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Sonebhadra News: दसवीं के छात्र ने फंदा लगाकर दी जान

Tue, 13 Feb 2024 11:16 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 13 Feb 2024 11:16 PM IST
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Tenth class student committed suicide by hanging
रेणुकूट। स्थानीय पुलिस चौकी क्षेत्र के हिंडाल्को कॉलोनी आवासीय परिसर में सोमवार की रात दसवीं के छात्र ने फंदा लगाकर जान दे दी। कमरे में पंखे के सहारे उसका शव फंदे से लटकता मिला।
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घटना के वक्त मां बगल के कमरे में खाना बना रही थी। परिजनों के मुताबिक छात्र पढ़ने में काफी होनहार था। एक दिन पहले ही उसे प्री बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक पाने पर स्कूल में पुरस्कृत भी किया गया था। छात्र की आत्महत्या के कारणों की छानबीन में पुलिस जुट गई है।
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बिहार के आरा निवासी दिलीप सिंह यहां हिंडाल्को की आवासीय कॉलोनी में रहते हैं। उनका छोटा पुत्र आर्यन (15) नगर के केसरी देवी कनोडिया विद्या मंदिर में 10वीं का छात्र था। परिजनों के मुताबिक, सोमवार की रात वह बाहर वाले कमरे में पढ़ाई कर रहा था। मां किचन में खाना बना रही थी। पिता पैतृक गांव गए हुए थे। रात करीब 10 बजे मां किचन से कमरे में आई तो वहां पंखे के सहारे गमछे से बने फंदे पर आर्यन काे झूलता देख सन्न रह गई।
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चीख-पुकार सुनकर पास-पड़ोस के लोग मौके पर पहुंचे और छात्र काे फंदे से उतारकर अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। आर्यन दो भाइयों में दूसरे नंबर पर था। बड़ा भाई आयुष जीएलए इंस्टीट्यूट मथुरा से बीटेक कर रहा है। पिता दिलीप सिंह ने बताया कि आर्यन पढ़ने में काफी होशियार था। सोमवार को उसका प्री बोर्ड का दसवीं का रिजल्ट आया था, जिसमें उसे अच्छे नंबर मिले थे। इसके लिए उसे स्कूल में पुरस्कृत भी किया गया था।
उन्होंने बताया कि आर्यन पर पढ़ाई का कोई दबाव नहीं था और न ही वह सोशल मीडिया में ही ज्यादा सक्रिय था। उसने फंदा किन परिस्थिति में लगाया, पता नहीं चल पा रहा। एसओ राजेश सिंह ने बताया कि परिजनाें की तहरीर के आधार पर शव का पोस्टमार्टम कराकर उन्हें सौंप दिया गया है। छात्र ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इस बारे में सभी पहलुओं पर छानबीन की जा रही है।


15 दिन में दो बोर्ड छात्र समेत पांंच नाबालिगों ने लगाई फंदा
सोनभद्र। जिले में आए दिन आत्महत्या की घटनाएं हो रही हैं। खुदकुशी करने वालों 18 से 35 वर्ष आयु वालों की संख्या अधिक है। अब नाबालिगाें के जान देने की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले 15 दिनों में पांच नाबालिग ने फंदा लगाकर जान दी है। इसमें दो बोर्ड के छात्र भी शामिल हैं। नाबालिगों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञ इसे अपनों से बढ़ती दूरी और मोबाइल से लगाव को कारण मान रहे हैं।




नाबालिग बच्चों की आत्महत्या की घटनाएं दुखद हैं। यह बताती हैं कि हमें अपने बच्चों की देखभाल के प्रति बहुत सतर्क होने की जरूरत है। 12 से 18 साल की उम्र में मानसिक और शारीरिक रूप से कई तरह के बदलाव होते हैं। यह काफी संवेदनशील समय होता है। घर, समाज या आसपास का व्यवहार उन पर गहरा असर डालता है। अभिभावक अपने बच्चों की गतिविधियों पर निगाह रखें। उनके साथ मित्रवत व्यवहार करें, ताकि वह खुलकर अपनी बात आपसे कह सकें। - डॉ. ऋचा पांडेय, मनोरोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज, सोनभद्र
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