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हिंदी हमारी सामाजिक और भाषाई पहचान
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लोढ़ी स्थित संत कीनाराम सीनियर सेक्रेंडी पब्लिक स्कूल में हिंदी दिवस पर गोष्ठी को संबोधित करते ?
- फोटो : SONBHADRA
हिंदी दिवस पर बुधवार को गोष्ठियों में हिंदी के उत्थान पर चर्चा हुई। भाषा की खूबियां बताते हुए उसे आम बोलचाल और दैनिक व्यवहार में अपनाने पर जोर दिया गया। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताएं भी हुईं। सुलेख, निबंध लेखन के जरिए प्रतिभागियों ने हिंदी में अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया।
संत कीनाराम पीजी कॉलेज लोढ़ी में हुई गोष्ठी में मुख्य अतिथि पूूर्वी यूपी, बिहार और झारखंड में आएसएस के संयोजक रामाशीष जी ने कहा कि भाषा केवल बात कहने का ही नहीं, बात समझने का भी साधन है। सभ्य समाज केवल बोलकर ही नहीं, लिखकर भी अपनी बात करता है। अध्यक्षीय संबोधन में अजय शेखर ने कहा कि भाषा जोड़ती है, तोड़ती नहीं। आज हिंदी भाषा मान ली गई है तो वह इसलिए नहीं कि वह किसी प्रांत विशेष की भाषा है, बल्कि इसलिए कि वह अपनी सरलता, व्यापकता और क्षमता के कारण सारे देश की भाषा हो सकती है।
50 हिंदी विभूतियों को अमृत सम्मान से प्राचार्य डॉ. गोपाल सिंह ने सम्मानित किया। संचालन भोलानाथ मिश्र ने किया। इस अवसर पर मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी, रामनाथ शिवेंद्र, पारस नाथ मिश्र, डॉ. रचना तिवारी, डॉ. अर्जुन दास केशरी, जगदीश पंथी, डॉ. वीरेंद्र प्रसाद शिमला आदि मौजूद रहे।
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उधर, राजकीय महिला महाविद्यालय राबर्ट्सगंज के हिंदी विभाग में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या डॉ. वंदना ने किया। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रवींद्र यादव ने हिंदी के विकास, उसकी संवैधानिक स्थिति और वर्तमान में उसके प्रसार पर प्रकाश डाला। डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि हिंदी हमारी सामाजिक एवं भाषाई पहचान है। डॉ. गिरीश कुमार, डॉ. दिलीप कुमार सिंह, मंजूषा राय ने भी विचार रखे।
छात्राओं ने नाटक, भाषण, गीत, कविता के माध्यम से हिंदी के महत्व को बताया। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. वंदना ने की। इस मौके पर दीपिका, संजना, मुस्कान, आकांक्षा पांडेय, आरती, रिंपी आदि रहीं। सनबीम स्कूल में हिंदी दिवस पर बच्चों ने कविता, गीत, कहानी, भाषण की प्रस्तुतियां दी। प्रधानाचार्या श्वेता यादव व उप प्रधानाचार्य आनंद सिंह ने हिंदी का महत्व बताते हुए हिंदी बोलने, पढ़ने, लिखने के लिए प्रेरित किया।
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संत कीनाराम पीजी कॉलेज लोढ़ी में हुई गोष्ठी में मुख्य अतिथि पूूर्वी यूपी, बिहार और झारखंड में आएसएस के संयोजक रामाशीष जी ने कहा कि भाषा केवल बात कहने का ही नहीं, बात समझने का भी साधन है। सभ्य समाज केवल बोलकर ही नहीं, लिखकर भी अपनी बात करता है। अध्यक्षीय संबोधन में अजय शेखर ने कहा कि भाषा जोड़ती है, तोड़ती नहीं। आज हिंदी भाषा मान ली गई है तो वह इसलिए नहीं कि वह किसी प्रांत विशेष की भाषा है, बल्कि इसलिए कि वह अपनी सरलता, व्यापकता और क्षमता के कारण सारे देश की भाषा हो सकती है।
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50 हिंदी विभूतियों को अमृत सम्मान से प्राचार्य डॉ. गोपाल सिंह ने सम्मानित किया। संचालन भोलानाथ मिश्र ने किया। इस अवसर पर मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी, रामनाथ शिवेंद्र, पारस नाथ मिश्र, डॉ. रचना तिवारी, डॉ. अर्जुन दास केशरी, जगदीश पंथी, डॉ. वीरेंद्र प्रसाद शिमला आदि मौजूद रहे।
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उधर, राजकीय महिला महाविद्यालय राबर्ट्सगंज के हिंदी विभाग में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या डॉ. वंदना ने किया। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रवींद्र यादव ने हिंदी के विकास, उसकी संवैधानिक स्थिति और वर्तमान में उसके प्रसार पर प्रकाश डाला। डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि हिंदी हमारी सामाजिक एवं भाषाई पहचान है। डॉ. गिरीश कुमार, डॉ. दिलीप कुमार सिंह, मंजूषा राय ने भी विचार रखे।
छात्राओं ने नाटक, भाषण, गीत, कविता के माध्यम से हिंदी के महत्व को बताया। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. वंदना ने की। इस मौके पर दीपिका, संजना, मुस्कान, आकांक्षा पांडेय, आरती, रिंपी आदि रहीं। सनबीम स्कूल में हिंदी दिवस पर बच्चों ने कविता, गीत, कहानी, भाषण की प्रस्तुतियां दी। प्रधानाचार्या श्वेता यादव व उप प्रधानाचार्य आनंद सिंह ने हिंदी का महत्व बताते हुए हिंदी बोलने, पढ़ने, लिखने के लिए प्रेरित किया।