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सोनभद्रः बसों के टायर ट्यूब ढंग के नहीं, कल-पुर्जे तक जुगाड़ के भरोसे, यात्रियों को हादसे का सता रहा भय
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राबर्ट्सगंज रोडवेज बस स्टैंड में बिना टायर की खड़ी बसें।
- फोटो : SONBHADRA
सूबे के परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अशोक कटारिया ने कानपुर में विभागीय अफसरों के साथ बैठक में रोडवेज बसों की बदहाली पर चिंता जताते हुए कहा था कि उन्हें बसों की हालत देखकर शर्म आती है। बसों की साफ-सफाई भी बेहतर नहीं होती। सोनभद्र जिले में भी संचालित रोडवेज की ज्यादातर बसों की हालत भी ऐसी है। खटारा हो चुकी बसों के टायर-ट्यूब तक ढंग के नहीं है। खिड़की-दरवाजे, सीट से लेकर कल-पुर्जे तक जुगाड़ के भरोसे हैं। इनमें यात्रा करने वाले लोग बीच रास्ते में ही बस रुकने से अक्सर परेशान होते हैं।
रोडवेज बसों के लिए संसाधनों का अभाव भी बड़ी वजह है। ज्यादातर बसों के लंबे समय से पार्ट्स ही नहीं बदले गए। टायर-ट्यूब के अभाव में डिपो परिसर में ही छह बसें खड़ी हैं। सड़कों पर दौड़ने वाली कई बसों में खिड़की-दरवाजे टूटे तो फिर संसाधन के अभाव में बदले ही नहीं गए। विभागीय अधिकारी-कर्मचारी डिमांड भेजते रहते हैं, मगर सुनवाई ही नहीं हो रही। सोनभद्र डिपो के बेड़े में शामिल 61 रोडवेज की बसें डेढ़ साल पहले तक सड़कों पर फर्राटा भरती थीं। कोरोना की दूसरी लहर के बाद से सोनभद्र डिपो की नौ बसें सरेंडर हैं। संसाधनों के अभाव में अभी इन बसों का संचालन नहीं हो सका है। अन्य बसें भी जरूरी कलपुर्जे के अभाव में रोडवेज बस स्टेशन परिसर में खड़ी हैं। रोडवेज कर्मचारियों की मानें तो टॉयर के साथ ही कमानी, बैटरी, मोबिल सहित बसों में लगने वाले छोटे-छोटे और महत्वपूर्ण कलपुर्जों का अभाव है। इस नाते करीब 15 रोडवेज की बसें सामान के अभाव में खड़ी हैं। काफी दिनों से सामान नहीं मिल रहा है। जिन बसों का टॉयर सही है, इस समय उन्हीं बसों का संचालन हो रहा है। वर्तमान में सड़क पर सोनभद्र डिपो की सिर्फ 34 बसों का ही संचालन कराया जा रहा है। जिन बसों का संचालन हो रहा है, उनमें भी पचास प्रतिशत बसों के टॉयर पुराने हो गए हैं। सड़कों की स्थिति सही न होने के कारण भी टॉयर ज्यादा खराब हो रहे हैं।
टायर के अभाव में खड़ी है छह बसें
राबर्ट्सगंज स्थित रोडवेज बस स्टेशन परिसर में छह रोडवेज की बसें टॉयर न होने के कारण करीब 15 दिन से खड़ी है। कमानी न होने से भी समस्या आ रही है। रोडवेज कर्मियों का कहना है कि यदि टॉयर आज मिल जाए तो छह बसों का संचालन होने लगेगा। लेकिन पत्र खिलने के बाद भी सामानों की आपूर्ति नहीं की जा रही है। इससे समस्या बनी हुई है।
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लंबे समय से नहीं मिल रही नई बसें
सोनभद्र डिपो को लंबे समय से नई बस नहीं मिल रही है। दो साल पहले तक डिपो की 65 बसें संचालित होती थी, लेकिन बसों के खटारा होने के कारण कई बसें नीलाम कर दी गई। कोरोना काल में बसों को सरेंडर करना पड़ा। कर्मचारियों की मानें तो करीब चार वर्ष से डिपो को एक भी नई बस नहीं मिली है।
इस संदर्भ में सोनभद्र डिपो के एआरएम एके सिंह ने कहा कि सामानों की आपूर्ति के लिए शासन स्तर से ही टेंडर में देरी हुई है। इस नाते टॉयर सहित अन्य सामानों की आपूर्ति होने में देरी हो रही है। अब टॉयर आने शुरू हो गए है। चार टॉयर एक-दो दिन में मिल जाएंगे। इससे दो बसें संचालित होने लगेगी। दो बसों का संचालन तीन दिन पहले शुरू हुआ है।
वहीं रोडवेज कर्मचारी संघ सोनभद्र के मंत्री प्रियंकर मिश्रा ने कहा कि शासन से जो साधन मुहैया कराई जा रही है, उसी में रोडवेज बसों का मरम्मत कराया जा रहा है। टॉयर न होने से छह बसें खड़ी है। कलपुर्जे के अभाव में सरेंडर की गई बसों का मरम्मत नहीं हो पा रहा है। समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
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रोडवेज बसों के लिए संसाधनों का अभाव भी बड़ी वजह है। ज्यादातर बसों के लंबे समय से पार्ट्स ही नहीं बदले गए। टायर-ट्यूब के अभाव में डिपो परिसर में ही छह बसें खड़ी हैं। सड़कों पर दौड़ने वाली कई बसों में खिड़की-दरवाजे टूटे तो फिर संसाधन के अभाव में बदले ही नहीं गए। विभागीय अधिकारी-कर्मचारी डिमांड भेजते रहते हैं, मगर सुनवाई ही नहीं हो रही। सोनभद्र डिपो के बेड़े में शामिल 61 रोडवेज की बसें डेढ़ साल पहले तक सड़कों पर फर्राटा भरती थीं। कोरोना की दूसरी लहर के बाद से सोनभद्र डिपो की नौ बसें सरेंडर हैं। संसाधनों के अभाव में अभी इन बसों का संचालन नहीं हो सका है। अन्य बसें भी जरूरी कलपुर्जे के अभाव में रोडवेज बस स्टेशन परिसर में खड़ी हैं। रोडवेज कर्मचारियों की मानें तो टॉयर के साथ ही कमानी, बैटरी, मोबिल सहित बसों में लगने वाले छोटे-छोटे और महत्वपूर्ण कलपुर्जों का अभाव है। इस नाते करीब 15 रोडवेज की बसें सामान के अभाव में खड़ी हैं। काफी दिनों से सामान नहीं मिल रहा है। जिन बसों का टॉयर सही है, इस समय उन्हीं बसों का संचालन हो रहा है। वर्तमान में सड़क पर सोनभद्र डिपो की सिर्फ 34 बसों का ही संचालन कराया जा रहा है। जिन बसों का संचालन हो रहा है, उनमें भी पचास प्रतिशत बसों के टॉयर पुराने हो गए हैं। सड़कों की स्थिति सही न होने के कारण भी टॉयर ज्यादा खराब हो रहे हैं।
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टायर के अभाव में खड़ी है छह बसें
राबर्ट्सगंज स्थित रोडवेज बस स्टेशन परिसर में छह रोडवेज की बसें टॉयर न होने के कारण करीब 15 दिन से खड़ी है। कमानी न होने से भी समस्या आ रही है। रोडवेज कर्मियों का कहना है कि यदि टॉयर आज मिल जाए तो छह बसों का संचालन होने लगेगा। लेकिन पत्र खिलने के बाद भी सामानों की आपूर्ति नहीं की जा रही है। इससे समस्या बनी हुई है।
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लंबे समय से नहीं मिल रही नई बसें
सोनभद्र डिपो को लंबे समय से नई बस नहीं मिल रही है। दो साल पहले तक डिपो की 65 बसें संचालित होती थी, लेकिन बसों के खटारा होने के कारण कई बसें नीलाम कर दी गई। कोरोना काल में बसों को सरेंडर करना पड़ा। कर्मचारियों की मानें तो करीब चार वर्ष से डिपो को एक भी नई बस नहीं मिली है।
इस संदर्भ में सोनभद्र डिपो के एआरएम एके सिंह ने कहा कि सामानों की आपूर्ति के लिए शासन स्तर से ही टेंडर में देरी हुई है। इस नाते टॉयर सहित अन्य सामानों की आपूर्ति होने में देरी हो रही है। अब टॉयर आने शुरू हो गए है। चार टॉयर एक-दो दिन में मिल जाएंगे। इससे दो बसें संचालित होने लगेगी। दो बसों का संचालन तीन दिन पहले शुरू हुआ है।
वहीं रोडवेज कर्मचारी संघ सोनभद्र के मंत्री प्रियंकर मिश्रा ने कहा कि शासन से जो साधन मुहैया कराई जा रही है, उसी में रोडवेज बसों का मरम्मत कराया जा रहा है। टॉयर न होने से छह बसें खड़ी है। कलपुर्जे के अभाव में सरेंडर की गई बसों का मरम्मत नहीं हो पा रहा है। समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।