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Sonebhadra News: प्रदर्शनकारियों की शिकायतें सुनीं
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सोनभद्र। घोरावल तहसील अंतर्गत ग्राम भैंसवार में वर्षों से लंबित चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए नाराज किसानों ने बृहस्पतिवार को धरना दिया। धरने का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के जिलाध्यक्ष बिरजू कुशवाहा ने किया। सूचना पर एसडीएम और सीओ घोरावल एवं चकबंदी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों की शिकायतें सुनीं। किसानों को आश्वस्त किया कि शिकायतों का समाधान नियमों के तहत किया जाएगा।
इस दौरान चकबंदी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी किसानों को अवगत कराया कि ग्राम भैंसवार में चकबंदी प्रक्रिया वर्ष 1986 से चल रही है। हालांकि 31 मार्च 1992 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने धारा 10 तक की कार्रवाई को निरस्त कर दिया था। यह प्रक्रिया अब फिर प्रारंभिक स्थिति से शुरू होकर चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि चकबंदी प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किए जाने का आदेश चकबंदी आयुक्त एवं उच्च न्यायालय की ओर से दिया गया है।
धरने पर बैठे किसानों ने आरोप लगाया कि चकबंदी में बंटवारे के दौरान तरमीम, जोत-कोड़ और कब्जा को आधार नहीं बनाया गया और करीब 450 बीघा की फर्जी खतौनी दर्ज की गई है। किसानों ने मांग की कि चकबंदी अधिकारी संजीव राय की ओर से पारित आदेश को निरस्त किया जाए। इस पर एसडीएम घोरावल ने प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति चकबंदी प्रक्रिया से असंतुष्ट है, तो वह सक्षम न्यायालय में जा सकता है।
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उन्होंने यह भी दोहराया कि चकबंदी प्रक्रिया शासन की शीर्ष प्राथमिकता में है और इसे हर हाल में नियमानुसार पूर्ण किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि 5 जुलाई को संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम एवं एसपी ने ग्रामवासियों की समस्याएं सुनी थीं और चकबंदी से जुड़ी शिकायतें संबंधित न्यायालयों में प्रस्तुत करने की सलाह दी थी।
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इस दौरान चकबंदी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी किसानों को अवगत कराया कि ग्राम भैंसवार में चकबंदी प्रक्रिया वर्ष 1986 से चल रही है। हालांकि 31 मार्च 1992 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने धारा 10 तक की कार्रवाई को निरस्त कर दिया था। यह प्रक्रिया अब फिर प्रारंभिक स्थिति से शुरू होकर चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि चकबंदी प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किए जाने का आदेश चकबंदी आयुक्त एवं उच्च न्यायालय की ओर से दिया गया है।
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धरने पर बैठे किसानों ने आरोप लगाया कि चकबंदी में बंटवारे के दौरान तरमीम, जोत-कोड़ और कब्जा को आधार नहीं बनाया गया और करीब 450 बीघा की फर्जी खतौनी दर्ज की गई है। किसानों ने मांग की कि चकबंदी अधिकारी संजीव राय की ओर से पारित आदेश को निरस्त किया जाए। इस पर एसडीएम घोरावल ने प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति चकबंदी प्रक्रिया से असंतुष्ट है, तो वह सक्षम न्यायालय में जा सकता है।
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उन्होंने यह भी दोहराया कि चकबंदी प्रक्रिया शासन की शीर्ष प्राथमिकता में है और इसे हर हाल में नियमानुसार पूर्ण किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि 5 जुलाई को संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम एवं एसपी ने ग्रामवासियों की समस्याएं सुनी थीं और चकबंदी से जुड़ी शिकायतें संबंधित न्यायालयों में प्रस्तुत करने की सलाह दी थी।