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अस्पतालों का निर्माण अधर में, स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल

Sun, 09 Apr 2017 10:50 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,सोनभद्र
ब्यूरो,अमर उजाला,सोनभद्र Updated Sun, 09 Apr 2017 10:50 PM IST
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health services is in very bad condition at sonbhadra
निर्माणाधीन सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन अब तक अधूरे - फोटो : अमर उजाला
सोनभद्र जिले में आम लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए वर्षों से  निर्माणाधीन सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन अब तक अधूरे पड़े हैं। कोन सीएचसी का निर्माण एक साल से बंद है। चतरा सीएचसी भवन का निर्माण वर्ष 2009 से चल रहा और अब तक पूर्ण नहीं हो सका। ऐसे ही कई अन्य अस्पतालों के निर्माण की गति काफी सुस्त है। अधिकारियों की सख्ती भी तेजी नहीं ला सकेगी। 
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बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा से सटे सोनभद्र में स्वास्थ्य सेवाएं अब भी काफी बदतर हैं। मैन पावर कम होने से सेवाएं प्रभावित तो हैं हीं, जिन अस्पतालों का निर्माण भी शुरू हुआ उनमें तेजी नहीं आई।
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घोरावल प्रतिनिधि के अनुसार सीएचसी के बगल में 50 बेड का मैटरनिटी अस्पताल निर्माणाधीन है। शिवद्वार, धरसड़ा, जोगिनी, खजुरी, बेलाही, लोहरतलिया में पीएचसी का निर्माण दो वर्षों से हो रहा। कहीं भवन की दीवार बन पाई है तो कही पर भवन बनकर तैयार है लेकिन फर्श, प्लास्टर, वायरिंग, टाइल्स का काम नहीं हो पाया है। हालांकि धरसड़ा, लोहरतलिया, खजुरी,  बेलाही, शिवद्वार में डॉक्टर और फार्मासिस्ट की नियुक्ति हो चुकी है। इन स्थानों पर बेहद धीमी गति से काम हो रहा है। मूर्तिया गांव में अभी पीएचसी का सिर्फ शिलान्यास ही हो पाया है। 
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कोन प्रतिनिधि के अनुसार कोन में सीएचसी का निर्माण वर्ष 2015 से चल रहा था, लेकिन पिछले एक साल से काम पूरी तरह से बंद है। आधा अधूरा निर्माण कराकर छोड़ दिया गया है।

रामगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार चतरा तियरा गांव में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में वर्ष 2009 में सीएचसी निर्माण की आधारशिला रखी गई थी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ लेकिन कार्यदायी संस्था की न तो कार्य गति तेज थी और न ही मानक ठीक था। इसका नतीजा रहा कि कार्य आधा अधूरा ही रह गया।


कई बार कमिश्नर, डीएम समेत तमाम अधिकारियों ने यहां निरीक्षण किया। शासन तक पत्राचार किया, लेकिन अब भी स्थिति जस की तस है। जो भवन बना भी है तो उसमें दरार पड़ गई है। अब करीब तीन साल से निर्माण भी बंद है।

प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. कीर्ति आजाद बिंद का कहना है कि कई बार काम बंद होने की शिकायत की गई, लेकिन अब तक निर्माण नहीं शुरू हो सका।
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