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तैयार हो रहीं छह भूमिगत खदानें
sonbhadra
Updated Sun, 03 Jul 2016 12:13 AM IST
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बिजली
- फोटो : अमर उजाला
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खुली खदान के लिए पहचाने जाने वाले सिंगरौली कोल फील्ड्स में ही आने वाले वर्षों में कई अंडर ग्राउंड खदानें संचालित होती दिखेंगी। इसके लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। फिलहाल कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की ओर से अपनी अनुषंगी कंपनी एनसीएल के जरिए मेन बेसिन में अंडरग्राउंड के रूप में चिह्नित 11 में से छह को संचालन के लिए तैयार करने के निमित्त सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) और मिनरल एक्सप्लोरेशन कारपोरेशन लिमिटेड (एमईसीएल) से ड्रिलिंग का कार्य करवाया जा रहा है।
रोजाना की रिपोर्ट भी सीआइएल के कोलकाता मुख्यालय जा रही है।
1890 वर्ग किमी वाले मेन बेसिन में डोंगरीताला, पातपहाडिय़ा, मरकीबरका वेस्ट, मरकीबरका ईस्ट, सराटोला, बोरका, गुरबरा नार्थ, गुरबरा सेंट्रल, गुरबरा साउथ, इंगुरी और पुरैल कोल ब्लाक्स एरिया का अंडरग्राउंड खदान के रूप में चिह्नांकन किया गया है। सूत्र बताते हैं कि इसमें से मरकीबरका ईस्ट, मकरीबरका वेस्ट फेस द्वितीय, पुरैल सी, पुरैल डी की ड्रिलिंग सीआइएल कोटे (पूर्णत: एनसीएल का स्वामित्व) में की जा रही है। वहीं धिरौली की ड्रिलिंग नान सीआइएल और बरीमहुली की ड्रिलिंग प्रमोशनल कोटे में कराया जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो इन दोनों खदानों को पब्लिक, प्राइवेट दोनों सेक्टर के लिए विकल्प खुला रखा गया है। आगे चलकर तय होगा कि इस खदान का संचालन कौन करेगा। मकरी बरका ईस्ट की ड्रिलिंग सीएमपीडीआई और शेष की ड्रिलिंग एमईसीएल कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि कितनी ड्रिलिंग हुई, कोयले की परत कितनी मोटी है आदि चीजों की रोजाना रिपोर्ट एनसीएल मुख्यालय के साथ ही कोल इंडिया को भी भेजी जा रही है। उधर, एनसीएल प्रबंधन का कहना है कि मेन बेसिन में फिलहाल दो अंडरग्राउंड खदानों के संचालन की तैयारी की गई है। इसको लेकर जरूरी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
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रोजाना की रिपोर्ट भी सीआइएल के कोलकाता मुख्यालय जा रही है।
1890 वर्ग किमी वाले मेन बेसिन में डोंगरीताला, पातपहाडिय़ा, मरकीबरका वेस्ट, मरकीबरका ईस्ट, सराटोला, बोरका, गुरबरा नार्थ, गुरबरा सेंट्रल, गुरबरा साउथ, इंगुरी और पुरैल कोल ब्लाक्स एरिया का अंडरग्राउंड खदान के रूप में चिह्नांकन किया गया है। सूत्र बताते हैं कि इसमें से मरकीबरका ईस्ट, मकरीबरका वेस्ट फेस द्वितीय, पुरैल सी, पुरैल डी की ड्रिलिंग सीआइएल कोटे (पूर्णत: एनसीएल का स्वामित्व) में की जा रही है। वहीं धिरौली की ड्रिलिंग नान सीआइएल और बरीमहुली की ड्रिलिंग प्रमोशनल कोटे में कराया जा रहा है।
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सूत्रों की मानें तो इन दोनों खदानों को पब्लिक, प्राइवेट दोनों सेक्टर के लिए विकल्प खुला रखा गया है। आगे चलकर तय होगा कि इस खदान का संचालन कौन करेगा। मकरी बरका ईस्ट की ड्रिलिंग सीएमपीडीआई और शेष की ड्रिलिंग एमईसीएल कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि कितनी ड्रिलिंग हुई, कोयले की परत कितनी मोटी है आदि चीजों की रोजाना रिपोर्ट एनसीएल मुख्यालय के साथ ही कोल इंडिया को भी भेजी जा रही है। उधर, एनसीएल प्रबंधन का कहना है कि मेन बेसिन में फिलहाल दो अंडरग्राउंड खदानों के संचालन की तैयारी की गई है। इसको लेकर जरूरी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
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