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सोन पहाड़ी के एक कोने में सोना होने की वैज्ञानिकों ने की थी पुष्टि
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महुली। दुद्धी विकास खंड के महुली कस्बे से सटे पोलवा गांव में स्थित सोन पहाड़ी के किसी एक कोने में स्वर्ण भंडार होने का अनुमान वैज्ञानिकों के टीम ने करीब तीन दशक पहले लगा लिया था। करीब एक पखवाड़े तक यहां शिविर लगाकर इस टीम ने महुली क्षेत्र के पोलवा गांव के सोन पहाड़ी, देवढ़ी के शिव पहाड़ी, फूलवार के सूईचट्टान पहाड़ी, जाताजुआ के अधमुआ पहाड़ी, डूमरा के जोगिया पहाड़ी सहित कई अन्य पहाड़ियों का स्थलीय निरीक्षण किया था।
टीम ने सर्वेक्षण करने के बाद पोलवा गांव में स्थित करीब पांच एकड़ में विस्तृत सोन पहाड़ी के एक कोने पर प्रचुर मात्रा में सोना होने का अनुमान लगाया था। समाजसेवी ओंकार नाथ गुप्ता ने बताया कि सोन पहाड़ी राजा बरियार शाह की विरासत है इसलिए यहां सोना मिलने की पूरी संभावना है। अठारहवीं सदी में यह इलाका पोलवा स्टेट के रूप में विख्यात था। इसकी सीमा झारखंड के हलिवंता गांव से लेकर मध्य प्रदेश के सिंगरौली तक विस्तृत था। पूर्वजों के अनुसार धन सम्पदा से भरपूर यहां के नि:संतान राजा बरियार शाह के पास अकूत सोना व अष्टधातु था। राजा के द्वारा प्रतिदिन सवा मुठ्ठी स्वर्ण दान करने की कहानियाँ आज भी बुजुर्गों के जुबान पर है। सोन पहाड़ी से सटे राजा पोखरा एवं रानी पोखरा का अस्तित्व शनै: शनै: समाप्त होने के बाद अब इसमें फसलें लहलहा रही हैं। वहीं सोन पहाड़ी के एक छोर पर लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण से इसकी प्राकृतिक सुषमा पर भी ग्रहण सा लगता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो दशकों में सोन पहाड़ी का दायरा काफी सिमट गया है। इस दौरान जिले के विभिन्न पहाड़ियों में सोना मिलने की चर्चा के बीच सोन पहाड़ी पर अधिकारिक खुदाई कराए जाने की मांग भी तेज हो गई है।
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टीम ने सर्वेक्षण करने के बाद पोलवा गांव में स्थित करीब पांच एकड़ में विस्तृत सोन पहाड़ी के एक कोने पर प्रचुर मात्रा में सोना होने का अनुमान लगाया था। समाजसेवी ओंकार नाथ गुप्ता ने बताया कि सोन पहाड़ी राजा बरियार शाह की विरासत है इसलिए यहां सोना मिलने की पूरी संभावना है। अठारहवीं सदी में यह इलाका पोलवा स्टेट के रूप में विख्यात था। इसकी सीमा झारखंड के हलिवंता गांव से लेकर मध्य प्रदेश के सिंगरौली तक विस्तृत था। पूर्वजों के अनुसार धन सम्पदा से भरपूर यहां के नि:संतान राजा बरियार शाह के पास अकूत सोना व अष्टधातु था। राजा के द्वारा प्रतिदिन सवा मुठ्ठी स्वर्ण दान करने की कहानियाँ आज भी बुजुर्गों के जुबान पर है। सोन पहाड़ी से सटे राजा पोखरा एवं रानी पोखरा का अस्तित्व शनै: शनै: समाप्त होने के बाद अब इसमें फसलें लहलहा रही हैं। वहीं सोन पहाड़ी के एक छोर पर लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण से इसकी प्राकृतिक सुषमा पर भी ग्रहण सा लगता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो दशकों में सोन पहाड़ी का दायरा काफी सिमट गया है। इस दौरान जिले के विभिन्न पहाड़ियों में सोना मिलने की चर्चा के बीच सोन पहाड़ी पर अधिकारिक खुदाई कराए जाने की मांग भी तेज हो गई है।
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