पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। लोरिकायन की लोक कथा भी इस किले से जुड़ी है। इसके बावजूद इसके संरक्षण और संवर्धन पर न तो पर्यटन और न ही पुरातत्व विभाग ध्यान दे रहा है। किले को उपेक्षित किये जाना लोगों को नागवार गुुजर रहा है।
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अगोरी गांव में करीब दो सौ मीटर ऊपर पहाड़ी पर अगोरी किले का निर्माण खरवार वंश के शासक राजा बालेंदु शाह ने कराया था। लोककथा के मुताबिक खरवार वंश के एक शासक की पुत्री मंजरी से वीर लोरिक का प्रेम हो गया था। उसे हासिल करने के लिए लोरिक का शासक आल्हा-उदल से युद्घ हुआ था। वीर लोरिक ने ही मारकुंडी में स्थित पहाड़ को अपने तलवार से एक वार में काट के दो टुकड़ों में कर दिया था। पत्थर के इन टुकड़ों को देखा जा सकता है।
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  खरवार के बाद में चंदेल वंश के शासकों ने इस किले पर आधिपत्य जमा लिया था। इस ऐतिहासिक किले को लेकर अब तक उपेक्षा बरती जा रही है। इसकी दीवारें ढहने लगी हैं। उनके संरक्षण की जरूरत है। किले के पास बाबा सोमनाथ का मंदिर है, जहां प्राचीन मूर्तियां हैं। लोग दर्शन पूजन और पर्यटन के लिए यहां आते हैं। अगर सरकार इस पर ध्यान दे तो यह किला एक पर्यटन केंद्र बन सकता है। किले के संरक्षण के लिए कुछ नहीं किया गया। इस किले की दीवारें ढह रही हैं।
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अभी भी इस किले में कई कमरे सुरक्षित हैं जहां बाहर के हिस्से में ही लोग आकर रूकते हैं। अंदर के कमरों में किसी के जाने की हिम्मत नहीं होती है। किले को पूरी तरह से कोई व्यक्ति नहीं घूम सका है। इसी किले के भीतर से ऐसे रास्ता है, जिससे राजा और रानी सोन नदी में स्नान करने जाते थे।

 
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